यूपी में किसानों के लिए बड़ी खबर, सरकार देगी आर्थिक मदद
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार वर्ष 2025 में कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने में जुटी है। योगी सरकार ने बजट में खेती.किसानों सशक्त और समृद्ध बनाने की दिशा में चल रहे प्रयासों को और गति दे दी है। किसानों और कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं में भारी-भरकम राशि का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने बजट में खेती-किसानी के लिए खोला खजाना
फसलों संग प्राकृतिक खेती को बढ़ाने के प्रयास तो होंगे ही, कौशल विकास और उत्पादन को बाजार से जोड़ने की मुहिम भी तेज होगी। फसलों का उत्पादन बढ़ाने के साथ सरकार का जोर कृषि शिक्षा और अनुसंधान पर भी रहेगा। सरकार की कोशिश एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की फसल पाने के लिए खेतों में उत्पादन बढ़ाने और किसानों को समृद्ध बनाने की है। प्रदेश को प्रमाणित बीज उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की ओर भी कदम बढ़ाया गया है। इसके लिए देश के शीर्ष आयुर्वेदिक औषधीय कंपनियां मसलन, डाबर, बैद्यनाथ, झंडू समेत कई अन्य राष्ट्रीय-बहुराष्ट्रीय आयुर्वेदिक औषधि कंपनियों के साथ समझौता करने जा रही है ताकि किसानों की खेतों से ही उनके उत्पाद देशी-विदेशी कंपनियां खरीद लें। जानकारों के अनुसार इस योजना का उद्देश्य बेहद छोटी जोत के किसानों से लेकर खेतों में काम करने वाले श्रमिकों की आय बढ़ाना है। ताकि ये भी प्रदेश की वन ट्रिलियन इकोनॉमी में हिस्सेदार बन सकें। उत्तर प्रदेश के छोटी जोत वाले छोटे किसान भी यूपी के वन ट्रिलियन डॉलर इकोनामी में हिस्सेदार बनेंगे। सरकार ने एलोवेरा, तुलसी, कालमेघ, अजवाइन, अश्वगंधा और लेमनग्रास जैसे औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रेरित कर लघु कृषकों व खेतों में काम करने वाले श्रमिकों को भी उद्यम से जोड़ने की योजना तैयार की है। इसके तहत परंपरागत फसलों की जगह छोटे किसानों से व्यावसायिक औषधीय खेती कराई जाएगी। सरकार इसमें आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग करेगी। इसके तहत किसानों को उनके उत्पाद का प्रसंस्करण करना भी सिखाया जाएगा। ताकि वे कृषक के साथ-साथ उद्यमी भी बन सकें। इसमें महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके तहत किसानों को उनके उत्पाद का प्रसंस्करण करना भी सिखाया जाएगा। ताकि वे कृषक के साथ-साथ उद्यमी भी पढ़ें सकें। इसमें महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार अधिक उपज देने वाले बीजों और कृषि बुनियादी ढांचे में भी निवेश करने जा रही है। कृषि के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है और किसानों को कार्बन क्रेडिट बाजार से कमाई करने में मदद की जाएगी। परियोजना में मूंगफली, मिर्च, मटर के क्लस्टर बनाने की कोशिश हो रही है ताकि कृषि उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा मिल सके।
खेतों में उगेगी एक ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की फसल
उत्तर प्रदेश को वृद्धि और समृद्धि के रास्ते पर बढ़ाने में कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों की अहम भूमिका है। कई वर्षों तक अनदेखी और बेरुखी झेल चुके इस क्षेत्र पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार खास जोर दे रही है ताकि प्रदेश की 68 फीसदी आबादी को रोजगार दिलाने वाले कृषि के हालात बेहतर हो सकें। किसानों का इतना बड़ा वर्ग छोटी जोत वाला है तो उनकी स्थिति सुधरने से राज्य का सकल घरेलू उत्पाद खुद ही सुधर जाएगा। प्रदेश के अत्यंत छोटी जोत वाले लघु कृषकों एवं खेतों में काम करने वाले ऐसे श्रमिक जिनके घरों के इर्द-गिर्द 10-20 मीटर खाली भूमि उपलब्ध होगी, उस पर क्यारियों में तुलसी, कालमेघ, सफेद मूसली, अश्वगंधा, एलोवेरा, अजवाइन आदि की खेती कराई जाएगी। इसके उत्पाद को बेचने में भी सरकार सहयोग करेगी। उत्तर प्रदेश का लक्ष्य अगले तीन.चार साल में कृषि निर्यात को 20.000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50.000 करोड़ रुपये करना हैए जिसके लिए उत्पादकता खाद्य प्रसंस्करण और कृषि मूल्य श्रृंखला में सुधार किया जा रहा है। निर्यात बढ़ाने के लिए प्रदेश भारतीय मसाला बोर्ड के तर्ज पर बागवानी जिंस बोर्ड बनाना चाहता है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में वहां की कृषि जलवायु क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग औषधीय पौधो की खेती कराई जाएगी। कृषि विभाग के जिला कृषि अधिकारी एवं जिला उद्यान अधिकारी समेत उप निदेशक स्तर के अधिकारियों को इस योजना से सीधे जोड़ते हुए उनकी भूमिका भी तय की गई है ताकि किसान इनसे सीधा संवाद कर सके। योजना के अनुसार सरकार की ओर से स्वस्थ बीज या पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही कृषि एवं उद्यान विशेषज्ञों के माध्यम से समय-समय पर तकनीकी सहयोग भी दिया जाएगा। रोग अथवा कीटों का प्रकोप होने पर उसका निवारण भी सरकार की ओर से कराया जाएगा। मुख्य रूप से इन औषधीय पौधों की कराई जाएगी खेती इसमें लेमनग्रास, तुलसी, कालमेघ, सफेद मूसली, अश्वगंधा, जटामासी, कुटकी, अरंडी, मुलेठी, मदार, अदरख, हल्दी, केसर, शतावरी, सर्पगंधा, स्टेविया, सदाफूली, पथरचटा, जटरोफा, पान, गिलोय आदि की खेती कराई जाएगी।
यूपी में किसानों के लिए बड़ी खबर, सरकार देगी आर्थिक मदद
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार वर्ष 2025 में कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने में जुटी है। योगी सरकार ने बजट में खेती.किसानों सशक्त और समृद्ध बनाने की दिशा में चल रहे प्रयासों को और गति दे दी है। किसानों और कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं में भारी-भरकम राशि का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने बजट में खेती-किसानी के लिए खोला खजाना
फसलों संग प्राकृतिक खेती को बढ़ाने के प्रयास तो होंगे ही, कौशल विकास और उत्पादन को बाजार से जोड़ने की मुहिम भी तेज होगी। फसलों का उत्पादन बढ़ाने के साथ सरकार का जोर कृषि शिक्षा और अनुसंधान पर भी रहेगा। सरकार की कोशिश एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की फसल पाने के लिए खेतों में उत्पादन बढ़ाने और किसानों को समृद्ध बनाने की है। प्रदेश को प्रमाणित बीज उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की ओर भी कदम बढ़ाया गया है। इसके लिए देश के शीर्ष आयुर्वेदिक औषधीय कंपनियां मसलन, डाबर, बैद्यनाथ, झंडू समेत कई अन्य राष्ट्रीय-बहुराष्ट्रीय आयुर्वेदिक औषधि कंपनियों के साथ समझौता करने जा रही है ताकि किसानों की खेतों से ही उनके उत्पाद देशी-विदेशी कंपनियां खरीद लें। जानकारों के अनुसार इस योजना का उद्देश्य बेहद छोटी जोत के किसानों से लेकर खेतों में काम करने वाले श्रमिकों की आय बढ़ाना है। ताकि ये भी प्रदेश की वन ट्रिलियन इकोनॉमी में हिस्सेदार बन सकें। उत्तर प्रदेश के छोटी जोत वाले छोटे किसान भी यूपी के वन ट्रिलियन डॉलर इकोनामी में हिस्सेदार बनेंगे। सरकार ने एलोवेरा, तुलसी, कालमेघ, अजवाइन, अश्वगंधा और लेमनग्रास जैसे औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रेरित कर लघु कृषकों व खेतों में काम करने वाले श्रमिकों को भी उद्यम से जोड़ने की योजना तैयार की है। इसके तहत परंपरागत फसलों की जगह छोटे किसानों से व्यावसायिक औषधीय खेती कराई जाएगी। सरकार इसमें आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग करेगी। इसके तहत किसानों को उनके उत्पाद का प्रसंस्करण करना भी सिखाया जाएगा। ताकि वे कृषक के साथ-साथ उद्यमी भी बन सकें। इसमें महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके तहत किसानों को उनके उत्पाद का प्रसंस्करण करना भी सिखाया जाएगा। ताकि वे कृषक के साथ-साथ उद्यमी भी पढ़ें सकें। इसमें महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार अधिक उपज देने वाले बीजों और कृषि बुनियादी ढांचे में भी निवेश करने जा रही है। कृषि के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है और किसानों को कार्बन क्रेडिट बाजार से कमाई करने में मदद की जाएगी। परियोजना में मूंगफली, मिर्च, मटर के क्लस्टर बनाने की कोशिश हो रही है ताकि कृषि उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा मिल सके।
खेतों में उगेगी एक ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की फसल
उत्तर प्रदेश को वृद्धि और समृद्धि के रास्ते पर बढ़ाने में कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों की अहम भूमिका है। कई वर्षों तक अनदेखी और बेरुखी झेल चुके इस क्षेत्र पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार खास जोर दे रही है ताकि प्रदेश की 68 फीसदी आबादी को रोजगार दिलाने वाले कृषि के हालात बेहतर हो सकें। किसानों का इतना बड़ा वर्ग छोटी जोत वाला है तो उनकी स्थिति सुधरने से राज्य का सकल घरेलू उत्पाद खुद ही सुधर जाएगा। प्रदेश के अत्यंत छोटी जोत वाले लघु कृषकों एवं खेतों में काम करने वाले ऐसे श्रमिक जिनके घरों के इर्द-गिर्द 10-20 मीटर खाली भूमि उपलब्ध होगी, उस पर क्यारियों में तुलसी, कालमेघ, सफेद मूसली, अश्वगंधा, एलोवेरा, अजवाइन आदि की खेती कराई जाएगी। इसके उत्पाद को बेचने में भी सरकार सहयोग करेगी। उत्तर प्रदेश का लक्ष्य अगले तीन.चार साल में कृषि निर्यात को 20.000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50.000 करोड़ रुपये करना हैए जिसके लिए उत्पादकता खाद्य प्रसंस्करण और कृषि मूल्य श्रृंखला में सुधार किया जा रहा है। निर्यात बढ़ाने के लिए प्रदेश भारतीय मसाला बोर्ड के तर्ज पर बागवानी जिंस बोर्ड बनाना चाहता है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में वहां की कृषि जलवायु क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग औषधीय पौधो की खेती कराई जाएगी। कृषि विभाग के जिला कृषि अधिकारी एवं जिला उद्यान अधिकारी समेत उप निदेशक स्तर के अधिकारियों को इस योजना से सीधे जोड़ते हुए उनकी भूमिका भी तय की गई है ताकि किसान इनसे सीधा संवाद कर सके। योजना के अनुसार सरकार की ओर से स्वस्थ बीज या पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही कृषि एवं उद्यान विशेषज्ञों के माध्यम से समय-समय पर तकनीकी सहयोग भी दिया जाएगा। रोग अथवा कीटों का प्रकोप होने पर उसका निवारण भी सरकार की ओर से कराया जाएगा। मुख्य रूप से इन औषधीय पौधों की कराई जाएगी खेती इसमें लेमनग्रास, तुलसी, कालमेघ, सफेद मूसली, अश्वगंधा, जटामासी, कुटकी, अरंडी, मुलेठी, मदार, अदरख, हल्दी, केसर, शतावरी, सर्पगंधा, स्टेविया, सदाफूली, पथरचटा, जटरोफा, पान, गिलोय आदि की खेती कराई जाएगी।
ताजा खबरें
About The Author
शम्भूनाथ गुप्ता पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। 'मीडिया दस्तक' और 'बस्ती चेतना' जैसे प्लेटफॉर्म पर न्यूज़ और वीडियो एडिटिंग टीम में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। न्यूज़ प्रोडक्शन और डिजिटल कंटेंट निर्माण में गहरा अनुभव रखते हैं। वर्तमान में वे 'भारतीय बस्ती' की उत्तर प्रदेश टीम में कार्यरत हैं, जहां वे राज्य से जुड़ी खबरों की गंभीर और सटीक कवरेज में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।