UPSRTC हुआ प्राइवेट! निजी हाथों में स्टेशन और बस कारखाना

UPSRTC हुआ प्राइवेट! निजी हाथों में स्टेशन और बस कारखाना
UPSRTC

देश में सार्वजनिक परिवहन का नेटवर्क आमतौर पर सरकारी नियंत्रण में होता है, लेकिन अब समय के साथ इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र का दखल बढ़ता जा रहा है. निजी हाथों में बस स्टेशन और वर्कशॉप का संचालन एक नई प्रवृत्ति है, जो शहरों और कस्बों में परिवहन व्यवस्था को और भी सुदृढ़ और प्रबंधनीय बना सकता है.

निजी हाथों में बस स्टेशन और वर्कशॉप

निजी हाथों में बस स्टेशन का मतलब है कि निजी कंपनियाँ या व्यवसाय इस प्रकार के स्टेशनों का निर्माण और संचालन करती हैं. इन स्टेशनों का उद्देश्य यात्रियों को उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएं प्रदान करना होता है. ये निजी बस स्टेशन सरकार द्वारा नियंत्रित सार्वजनिक स्टेशनों से अलग होते हैं और इनका संचालन स्वायत्त रूप से होता है उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रधान प्रबंधक व प्रवक्ता अमरनाथ सहाय का कहना है कि अधिकारियों की कमी को पूरा करने के लिए डिपो इंचार्ज की नियुक्ति की गई है. विधि अधिकारी भी भर्ती किए गए हैं. साक्षात्कार के आधार पर इनका चयन हुआ है. परिणाम घोषित कर दिया गया है. इन अधिकारियों के आने से सुचारू ढंग से व्यवस्थाएं संचालित हो सकेंगी. सड़क परिवहन निगम में धीरे-धीरे निजीकरण बढ़ रहा है. ड्राइवर-कंडक्टर अब निजी फर्मों से भर्ती किए जा रहे हैं.

रोडवेज के वर्कशॉप निजी हाथों में सौंप जा रहे हैं. बस स्टेशनों को भी प्राइवेट हाथों में दिया जा रहा है. यही नहीं कंसल्टेंट भी बाहर से ही रखे जा रहे हैं. इन सबके बाद अब पहली बार डिपो इंचार्ज भी प्राइवेट फर्म के जरिए ही भर्ती किए गए हैं. परिवहन निगम ने डिपो इंचार्ज और विधि अधिकारियों की भर्ती की जिम्मेदारी वंशिका नाम की फर्म को दी थी. परिवहन निगम ने अपने 23 बस स्टेशनों को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने का फैसला लिया. यानी यह बस स्टेशन प्राइवेट फर्म बनाकर तैयार करेंगी और अगले 90 साल के लिए इन्हें अपने कब्जे में लेंगी. इनमें चारबाग (लखनऊ), सोहराबगेट (मेरठ), जीरो रोड (प्रयागराज), अमौसी (लखनऊ) , अयोध्याधाम, रायबरेली, कौशाम्बी (गाजियाबाद) बस स्टेशन (गाजियाबाद), डिपो कार्यशाला अमौसी (लखनऊ), बस स्टेशन बुलन्दशहर, बस स्टेशन डिपो कार्यशाला साहिबाबाद (गाजियाबाद), नोएडा बस स्टेशन, फाउन्ड्रीनगर बस स्टेशन/डिपो कार्यशाला (आगरा). निजी कंपनियाँ यात्रियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएँ जैसे एयर कंडीशनिंग फ्री वाई-फाई स्वच्छता, आरामदायक बैठने की व्यवस्था आदि प्रदान कर सकती हैं.

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19 कार्यशालाओं को भी किया निजी फर्मों के हवाले

19 कार्यशालाओं को भी किया निजी फर्मों के हवाले रू इससे पहले उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम प्रशासन ने अपनी 19 कार्यशालाओं को भी निजी फर्म के हवाले कर दिया था. इनमें मेरठ का सोहराब गेट डिपो, सहारनपुर क्षेत्र का छुटमलपुर डिपो, अलीगढ़ क्षेत्र का एटा डिपो, कानपुर क्षेत्र का विकास नगर डिपो, नजीराबाद डिपो, हरदोई डिपो, अवध डिपो, जीरो रोड डिपो, ताज डिपो, साहिबाबाद डिपो, बदायूं डिपो, इटावा डिपो, झांसी डिपो, कैंट डिपो, बांदा डिपो और बलरामपुर डिपो. सड़क परिवहन निगम में दिन-प्रतिदिन अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या कम होती जा रही है. ऐसे में डिपो और बस स्टेशन का संचालन भी मुश्किल होने लगा है.

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बसों के संचालन के लिए चालकों की कमी है तो वर्कशॉप और बस स्टेशन पर अधिकारियों की कमी से परिवहन निगम जूझ रहा है. सीधे पदों पर भर्ती बीते कई साल से बंद है. ऐसे में निगम प्रशासन के सामने बाहरी स्रोत से अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती का रास्ता बचा है. अब इसी रास्ते पर परिवहन निगम तेजी से आगे बढ़ भी रहा है. दो दिन पहले ही परिवहन निगम प्रशासन की तरफ से एक निजी फर्म से साक्षात्कार के जरिए 68 डिपो इंचार्ज की नियुक्ति की गई. वहीं छह विधि अधिकारी भी रखे गए हैं. कुल मिलाकर 68 डिपो इचांर्ज की बाह्य स्रोत से भर्ती हुई है. इनमें 26 जनरल कैटेगरी, 16 ओबीसी, 12 अनुसूचित जाति, एक अनुसूचित जनजाति और और तीन ईडब्ल्यूएस कोटे से हैं. इसके अलावा विधि अधिकारी भी आउटसोर्स ही रखे गए हैं. इनकी संख्या छह है। 

भारतीय बस्ती
bhartiyabasti.com
01 Apr 2025 By Shambhunath Gupta

UPSRTC हुआ प्राइवेट! निजी हाथों में स्टेशन और बस कारखाना

देश में सार्वजनिक परिवहन का नेटवर्क आमतौर पर सरकारी नियंत्रण में होता है, लेकिन अब समय के साथ इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र का दखल बढ़ता जा रहा है. निजी हाथों में बस स्टेशन और वर्कशॉप का संचालन एक नई प्रवृत्ति है, जो शहरों और कस्बों में परिवहन व्यवस्था को और भी सुदृढ़ और प्रबंधनीय बना सकता है.

निजी हाथों में बस स्टेशन और वर्कशॉप

निजी हाथों में बस स्टेशन का मतलब है कि निजी कंपनियाँ या व्यवसाय इस प्रकार के स्टेशनों का निर्माण और संचालन करती हैं. इन स्टेशनों का उद्देश्य यात्रियों को उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएं प्रदान करना होता है. ये निजी बस स्टेशन सरकार द्वारा नियंत्रित सार्वजनिक स्टेशनों से अलग होते हैं और इनका संचालन स्वायत्त रूप से होता है उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रधान प्रबंधक व प्रवक्ता अमरनाथ सहाय का कहना है कि अधिकारियों की कमी को पूरा करने के लिए डिपो इंचार्ज की नियुक्ति की गई है. विधि अधिकारी भी भर्ती किए गए हैं. साक्षात्कार के आधार पर इनका चयन हुआ है. परिणाम घोषित कर दिया गया है. इन अधिकारियों के आने से सुचारू ढंग से व्यवस्थाएं संचालित हो सकेंगी. सड़क परिवहन निगम में धीरे-धीरे निजीकरण बढ़ रहा है. ड्राइवर-कंडक्टर अब निजी फर्मों से भर्ती किए जा रहे हैं.

रोडवेज के वर्कशॉप निजी हाथों में सौंप जा रहे हैं. बस स्टेशनों को भी प्राइवेट हाथों में दिया जा रहा है. यही नहीं कंसल्टेंट भी बाहर से ही रखे जा रहे हैं. इन सबके बाद अब पहली बार डिपो इंचार्ज भी प्राइवेट फर्म के जरिए ही भर्ती किए गए हैं. परिवहन निगम ने डिपो इंचार्ज और विधि अधिकारियों की भर्ती की जिम्मेदारी वंशिका नाम की फर्म को दी थी. परिवहन निगम ने अपने 23 बस स्टेशनों को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने का फैसला लिया. यानी यह बस स्टेशन प्राइवेट फर्म बनाकर तैयार करेंगी और अगले 90 साल के लिए इन्हें अपने कब्जे में लेंगी. इनमें चारबाग (लखनऊ), सोहराबगेट (मेरठ), जीरो रोड (प्रयागराज), अमौसी (लखनऊ) , अयोध्याधाम, रायबरेली, कौशाम्बी (गाजियाबाद) बस स्टेशन (गाजियाबाद), डिपो कार्यशाला अमौसी (लखनऊ), बस स्टेशन बुलन्दशहर, बस स्टेशन डिपो कार्यशाला साहिबाबाद (गाजियाबाद), नोएडा बस स्टेशन, फाउन्ड्रीनगर बस स्टेशन/डिपो कार्यशाला (आगरा). निजी कंपनियाँ यात्रियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएँ जैसे एयर कंडीशनिंग फ्री वाई-फाई स्वच्छता, आरामदायक बैठने की व्यवस्था आदि प्रदान कर सकती हैं.

19 कार्यशालाओं को भी किया निजी फर्मों के हवाले

19 कार्यशालाओं को भी किया निजी फर्मों के हवाले रू इससे पहले उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम प्रशासन ने अपनी 19 कार्यशालाओं को भी निजी फर्म के हवाले कर दिया था. इनमें मेरठ का सोहराब गेट डिपो, सहारनपुर क्षेत्र का छुटमलपुर डिपो, अलीगढ़ क्षेत्र का एटा डिपो, कानपुर क्षेत्र का विकास नगर डिपो, नजीराबाद डिपो, हरदोई डिपो, अवध डिपो, जीरो रोड डिपो, ताज डिपो, साहिबाबाद डिपो, बदायूं डिपो, इटावा डिपो, झांसी डिपो, कैंट डिपो, बांदा डिपो और बलरामपुर डिपो. सड़क परिवहन निगम में दिन-प्रतिदिन अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या कम होती जा रही है. ऐसे में डिपो और बस स्टेशन का संचालन भी मुश्किल होने लगा है.

बसों के संचालन के लिए चालकों की कमी है तो वर्कशॉप और बस स्टेशन पर अधिकारियों की कमी से परिवहन निगम जूझ रहा है. सीधे पदों पर भर्ती बीते कई साल से बंद है. ऐसे में निगम प्रशासन के सामने बाहरी स्रोत से अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती का रास्ता बचा है. अब इसी रास्ते पर परिवहन निगम तेजी से आगे बढ़ भी रहा है. दो दिन पहले ही परिवहन निगम प्रशासन की तरफ से एक निजी फर्म से साक्षात्कार के जरिए 68 डिपो इंचार्ज की नियुक्ति की गई. वहीं छह विधि अधिकारी भी रखे गए हैं. कुल मिलाकर 68 डिपो इचांर्ज की बाह्य स्रोत से भर्ती हुई है. इनमें 26 जनरल कैटेगरी, 16 ओबीसी, 12 अनुसूचित जाति, एक अनुसूचित जनजाति और और तीन ईडब्ल्यूएस कोटे से हैं. इसके अलावा विधि अधिकारी भी आउटसोर्स ही रखे गए हैं. इनकी संख्या छह है। 

https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/upsrtc-becomes-private--station-and-bus-factory-in-private-hands/article-18781
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शम्भूनाथ गुप्ता पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। 'मीडिया दस्तक' और 'बस्ती चेतना' जैसे प्लेटफॉर्म पर न्यूज़ और वीडियो एडिटिंग टीम में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। न्यूज़ प्रोडक्शन और डिजिटल कंटेंट निर्माण में गहरा अनुभव रखते हैं। वर्तमान में वे 'भारतीय बस्ती' की उत्तर प्रदेश टीम में कार्यरत हैं, जहां वे राज्य से जुड़ी खबरों की गंभीर और सटीक कवरेज में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।