यूपी के आउटसोर्सिंग कर्मियों को राहत मिलेगी या बढ़ेगी चिंता?
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विधायक ने कहा कि सरकार संविदा कर्मचारियों का सेवा विस्तार तो करती है, लेकिन उनके मानदेय में बढ़ोतरी को लेकर कोई स्पष्ट नीति नजर नहीं आती. उन्होंने चिकित्सकों, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वॉय और आशा बहुओं का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि क्या सरकार मानदेय बढ़ाने पर भी विचार कर रही है.
आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर चिंता जताते हुए विधायक ने कहा कि हर साल नई सेवा प्रदाता कंपनियों को ठेका दिए जाने से कर्मचारियों में असुरक्षा बनी रहती है. इससे कार्य की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है और कर्मचारियों को भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है.
उदाहरण के तौर पर आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज का मामला उठाया गया, जहां पिछले वर्षों से काम कर रहे 110 कर्मचारियों की छंटनी का मुद्दा सदन में रखा गया. विधायक ने बताया कि ये कर्मचारी लंबे समय से रोजगार की मांग कर रहे हैं और उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है.
जवाब में स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि सरकार आउटसोर्सिंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए एक कॉरपोरेशन बनाने की प्रक्रिया में है. उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निजी एजेंसियों की जगह भूतपूर्व सैनिक निगम को जिम्मेदारी दी जा रही है.
मंत्री ने यह भी कहा कि जिन कर्मचारियों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं, उन्हें समायोजित करने के प्रयास किए जा रहे हैं.
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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है