यूपी में जल्द मिल जाएगी घरौनी, 90,573 गाँव है शामिल
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योजनाओं का समयबद्ध कार्यान्वयन
जिसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में भूमि और संपत्ति के मालिकाना हक को डिजिटल रूप में रिकॉर्ड करना है. इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्ति के बारे में आधिकारिक दस्तावेज़ ;जैसे कि नक्शा और खतौनी प्रदान किए जाते हैं. जिससे उन्हें कानूनी सुरक्षा मिलती है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोगों को संपत्ति के कानूनी अधिकार प्रदान करना है. ताकि वे बैंक से लोन ले सकें और अन्य सरकारी लाभों का फायदा उठा सकें. केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 90,573 गांवों को चिह्नित किया गया है. प्रदेश में बाराबंकी से 24 अप्रैल 2020 को योजना पर काम शुरू किया गया था. इसके बाद पूर्वांचल के 37 जिलों में घरौनी तैयार करने का कार्य शुरू किया गया था. भारतीय सर्वेक्षण विभाग देहरादून की मदद से घरौनी तैयार करने के लिए चिह्नित गांवों का सर्वेक्षण कराया जा रहा है.
स्वामित्व योजना में यूपी पहले स्थान पर
उत्तर प्रदेश ने स्वामित्व योजना में पहले स्थान पर आते हुए एक बड़ी सफलता प्राप्त की है. राज्य ने अब तक देशभर में सबसे ज्यादा गांवों में संपत्ति रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया पूरी की है. जिससे लाखों ग्रामीणों को अपने संपत्ति के अधिकारों की पुष्टि मिल गई है. यूपी सरकार ने इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया. जिसके परिणामस्वरूप राज्य में संपत्ति दस्तावेज़ीकरण के काम में तेजी आई है. जिन गांवों में घरौनी तैैयार करने का कार्य पूरा हो रहा है उन गांवों के नागरिकों के मोबाइल पर इसकी सूचना देने के साथ एक लिंक दिया जा रहा है.
लिंक पर क्लिक करके निशुल्क घरौनी डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है. इसके अलावा नागरिक संबंधित विभाग के कार्यालयों से भी घरौनी प्राप्त कर सकते हैं. इसी वर्ष दिसंबर तक प्रदेश के सभी गांवों में घरौनी वितरण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा. राजस्व विभाग ने संबंधित अधिकारियों को घरौनी वितरण के कार्य में और तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. प्रदेश के 76,884 गांवों में घरौनी तैयार करने का काम पूरा किया जा चुका है. इन गांवों में 1,02,85,350 घरौनियां तैयार की जा चुकी हैं, जबकि 1,01,31,332 घरौनियां वितरित की जा चुुकी हैं. राज्य सरकार ने स्वामित्व योजना को लागू करने के लिए समयबद्ध तरीके से काम किया. इस कार्य में तेजी लाने के लिए डिजिटलीकरण, हवाई सर्वेक्षण और भूमि मापने के नए तरीकों का इस्तेमाल किया गया.