Basti News In Hindi: बस्ती में सवालों के घेरे में है प्रशासनिक मुस्तैदी..!

Basti News: - थाना और तहसील दिवसों में वाद निपटारों की घटती संख्या ने बढ़ाई मुश्किलें - नेताओं के दरवाजों पर राजस्व, पुलिस विवादों के फरियादियों की भीड़

Basti News In Hindi: बस्ती में सवालों के घेरे में है प्रशासनिक मुस्तैदी..!
बस्ती में अतिक्रमण की फाइल फोटो

-भारतीय बस्ती संवाददाता-
बस्ती. जब तक फरियादी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचता है तब तक प्रशासन की चौखट पर दौड़ते-दौड़ते उसका दम निकल जाता है. थाना और तहसील दिवसों में आये हुए वादों की फेहरिस्त पर गौर करें तो महज  आठ से दस फीसद केसों का ही निस्तारण हो पाता है. ऐसे में  प्रशासनिक तामझाम और लम्बी-चौड़ी कवायद के बाद महज इतने नतीजे आइना दिखाने के लिए पर्याप्त है. शासन की मंशा के विपरीत थाना और तहसील दिवस महज कोरम पूरा करते देखे जा रहे है. 

अधिकारियों के चौखट पर माथा पटकते फरियादी निराश होकर नेताओं के दरवाजों पर जाते है. जहां महज नेताओं के फोन काल पर वही अधिकारी उन फरियादियों का काम कर देता है. मजे की बात सबसे ज्यादा मामले राजस्व से जुड़े जमीनी विवादों और पुलिस महकमें से सम्बन्धित होते है. फरियादियों की मानें तो जिम्मेदार उन्हें दौड़ाकर इतना परेशान कर देते है की उनके पास इन मुसीबतों से बचने का कोई उपाय नहीं होता. थकहार कर उन्हें नेताओं की शरण में जाना पड़ता है. ऐसे में प्रशासनिक कार्यप्रणाली का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. 

अभी हाल ही में गौर ब्लाक के हरदी गांव की एक महिला द्वारा जमीनी विवाद में सालों से परेशान होकर आत्मदाह की चेतावनी दिये जाने के बाद जागे प्रशासन ने महज दो दिनों में ही रिपोर्ट लगा दिया. ऐसे तमाम फरियादी अधिकारियों के चक्कर लगाते हुए न्याय के अभाव में परेशान हो अपने घर चले जाते है. 

प्रशासन ने जमीनी विवादों के निस्तारण के लिए एसआटी का गठन कर दिया है. मगर उस टीम में जो लोग हैं उनके कार्यों पर हमेशा उंगली उठती रही है. लेखपाल से लेकर कानूनगो और तहसीलों में जेब भरने के लिए असरदारों के दबाव में गरीबों को दौड़ाया जाता है. ऐसे वाकये किसी से छिपे नहीं है. इसके बावजूद इन जैसे लोगों पर कार्रवाई न होने से ऐसे लोगों के हौंसले और बुलंद हो जाते है.  एक ही जगह पर सालों से जमें कुछ लेखपाल तो बाकायदा प्रापर्टी का बिजनेस तक करने लगे है. भूमाफियाओं से सांठगांठ कर सरकारी जमीनों को ऊंचे दामों में बेचकर मोटी कमाई की जा रही है. 

जमीनी विवादों के निपटारे में देरी से अब तक फाजदारी के मुकदमों की बाढ़ आ चुकी है. जमीनी रंजीशों में तमाम लोग अपनी जान तक गंवा चुके है. इसके बावजूद  जिम्मेदारों की इन मामलों को निपटाने में बेरूखी पीड़ितो के लिए घातक साबित हो रही है. नवागत जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने पदभार संभालते ही सबसे पहले जमीनों से जुड़े मामलों और भूमाफियाओं के खिलाफ कड़ा संदेश देने की कोशिश की है. मगर उनके रास्ते मे तमाम कांटे बिछे है. उनके ही अधिनस्थ भूमाफियाओं से सांठगांठ कर मोटी कमाई कर रहे है. ऐसे में अवैध कब्जेदारों से लेकर भूमाफियाओं तक पर कार्रवाई करना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित होगी. 

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अनूप मिश्रा, भारतीय बस्ती के पत्रकार है. बस्ती निवासी अनूप पत्रकारिता में परास्नातक हैं और अपनी शुरुआती शिक्षा दीक्षा गवर्नमेंट इंटर कॉलेज से पूरी की है.

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