यूपी के 58 गाँव के जमीनों के बढ़ेंगे दाम, बसेगा उद्योग

यूपी के 58 गाँव के जमीनों के बढ़ेंगे दाम, बसेगा उद्योग
यूपी के 58 गाँव के जमीनों के बढ़ेंगे दाम, बसेगा उद्योग

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में स्थित आगरा अब सिर्फ ताजमहल का शहर नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में यह आईटी, पर्यटन और आधुनिक शहरी विकास का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है. यमुना एक्सप्रेसवे के दोनों ओर एक विशाल आगरा अर्बन सेंटर विकसित किया जाएगा, जो पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है.

यह महत्वाकांक्षी योजना लगभग 14,480 हेक्टेयर भूमि में फैली होगी. इसके लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने महायोजना 2041 का ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसका प्रेजेंटेशन आगरा में स्थानीय प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के सामने किया गया.

आईटी और पर्यटन पर रहेगा फोकस

इस नए अर्बन सेंटर को विकसित करते समय यह साफ किया गया है कि यहां केवल गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को ही अनुमति दी जाएगी. विशेष रूप से आईटी सेक्टर, डेटा सेंटर, पर्यटन और लॉजिस्टिक सेवाओं को प्राथमिकता मिलेगी.

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बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि आगरा की ऐतिहासिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को पूरी तरह बाहर रखा जाएगा.

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वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ प्रेजेंटेशन

यह बैठक आगरा मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई. इसमें यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह और महायोजना तैयार करने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों ने विस्तार से योजना की जानकारी दी. अधिकारियों को बताया गया कि इस योजना का तकनीकी परीक्षण गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर से कराया गया है. वहां से मिले 105 अहम सुझावों को संशोधित ड्राफ्ट में शामिल किया गया है.

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15 लाख लोगों को मिलेगा घर और रोज़गार

इस योजना को “न्यू आगरा” के रूप में देखा जा रहा है. इसके पूरा होने पर लगभग 15 लाख लोगों की आवासीय और रोजगार की जरूरतें पूरी हो सकेंगी. लगभग 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है, जिससे पूरे आगरा मंडल की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी.

58 गांवों की ज़मीन होगी शामिल

इस परियोजना के लिए आगरा जिले के 58 गांवों की भूमि प्रस्तावित की गई है. इनमें पोड्या, रायपुर, रहनकलां, कुबेरपुर, छलेसर, चौगान, नादऊ, उजरई, रामनगर खंदौली, खेड़िया खंदौली, पर्वतपुर, हाजीपुर खेड़ा, अरेला, उस्मानपुर, गढ़ी पृथ्वी, गढ़ी बच्ची, चावली, चिरहौली, पेतखेड़ा, बामन, हुसैनपुर, नगला मणि, हिंगोटखेड़िया, समोगर, बुढ़ाना, बीझामई, सरगनखेड़ा, एत्मादपुर, इकतरा सहित अन्य गांव शामिल हैं.

3 चरणों में पूरा होगा आगरा अर्बन सेंटर

यीडा के अनुसार आगरा अर्बन सेंटर को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा. 

  • लगभग 3,000 हेक्टेयर में औद्योगिक क्षेत्र
  • 1,878 हेक्टेयर में आवासीय विकास
  • एचआईजी, एमआईजी, एलआईजी और ईडब्लूएस वर्ग के लिए अलग-अलग आवास

आलू बेल्ट क्षेत्र होने के कारण फूड प्रोसेसिंग उद्योग को भी यहां बढ़ावा दिया जाएगा.

पर्यटन के लिए अलग ज़ोन होगा तैयार

पर्यटन को नई ऊंचाई देने के लिए 405 हेक्टेयर क्षेत्र में दो विशेष टूरिज्म ज़ोन बनाए जाएंगे. इनमें शामिल होंगे:-

  • फाइव स्टार होटल और लग्ज़री रिसॉर्ट
  • एग्जीबिशन और ट्रेड सेंटर
  • रिवरफ्रंट विकास
  • थीम पार्क और वेलनेस सेंटर
  • गोल्फ कोर्स और स्पोर्ट्स विलेज
  • बायोडायवर्सिटी पार्क

यह आगरा को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मज़बूती से स्थापित करेगा.

सोलर पार्क और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर

आगरा अर्बन सेंटर में 256 मेगावाट क्षमता का सोलर पार्क लगाया जाएगा. इसके साथ ही:-

  • हाईवे, एक्सप्रेसवे और मेट्रो कनेक्टिविटी
  • बेहतर रोड नेटवर्क और इंटरचेंज
  • यातायात को आसान बनाने की आधुनिक व्यवस्था

गंदे पानी के निस्तारण के लिए 7 एसटीपी बनाए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता 335 एमएलडी होगी. कुल पानी की जरूरत 375 एमएलडी होगी, जो यमुना नदी, निचली गंगा नहर और वर्षा जल से पूरी की जाएगी.

ताजमहल की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

आगरा अर्बन सेंटर ताज ट्रेपेजियम ज़ोन (TTZ) के अंतर्गत आता है. इसी कारण यहां प्रदूषणकारी उद्योगों की अनुमति नहीं दी जा सकती. ताजमहल पर किसी भी तरह के नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुश्रवण समिति इस पूरे क्षेत्र की निगरानी करती है.

आगरा अर्बन सेंटर - लैंडयूज फैक्ट फाइल

लैंडयूज — प्रतिशत (%)

  • आवासीय ~ 27.7
  • व्यावसायिक ~ 3.8
  • व्यावसायिक पर्यटन ~ 1.6
  • औद्योगिक ~ 20.11
  • मिक्स लैंड ~ 5.0
  • संस्थागत ~ 2.7
  • सर्विस ~ 1.0
  • मनोरंजन ~ 3.6
  • पीएसपी पर्यटन ~ 2.0
  • ग्रीन एरिया ~ 5.4
  • ग्रीन रिवर बफर ~ 8.2
  • कृषि ~ 1.4
  • वन क्षेत्र ~ 3.0
  • लॉजिस्टिक ~ 2.0
  • सड़क व इंफ्रास्ट्रक्चर ~ 12.6

यीडा के एसीईओ एवं जीएम प्लानिंग शैलेंद्र भाटिया ने इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय अधिकारियों से मिले सुझावों के साथ अब यह प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा जाएगा. बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद ड्राफ्ट का प्रकाशन होगा और फिर आपत्ति-सुझाव की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।