एक्सप्रेसवे सर्वे पूरा: यूपी के इस जिले में जमीन के दाम बढ़े

एक्सप्रेसवे सर्वे पूरा: यूपी के इस जिले में जमीन के दाम बढ़े
एक्सप्रेसवे सर्वे पूरा: यूपी के इस जिले में जमीन के दाम बढ़े

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में स्थित पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित निर्माण को लेकर बिजनौर जिले में जमीन से जुड़े मामलों में वर्तमान स्थिति साफ नहीं हो पाई है. एक्सप्रेसवे के लिए चिन्हित किए गए गांवों में बैनामों पर रोक लगाने की प्रक्रिया अभी टाल दी गई है. जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से दोबारा पत्राचार करते हुए अब गांवों की पूरी गाटा संख्या उपलब्ध कराने को कहा है.

बिना गाटा संख्या रोक लगाने से नुकसान की आशंका

प्रशासन का मानना है कि अगर गाटा संख्या के बिना ही बैनामों पर रोक लगा दी जाती है, तो इससे स्टांप और रजिस्ट्री से मिलने वाले राजस्व को भारी नुकसान हो सकता है. इसी वजह से फिलहाल कोई सख्त फैसला नहीं लिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि किन-किन गाटों पर प्रतिबंध लागू होगा.

747 किलोमीटर लंबा होगा प्रस्तावित एक्सप्रेसवे

गोरखपुर-शामली-पानीपत एक्सप्रेसवे के लिए सर्वे का काम पूरा हो चुका है. प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 747.424 किलोमीटर बताई जा रही है. इसमें बिजनौर जिले से लगभग 56 किलोमीटर लंबा हिस्सा गुजरने की संभावना है. एनएचएआई द्वारा बालावाली क्षेत्र के पास से गुजरने वाले दो अलग-अलग एलाइनमेंट भी तैयार किए गए हैं.

बस्ती में 7 नए ओवरब्रिज की सौगात, जाम और दुर्घटनाओं से मिलेगी राहत यह भी पढ़ें: बस्ती में 7 नए ओवरब्रिज की सौगात, जाम और दुर्घटनाओं से मिलेगी राहत

एक्सप्रेसवे दो अलग एलाइनमेंट से गुजरेगा

पहले एलाइनमेंट में लगभग 116 गांव शामिल किए गए हैं, जबकि दूसरे एलाइनमेंट में लगभग 131 गांवों को चिन्हित किया गया है. इन्हीं गांवों को लेकर बैनामों पर रोक लगाने की तैयारी थी. इसी सिलसिले में 3 दिन पहले जिलाधिकारी ने एनएचएआई के पत्र का हवाला देते हुए बिजनौर, नगीना, नजीबाबाद और धामपुर के सब-रजिस्ट्रार को पत्र भेजा था.

यूपी के इस जिले के हजारों लोगों को राहत, 16 कॉलोनियों का हैंडओवर अंतिम चरण में यह भी पढ़ें: यूपी के इस जिले के हजारों लोगों को राहत, 16 कॉलोनियों का हैंडओवर अंतिम चरण में

एआईजी स्टांप ने जताई आपत्ति

इस विषय में एआईजी स्टांप ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने बताया कि एनएचएआई ने अब तक संबंधित 131 गांवों की गाटा संख्या उपलब्ध नहीं कराई है. ऐसे में अगर बिना ठोस जानकारी के बैनामे रोके जाते हैं, तो सरकारी राजस्व को नुकसान होना तय है. इसी के बाद प्रशासन ने अपना फैसला बदला.

यूपी के इस जिले में 33 साल पुराना सेतु मरम्मत के लिए होगा बंद, लोगों की बढ़ेंगी मुश्किलें यह भी पढ़ें: यूपी के इस जिले में 33 साल पुराना सेतु मरम्मत के लिए होगा बंद, लोगों की बढ़ेंगी मुश्किलें

एनएचएआई से फिर मांगी गई पूरी जानकारी

इन सभी पहलुओं को देखते हुए जिलाधिकारी ने शुक्रवार को एनएचएआई को एक और पत्र भेजा है. इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिन गांवों में एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है, उनकी पूरी गाटा संख्या उपलब्ध कराई जाए. इसके बाद ही चिन्हित क्षेत्रों में बैनामों पर रोक लगाने का निर्णय लिया जाएगा. अधिकारियों ने यह भी बताया कि इससे पहले जिले में बने अन्य हाईवे प्रोजेक्ट्स में भी इसी प्रक्रिया का पालन किया गया था.

जमीन के दाम बढ़े, बाजार में हलचल

एक्सप्रेसवे की खबर फैलते ही जिले में जमीन के दाम तेजी से बढ़ने लगे हैं. ग्रामीण इलाकों में अधिकतर किसानों ने जमीन बेचने से फिलहाल दूरी बना ली है. वहीं शहर के व्यापारी और उद्यमी लगातार इन क्षेत्रों में जमीन खरीदने की तलाश में घूम रहे हैं. इससे जमीन बाजार में अस्थिरता की स्थिति बन गई है.

वर्तमान में बैनामों पर कोई रोक नहीं

बिजनौर के एआईजी स्टांप आशुतोष जोशी ने साफ किया है कि "अभी बैनामों पर कोई रोक लागू नहीं की गई है. गाटा संख्या उपलब्ध न होने के कारण यह फैसला लिया गया है. यदि बिना पूरी जानकारी के रजिस्ट्रियां रोकी जाती हैं, तो इससे स्टांप रेवेन्यु को नुकसान होगा. इस पूरे मामले से उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है."

On

About The Author

Shobhit Pandey Picture

शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।