पंचायत चुनाव से पहले अधिकारियों को राहत, अब नहीं रुकेगा वेतन
जिला पंचायत अध्यक्षों की शक्तियों पर लगी सीमा
सरकार ने साफ कर दिया है कि जिला पंचायत अध्यक्षों को किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का वेतन रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. इस संबंध में पंचायती राज विभाग ने प्रदेश के सभी जिला पंचायत अध्यक्षों को पत्र भेजकर स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं. सरकार का कहना है कि नियमों के खिलाफ जाकर लिया गया कोई भी फैसला मान्य नहीं होगा.
शिकायतों के बाद हरकत में आया शासन
इस पूरे मामले की शुरुआत लखनऊ और कौशांबी से आई गंभीर शिकायतों के बाद हुई. लखनऊ में जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा कुछ कर्मचारियों का वेतन करीब 4 महीनों तक रोके जाने का मामला सामने आया था. इसी तरह की शिकायतें कौशांबी जिले से भी मिली थीं. इन मामलों को सरकार ने गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की.
यह भी पढ़ें: गोरखपुर से इस रूट के एक्स्प्रेस-वे पर काम शुरू, 100 से ज्यादें गाँव में होगा भूमि अधिग्रहणपंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि सेंट्रल ट्रांसफरेबल कैडर के अंतर्गत आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार राज्य सरकार के पास होता है. ऐसे में इन कर्मचारियों के वेतन रोकने या उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार जिला पंचायत अध्यक्षों को नहीं दिया गया है. सरकार ने इसे एक गलत और अवैध परंपरा करार दिया है.
बिना कारण वेतन रोकना अमानवीय
शासन के निर्देशों में यह भी कहा गया है कि बिना किसी ठोस कानूनी आधार के महीनों तक वेतन रोकना न सिर्फ नियमों के खिलाफ है, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी गलत है. पंचायत चुनाव से ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई कर्मचारियों के मनोबल को तोड़ सकती है, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने की आशंका रहती है.
शिकायत हो तो सीधे शासन को भेजें
सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई गंभीर आरोप या शिकायत है, तो उसे साक्ष्यों के साथ शासन को भेजा जाए. कार्रवाई का निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा. स्थानीय स्तर पर वेतन रोककर कर्मचारियों को परेशान करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
कर्मचारियों में राहत
इस फैसले के बाद प्रदेश भर के जिला पंचायत कार्यालयों में काम कर रहे हजारों कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अब तक कई बार राजनीतिक दबाव या व्यक्तिगत रंजिश के चलते वेतन रोका जाता था, लेकिन सरकार के इस कदम से ऐसी मनमानी पर रोक लगेगी.
चुनाव से पहले प्रशासनिक सर्जरी
जानकारों की मानें तो पंचायत चुनाव से पहले लिया गया यह फैसला एक बड़ी प्रशासनिक सर्जरी के रूप में देखा जा रहा है. सरकार चाहती है कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी बिना किसी दबाव के निष्पक्ष और सुचारू रूप से काम करे. आने वाले दिनों में इस फैसले का असर जमीनी स्तर पर साफ नजर आने की उम्मीद है.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।