यूपी परिवहन विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 36 पदों का बदला नाम, तीन नए परिक्षेत्र मंजूर
अब बदले नाम से पहचाने जाएंगे 36 पद
परिवहन विभाग में कुछ समय पहले सहायक संभागीय परिवहन (साधारण वेतनमान) के 36 पद बनाए गए थे. ये पद अब तक अलग-अलग शासनादेशों के माध्यम से संचालित हो रहे थे, जिससे नियुक्ति और कार्यदायित्व को लेकर कई बार व्यावहारिक दिक्कतें सामने आती थीं. गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में नियमावली संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई. इसके बाद इन सभी पदों का नया नाम सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (सड़क सुरक्षा) कर दिया गया है.
नियमावली बनने से दूर होंगी पुरानी परेशानियां
अधिकारियों के मुताबिक अब इन पदों को लेकर एक स्पष्ट नियमावली लागू हो जाएगी. इससे पदोन्नति, तैनाती और जिम्मेदारियों को लेकर भ्रम की स्थिति खत्म होगी. साथ ही सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों पर इन अधिकारियों का फोकस और मजबूत होगा.
प्रदेश में बने 3 नए परिवहन परिक्षेत्र
सरकार ने परिवहन सेवाओं के बेहतर संचालन के लिए अयोध्या, गोरखपुर और बुंदेलखंड (झांसी) में 3 नए परिवहन परिक्षेत्रों का गठन किया है. इसके लिए उत्तर प्रदेश परिवहन सेवा (सप्तम संशोधन) नियमावली, 2026 को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है.
नए पद सृजित, तैनाती भी पूरी
इन नए परिक्षेत्रों में उप परिवहन आयुक्त के तीन नए पद सृजित किए गए हैं, जिन्हें अब उप परिवहन आयुक्त परिक्षेत्र कहा जाएगा. इन पदों पर अधिकारियों की तैनाती भी कर दी गई है. इनके साथ-साथ प्रत्येक परिक्षेत्र में एक-एक प्रधान सहायक और क्लर्क का पद भी बनाया गया है.
प्रदेश में अब होंगे कुल नौ परिक्षेत्र
नए परिक्षेत्र बनने के बाद उत्तर प्रदेश में परिवहन सेवा के कुल परिक्षेत्रों की संख्या बढ़कर 9 हो जाएगी. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में सड़क सुरक्षा को लेकर व्यवस्थाएं और मजबूत होंगी.
सभी जिलों में होगी सड़क सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती
परिवहन विभाग का लक्ष्य है कि जल्द ही प्रदेश के सभी 75 जिलों में एआरटीओ सड़क सुरक्षा के पदों पर तैनाती पूरी की जाए. फिलहाल 36 जिलों में इन पदों पर अधिकारी कार्यरत हैं और शेष जिलों में प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है.
नोएडा में मेट्रोपोलिटन कार्पोरेशन पर फैसला टला
इसी बीच सरकार ने नोएडा में मेट्रोपोलिटन कार्पोरेशन के गठन को फिलहाल टाल दिया है. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मंजूरी नहीं बन सकी.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ था विचार
यह ध्यान देने योग्य है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष अनुज्ञा याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को नोएडा में मेट्रोपोलिटन कार्पोरेशन के गठन पर विचार करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद यह मामला कैबिनेट के सामने रखा गया.
औद्योगिक विकास विभाग ने बैठक में बताया कि नोएडा की स्थापना उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम के तहत की गई है. इससे औद्योगिक, आवासीय और वाणिज्यिक विकास को एक संगठित ढांचे में आगे बढ़ाने और निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी. इसी कारण मौजूदा व्यवस्था में बदलाव पर सरकार अभी सहमत नहीं हुई है.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।