यूपी में इन प्रोजेक्ट के भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द होगी पूरी
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भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया माध्यम से संघ या राज्य औद्योगिकीकरण, बुनियादी सुविधाओं के विकास या निजी भूमि के शहरीकरण के लिए किसी व्यक्ति से संबंधित निजी भूमि का अधिग्रहण करते हैं, और प्रभावित भूस्वामियों को उनके पुनर्वास के लिए मुआवजा प्रदान करते हैं। जब जनता की भलाई के लिए आवश्यक हो, तो राज्य और संघ को भूमि के अधिग्रहण और प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे का भुगतान करने का अधिकार संविधान द्वारा दिया गया है।
भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजे
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान हो
यह खुशी की बात है कि नए कानून में अधिक मुआवजे की बात कही गई है। ज्यादातर मामलों में तो पहले की तुलना में चार गुना या इससे भी ज्यादा मुआवजा मिलने की उम्मीद है। हालांकि कई कारणों से सर्कल रेट बाजार की दरों से बहुत कम हैं, इसलिए संभव है कि यह बढ़ाए जाने के बावजूद मुआवजा उतना ज्यादा न हो। डीसी ने सीसीएल, पथ निर्माण विभाग, पीवीयूएनएल, सहित अन्य परियोजनाओं के अधिकारियों से किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने एफआरए, एनओसी, जमीन अधिग्रहण सहित लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन का निर्देश अधिकारियों को दिया। डीसी ने अंचल अधिकारियों से उनके उनके क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं में भूमि सहित अन्य मामलों के तहत हो कार्यों की जानकारी लेने के बाद मामलो पर कार्रवाई करते हुए ससमय उनका निष्पादन करने का निर्देश दिया। नए कानून में मुआवजा बढ़ाए जाने के अलावा पुनर्वास व पुनर्बसावट का भी प्रावधान है। नियम तय होने तक यह कहना मुश्किल है कि इसका मतलब क्या है और जिस किसान की जमीन जा रही है उसको इससे कितना फायदा मिलेगा। अभी तो यही कहा जा सकता है कि यदि नियमों में संदेह की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाती तो इसका सबसे ज्यादा स्वागत किया जाना चाहिए। हालांकि नियमों के विस्तृत विवरण में निराशा भी हाथ लग सकती है। इस संबंध में मानदंड कानून की अनुसूची 2 से 6 में दिए गए हैं। डीसी चंदन कुमार ने कहा कि सभी परियोजनाओं के पदाधिकारी अपनी समस्याओं से तत्काल अवगत कराएं। कई बार कंपनी अपने स्तर पर पहल करती है और समस्या सुलझाने के बजाय विकराल रूप ले लेती है। ऐसे में विकास कार्यों में अड़चन कभी खत्म नहीं होती। बैठक में संबंधित अधिकारी मौजूद थे।