यूपी में गर्मी के महीनों में 700 गाँव में नहीं होगी वोल्टेज की दिक्कत, बढ़ेगी क्षमता

यूपी में गर्मी के महीनों में 700 गाँव में नहीं होगी वोल्टेज की दिक्कत, बढ़ेगी क्षमता
यूपी में गर्मी के महीनों में 700 गाँव में नहीं होगी वोल्टेज की दिक्कत, बढ़ेगी क्षमता

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में स्थित आंबेडकरनगर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ती बिजली खपत और पुराने ट्रांसफार्मरों पर बढ़ते दबाव को ध्यान में रखते हुए बिजली विभाग ने बड़ा कदम उठाया है. लंबे समय से ओवरलोड की समस्या झेल रहे 16 केवीए के करीब 700 ट्रांसफार्मरों की क्षमता अब बढ़ाई जाएगी. इस परिवर्तन से लगभग 20 हजार उपभोक्ता संघों और करीब 1 लाख ग्रामीण आबादी को लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग जैसी परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है.

ग्रामीण क्षेत्रों में बदलेगा बिजली का ढांचा

बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अकबरपुर, जलालपुर, टांडा और आलापुर डिवीजन के अंतर्गत आने वाले 300 से अधिक गांवों में पुराने 16 केवीए ट्रांसफार्मरों की जगह 25 केवीए के नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे. विभाग का मानना है कि इससे गांवों में बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और भरोसेमंद होगी. इस पूरी परियोजना पर लगभग 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

बिजनेस प्लान 2025-26 के तहत होगा काम

यह काम बिजनेस प्लान 2025-26 योजना के अंतर्गत कराया जाएगा. अधिकारियों को बजट स्वीकृत हो चुका है और जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. लाइनमैन और अवर अभियंता गांव-गांव जाकर ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की पहचान कर रहे हैं जिससे प्राथमिकता के आधार पर उन्हें बदला जा सके. टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही मार्च से ट्रांसफार्मर बदलने का अभियान शुरू करने की तैयारी है.

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जिले में बिजली आपूर्ति का बड़ा नेटवर्क

जिला मुख्यालय अकबरपुर सहित चारों डिवीजन में कुल 41 विद्युत उपकेंद्र संचालित हैं. इनके जरिए 113 ग्रामीण और 33 शहरी फीडरों से लगभग चार लाख 30 हजार उपभोक्ताओं तथा करीब 25 लाख आबादी तक बिजली पहुंचाई जा रही है. बेहतर आपूर्ति के लिए जिले में 30 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं, लेकिन इनमें से आधे से अधिक पर क्षमता से ज्यादा लोड पड़ रहा है, जिससे समस्या बढ़ रही है.

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पहले भी बढ़ाई गई थी क्षमता

पिछले वर्ष विभाग ने 100 केवीए से 400 केवीए तक के करीब 250 ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई थी. हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में लगे छोटे 16 केवीए ट्रांसफार्मरों पर उस समय पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया. यही वजह रही कि कई गांवों में कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर बार-बार फुंकते रहे.

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बार-बार खराबी से बढ़ी परेशानी

ओवरलोड के कारण खराब हुए कई ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कर उन्हें दोबारा लगा तो दिया गया, लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं हुई. लगातार ट्रांसफार्मर फुंकने से ग्रामीण उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली कटौती झेलनी पड़ती थी. इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अब व्यापक स्तर पर क्षमता वृद्धि की योजना बनाई गई है.

इन क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ

किशुनी पट्टी, सिवरानानाली, मालिकपुर दियरा, वहलोलपुर, लोरपुर, मरैला जेल के पीछे, अल्लीपुर कोडरा, उसरपुर, स्तनपुर, ताराकला, सझवा, रायगंज, भीटी, कटेहरी, महरूआ बाजार, रामनगर बसखारी, जाफरगंज, चंदनपुर और तारा खुर्द समेत कई गांवों में ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जाएगी. इन इलाकों में लंबे समय से लो-वोल्टेज और बार-बार बिजली गुल होने की शिकायतें मिल रही थीं.

क्या बोले अधिकारी

अधीक्षण अभियंता रजनीश श्रीवास्तव ने इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगे 16 केवीए के 700 ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है. टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ट्रांसफार्मर बदलने का काम शुरू कर दिया जाएगा. वर्तमान में ओवरलोड ट्रांसफार्मरों को चिन्हित करने का अभियान तेजी से चल रहा है. मार्च से शुरू हो सकता है ट्रांसफार्मर बदलने का काम. यह पहल पूरी होने पर ग्रामीण बिजली व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है और उपभोक्ताओं को बार-बार की कटौती से काफी हद तक छुटकारा मिलने की उम्मीद है.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।