यूपी के इस जिले में 33 साल पुराना सेतु मरम्मत के लिए होगा बंद, लोगों की बढ़ेंगी मुश्किलें

यूपी के इस जिले में 33 साल पुराना सेतु मरम्मत के लिए होगा बंद, लोगों की बढ़ेंगी मुश्किलें
यूपी के इस जिले में 33 साल पुराना सेतु मरम्मत के लिए होगा बंद, लोगों की बढ़ेंगी मुश्किलें

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में स्थित बाराबंकी-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर सरयू नदी के ऊपर बना संजय सेतु काफी पुराना हो चुका है. करीब 33 वर्ष पुराने इस पुल में बीते कुछ महीनों से तकनीकी खामियां सामने आ रही हैं. पुल के ज्वाइंटर खुलने, बेयरिंग खिसकने और संरचना कमजोर होने जैसी शिकायतों के बाद अब इसकी व्यापक मरम्मत की तैयारी शुरू हो गई है.

दो महीने तक पूरी तरह बंद रह सकता है पुल

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की योजना के अनुसार, 10 फरवरी से संजय सेतु को लगभग 2 महीने के लिए पूरी तरह बंद किया जा सकता है. इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. पुल बंद होने की स्थिति में बाराबंकी, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर और श्रावस्ती जैसे जिलों का सीधा आवागमन प्रभावित होगा.

लंबा डायवर्जन बन सकता है परेशानी की वजह

यदि पुल बंद किया जाता है, तो वाहनों को वैकल्पिक मार्ग के रूप में चहलारी घाट (सीतापुर) या अयोध्या होकर लखनऊ की ओर भेजे जाने की संभावना है. यह रास्ता न केवल लंबा है, बल्कि समय और ईंधन दोनों की खपत भी बढ़ाएगा. अनुमान है कि लोगों को 150 से 200 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है.

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आपात सेवाओं पर पड़ेगा सीधा असर

लंबे डायवर्जन का सबसे ज्यादा असर आपात सेवाओं पर पड़ सकता है. बीमार बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए यह सफर जोखिम भरा साबित हो सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के पुल बंद करना आमजन के लिए भारी संकट खड़ा कर देगा.

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अस्थायी पीपे के पुल की उठी मांग

पुल बंद होने की खबर के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने सरयू नदी में अस्थायी पीपे का पुल बनाए जाने की मांग तेज कर दी है. लोगों का मानना है कि इससे यातायात को आंशिक रूप से चालू रखा जा सकता है और जरूरी सेवाएं बाधित नहीं होंगी. उनका कहना है कि पूरी तरह पुल बंद करना अंतिम विकल्प होना चाहिए.

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प्रशासन ने राज्य सरकार को भेजा प्रस्ताव

एएनएच लखनऊ के सहायक अभियंता अनंत मौर्य ने बताया कि मरम्मत से पहले तकनीकी सर्वे पूरा कर लिया गया है. पुल बंद करने के लिए संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों और लोक निर्माण विभाग के मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया है. अब इस पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार के स्तर से लिया जाना है, साथ ही डायवर्जन रूट भी तय होगा.

लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरयू नदी में बालू की अधिकता के कारण पीपे का पुल बनाना तकनीकी रूप से संभव नहीं है. ऐसे में डायवर्जन ही एकमात्र विकल्प बचता है. सहायक अभियंता के अनुसार, आगे का फैसला उच्च अधिकारियों द्वारा लिया जाएगा.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।