पर्यटन से व्यापार तक बढ़ेगा विकास, यूपी का यह रूट होगा सिक्स लेन, 27 हजार करोड़ की मंजूरी मिली
कनेक्टिविटी मजबूत होने से बढ़ेंगे अवसर
इस हाईवे परियोजना के पूरा होने से उत्तर प्रदेश में स्थित बाराबंकी, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर और श्रावस्ती जिलों की आपसी कनेक्टिविटी बेहतर होगी. साथ ही अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थ श्रावस्ती और पड़ोसी देश नेपाल तक पहुंच और आसान हो जाएगी. इससे न सिर्फ यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि स्थानीय कारोबार और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
जंगल और पर्यटन स्थलों तक आसान पहुंच
नई सड़क परियोजना का असर तराई क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी दिखेगा. कतर्नियाघाट, दुधवा नेशनल पार्क और सोहेलवा वन्य क्षेत्र जैसे फॉरेस्ट टूरिज्म डेस्टिनेशन तक पहुंच अब पहले से ज्यादा सुरक्षित और सुगम हो सकेगी. इससे पर्यटन उद्योग को सीधा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है.
पहले से ज्यादा बढ़ चुका है ट्रैफिक दबाव
उत्तर प्रदेश में स्थित बाराबंकी से बहराइच होते हुए रुपईडीहा (नेपाल सीमा) तक जाने वाला यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय आवागमन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. इस सड़क से प्रतिदिन औसतन करीब 20 हजार वाहन गुजरते हैं. मौजूदा सड़क क्षमता कम होने के कारण दुर्घटनाओं और जाम की समस्या बनी रहती है. नए हाईवे के बनने से ट्रैफिक का दबाव संतुलित होगा और हादसों में कमी आने की उम्मीद है.
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नेपाल मार्ग पर स्थित सरयू नदी का संजय सेतु काफी पुराना और जर्जर हो चुका है. पुल के जोड़ वाले हिस्सों में दरारें बढ़ने से भारी वाहनों का दबाव जोखिम भरा हो गया है. इस समस्या को ध्यान में रखते हुए नई परियोजना में सरयू नदी पर एक नया पुल बनाए जाने का प्रस्ताव शामिल किया गया है. इसके अलावा कल्याणी और शारदा सहायक नहरों पर भी पुल बनाए जाएंगे. कुल मिलाकर इस मार्ग पर 8 नए सेतुओं का निर्माण प्रस्तावित है.
यह भी पढ़ें: बस्ती फोरलेन अटका: अमहट से प्लास्टिक कॉम्प्लेक्स तक सड़क प्रस्ताव लंबित, भदेश्वर नाथ मंदिर को भी मिलेगा लाभ4 चरणों में हो चुका है सर्वे
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से इस परियोजना के लिए चार चरणों में सर्वे कराया जा चुका है. सड़क के दोनों ओर 6 लेन के हिसाब से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. इससे भविष्य में विस्तार की जरूरत नहीं पड़ेगी.
पहले भी हुआ था निर्माण, अब मिलेगा नया रूप
यह ध्यान देने योग्य है कि वर्ष 2014 से पहले इस 153 किलोमीटर लंबे मार्ग का निर्माण करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था. लेकिन बढ़ते ट्रैफिक और अंतरराष्ट्रीय आवागमन को देखते हुए अब इसे पूरी तरह नए स्वरूप में विकसित करने का फैसला लिया गया है.
NHAI के चीफ इंजीनियर अनंत मौर्य ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने बाराबंकी से बहराइच और आगे नेपाल सीमा तक जाने वाले करीब 153 किलोमीटर लंबे मार्ग को 6 लेन हाईवे में बदलने के लिए 27,927 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. परियोजना के पूरा होने से तराई क्षेत्र का सफर तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगा, वहीं सीमावर्ती इलाकों में विकास की रफ्तार भी तेज होगी.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।