यूपी के 407 गांव में होगा विकास, भवन निर्माण से पहले कराना होगा नक्शा पास
प्रथम बार महायोजना में 407 गांव को शामिल किया गया है। इसके द्वारा यहां के लोगों को सुनियोजित विकास का लाभ मिलेगा। अब इस क्षेत्र में भू-उपयोग के अनुसार ही भवन आदि का मानचित्र स्वीकृत कराना होगा, जिससे वहाँ का विकास सुचारू और सामर्थ्यवर्धक हो सके।
अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) महायोजना-2031 के अंतर्गत शहर के 8 किलोमीटर के अंदर आने वाले सभी 407 गांव को अच्छा लाभ होगा और गांव में नियोजित विकास करवाया जाएगा। इन सभी गांवों के निवासियों को अब भू-उपयोग के तहत ही अपने घर का निर्माण करने से पहले मानचित्र स्वीकृत करवाना होगा।
साल 1980 से 2001 के बीच प्रथम बार महायोजना लागू हुई थी और इसका नाम महायोजना-2001 रखा गया था। इसमें नगर पालिका अलीगढ़ (उस समय नगर निगम नहीं बना था) के साथ ही शहर के आठ किलोमीटर के अंतर्गत 203 गांव और हरदुआगंज नगर पंचायत को सम्मिलित करवाया गया था। 2001 से 2021 के मध्य में दूसरी महायोजना लागू हुई थी और तीसरी महायोजना 2031 में लागू करवा दी गई है। तीन महायोजना के लागू होने के बाद जिला पंचायत के दखल देने की वजह से एडिए इन गांव में बहुत से काम नहीं कर पाया था परंतु अब यह दिक्कत दूर हो चुकी है।
यह भी पढ़ें: यूपी में बस्ती, अयोध्या, लखनऊ समेत कई जिलों में तेज बारिश और आंधी, मौसम विभाग ने बताया आगे कैसा रहेगा हालअपूर्व दुबे (जड़िए उपाध्यक्ष) ने कहा है कि प्रथम बार महा योजना में 407 गांव को शामिल किया गया है और इससे यहाँ के लोगों को विकास का लाभ मिलेगा। अब यहाँ के निवासियों को भू-उपयोग के अनुसार ही भवनों का मानचित्र मंजूर कराना होगा। आगे उन्होंने बताया कि रामघाट रोड पर अभी तक एक पट्टी व्यवसायिक और दूसरी आवासीय थी, जो एडीए कार्यालय और ओएलएफ की ओर थी।
यह भी पढ़ें: Uttar Pradesh Panchayat Chunav: चुनाव पर सस्पेंस जारी, योगी सरकार के मंत्री बोले- कोर्ट के आदेश का इंतजारइस कारण से विरुद्ध भू-उपयोग के लिए एडीए से मानचित्र स्वीकृत कराना मुश्किल था। पहले अवैध निर्माण की वजह से यह समस्या उत्पन्न हुई थी। नई महायोजना में मिश्रित भू-उपयोग होने से पुराने निर्माण के नक्शे भी मंजूर हो जाएंगे। बाजार स्ट्रीट योजना के लिए ज्यादातर 24 मीटर चौड़ा रोड आवश्यक होता है, लेकिन अलीगढ़ में 18 मीटर चौड़ा रोड को भी मंजूरी दी गई है।
यूपी के 407 गांव में होगा विकास, भवन निर्माण से पहले कराना होगा नक्शा पास
प्रथम बार महायोजना में 407 गांव को शामिल किया गया है। इसके द्वारा यहां के लोगों को सुनियोजित विकास का लाभ मिलेगा। अब इस क्षेत्र में भू-उपयोग के अनुसार ही भवन आदि का मानचित्र स्वीकृत कराना होगा, जिससे वहाँ का विकास सुचारू और सामर्थ्यवर्धक हो सके।
अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) महायोजना-2031 के अंतर्गत शहर के 8 किलोमीटर के अंदर आने वाले सभी 407 गांव को अच्छा लाभ होगा और गांव में नियोजित विकास करवाया जाएगा। इन सभी गांवों के निवासियों को अब भू-उपयोग के तहत ही अपने घर का निर्माण करने से पहले मानचित्र स्वीकृत करवाना होगा।
साल 1980 से 2001 के बीच प्रथम बार महायोजना लागू हुई थी और इसका नाम महायोजना-2001 रखा गया था। इसमें नगर पालिका अलीगढ़ (उस समय नगर निगम नहीं बना था) के साथ ही शहर के आठ किलोमीटर के अंतर्गत 203 गांव और हरदुआगंज नगर पंचायत को सम्मिलित करवाया गया था। 2001 से 2021 के मध्य में दूसरी महायोजना लागू हुई थी और तीसरी महायोजना 2031 में लागू करवा दी गई है। तीन महायोजना के लागू होने के बाद जिला पंचायत के दखल देने की वजह से एडिए इन गांव में बहुत से काम नहीं कर पाया था परंतु अब यह दिक्कत दूर हो चुकी है।
अपूर्व दुबे (जड़िए उपाध्यक्ष) ने कहा है कि प्रथम बार महा योजना में 407 गांव को शामिल किया गया है और इससे यहाँ के लोगों को विकास का लाभ मिलेगा। अब यहाँ के निवासियों को भू-उपयोग के अनुसार ही भवनों का मानचित्र मंजूर कराना होगा। आगे उन्होंने बताया कि रामघाट रोड पर अभी तक एक पट्टी व्यवसायिक और दूसरी आवासीय थी, जो एडीए कार्यालय और ओएलएफ की ओर थी।
इस कारण से विरुद्ध भू-उपयोग के लिए एडीए से मानचित्र स्वीकृत कराना मुश्किल था। पहले अवैध निर्माण की वजह से यह समस्या उत्पन्न हुई थी। नई महायोजना में मिश्रित भू-उपयोग होने से पुराने निर्माण के नक्शे भी मंजूर हो जाएंगे। बाजार स्ट्रीट योजना के लिए ज्यादातर 24 मीटर चौड़ा रोड आवश्यक होता है, लेकिन अलीगढ़ में 18 मीटर चौड़ा रोड को भी मंजूरी दी गई है।
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वागार्थ सांकृत्यायन
संपादक, भारतीय बस्ती
वागार्थ सांकृत्यायन एक प्रतिबद्ध और जमीनी सरोकारों से जुड़े पत्रकार हैं, जो पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। भारतीय बस्ती के संपादक के रूप में वे खबरों को सिर्फ़ घटनाओं की सूचना तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उनके सामाजिक और मानवीय पक्ष को भी उजागर करते हैं।
उन्होंने भारतीय बस्ती को एक मिशन के रूप में विकसित किया है—जिसका उद्देश्य है गांव, कस्बे और छोटे शहरों की अनसुनी आवाज़ों को मुख्यधारा की मीडिया तक पहुंचाना। उत्तर प्रदेश की राजनीति, समाज और संस्कृति पर उनकी विशेष पकड़ है, जो खबरों को गहराई और विश्वसनीयता प्रदान करती है