Local को Vocal बनाने के लिए प्रियंका गांधी ने सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखी चिट्ठी, दिये यह सुझाव

Local को Vocal बनाने के लिए प्रियंका गांधी ने सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखी चिट्ठी, दिये यह सुझाव
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लखनऊ.  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को पत्र भेजा है. पत्र की शुरुआत में महासचिव प्रियंका गांधी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता के मृत्यु पर अपनी शोक संवेदना जताया है. उन्होंने लिखा है कि आपके पिता के निधन के बाद मैं पहली बार आपको पत्र भेज रही हूँ. ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को शान्ति दें. प्रियंका की यह चिट्ठी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद आई है जिसमें उन्होंने Local को Vocal बनाने की बात कही थी. प्रियंका ने अपनी चिट्ठी में बुनकरों, दस्तकारों के हर परिवार के लिए सहायता राशि और लघु और कुटीर उद्योगों के लिए बुनियादी और जरूरी कदम उठाये जाने की बात कही है.

महासचिव ने पत्र में लिखा है कि जैसा आप जानते हैं कोरोना महामारी से पूरा जनजीवन प्रभावित है. हर वर्ग के ऊपर भयंकर आर्थिक मार पड़ी है. किसान, गरीब और मजदूर वर्ग विकट स्थिति में पहुँच गए हैं. आर्थिक संकट ने मध्य वर्ग और सामान्य नौकरीपेशा लोगों को भी अपनी चपेट में ले लिया है. कारोबारी और व्यापारी वर्ग के ऊपर अस्तित्व बचाने का संकट खड़ा हो गया है. इन वर्गों की मदद करना अनिवार्य हो गया है. इस संदर्भ में आपको मैं कुछ सुझाव भेज रही हूँ. आशा है आपकी सरकार इन पर ध्यान देगी और जल्द ही निर्णय लेगी.

उत्तर प्रदेश की प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने पत्र में लिखा है कि शिक्षा और घर के लोन का खर्च मध्य वर्ग की आर्थिक बुनावट का एक बड़ा हिस्सा होता है. आपको ज्ञात है कि मध्य वर्ग इस आर्थिक संकट से कितना प्रभावित है. ऐसे में प्राइवेट स्कूलों की फीसमाफी की घोषणा उनके लिए एक बड़ी राहत होगी. ऐसे समय में जब एक तरफ छँटनी हो रही है और तनख़्वाहों में कटौती हो रही है मध्य वर्ग के लिए घर के लोन की EMI चुकाना एक बड़ी चुनौती बन गया है. उन्होंने पत्र में लिखा है कि मुझे लोगों से लगातार संदेश आ रहे हैं कि इस संदर्भ में सरकार को मध्य वर्ग की मदद के लिए आगे आना चाहिए. मेरा सुझाव है कि घर के लोन पर लगने वाली ब्याज दर को शून्य (0%) कर दिया जाय व EMI जमा करने की बाध्यता को अगले छः महीनों के लिए स्थगित किया जाय.

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महासचिव ने पत्र में किसानों की समस्याओं पर लिखा है कि किसानों के लिए बिजली की बढ़ी हुई दरें चिंता का विषय बनी हुई हैं. मेरा सुझाव है कि किसानों के चार महीनों के ट्यूबवेल तथा घर के बिजली बिल माफ किए जाएँ. उनके बक़ाया बिजली बिलों पर भी पेनल्टी व ब्याज माफ किए जाएँ.

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उन्होंने आगे लिखा है कि किसानों के लोन पर भी चार महीने का ब्याज माफ हो. उनके किसान क्रेडिट कार्ड तथा अन्य लोन पर कटी हुई आर-सी पर तुरंत रोक लगायी जाए और उस पर भी पेनल्टी और ब्याज माफ किया जाए.

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जगह जगह से फसलों की खरीद में आ रही समस्या पर महासचिव प्रियंका गांधी ने पत्र में मांग की है कि किसानों की सम्पूर्ण फसल ख़रीदने की गारंटी की जाए. गन्ना सहित सारे भुगतान तुरंत किए जाएँ.

आंगनबाड़ी कर्मियों के लिए मांग

राष्ट्रीय महासचिव ने पत्र में लिखा है कि शिक्षा मित्र, आशा बहनें, आंगनबाड़ी कर्मी, रोजगार सेवक/पंचायत मित्र व अन्य संविदा कर्मी जो कोरोना संकट में हर स्तर पर अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं और स्थानीय प्रशासन के साथ सरकार के निर्देशों का पालन करवाने में जी-जान से लगे हैं. इनकी सेवाओं को देखते हुए यह उचित समय है कि इन्हें प्रोत्साहित करने के लिए एक प्रोत्साहन राशि दी जाए और एक महीने की सैलरी बोनस के रूप में दी जाए जिससे वो अपने को सुरक्षित महसूस कर सकें तथा और अधिक मेहनत व लगन से काम करें.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा छोटे उद्योगों, दस्तकारी, बुनकरी और कुटीर उद्योगों से जुड़ा हुआ है. लॉक डाउन में उनका पूरा कारोबार ध्वस्त हो गया है.

प्रियंका गांधी ने पत्र में लिखा है कि छोटे और मंझोले उद्योग उप्र की आर्थिक रीढ़ हैं. लाखों परिवारों की रोजी-रोटी इनसे जुड़ी हुई है. आज ये भयंकर दबाव में हैं. माँग और आपूर्ति पूरी तरह से ठप्प है. इन उद्योगों के मालिक और मजदूर पूरी तरह से टूटने के कगार पर आ चुके हैं.

पत्र में महासचिव ने मुख्यमंत्री से गुजारिश की है कि छोटे मंझोलों उद्योगों का बैंक लोन माफ किया जाए. लोन माफी के फ़ैसले से ये दिवालिया होने से बच जाएँगे. इनके बिजली के बकाया बिलों पर भी उदारतापूर्वक विचार कर उन्हें राहत देने की घोषणा की जाए.

बुनकर भाइयों के सवालों प्रियंका गांधी ने पत्र में लिखा है कि पूरे प्रदेश में एक बड़ी आबादी बुनकरी से जुड़ी हुई है. इस महामारी में उनका पूरा कारोबार चौपट हो गया है. हैंडलूम और इनके कारखाने बंद पड़े हैं. न ही उत्पादन हो रहा है और न कोई बिक्री. इनके ऊपर बैंकों का भारी कर्ज़ है.बिजली का बिल भुगतान करने की स्थिति नहीं है. बुनकरों को तत्काल राहत पहुंचाने की जरूरत है. बुनकरों के बिजली के बिल माफ किया जाएँ और प्रत्येक बुनकर परिवार को प्रतिमाह 12 हजार रुपया क्षतिपूर्ति राशि दिया जाए.

बुनकरों के लिए की यह मांग

उन्होंने आगे पत्र में लिखा है कि प्रदेश के कालीन उद्योग पर भयानक मार पड़ी है. लाखों परिवारों की आजीविका इस उद्योग से जुड़ी है. कालीन की बिक्री बिल्कुल बन्द है. बुनाई-कटाई भी ठप्प है. कालीन कारोबारियों और कारीगरों को आर्थिक मदद की सख्त जरूरत है. इनके बैंक कर्ज माफ किये जायें.

प्रियंका गांधी ने पत्र में लिखा है कि लखनऊ चिकन उद्योग ने देश-विदेश में यूपी का नाम रोशन किया है. नोटबंदी और जीएसटी की मार झेल रहे चिकन उद्योग को इस तालाबंदी के चलते भारी चोट लगी है. उन्होंने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया है कि चिकन उद्योग में लगे हर परिवार को न्यूनतम 12 हज़ार रुपया प्रतिमाह दिया ताकि वे जीवन-यापन कर सकें.

प्रदेश का हेचरी उद्योग संकट से गुजर रहा है. अंडे और मुर्गे की सफ्लाई बन्द है. प्रदेश में ज्यादातर पोल्ट्री फार्म कर्ज लेकर लोगों ने खोले थे. अब उनपर दोहरी मार पड़ी है. एक तरफ पूरा बिजनेस चौपट हो गया दूसरे तरफ बैंकों का कर्ज का बोझ. महासचिव ने सुझाव दिया है कि प्रत्येक पोल्ट्री कारोबारियों को प्रति मुर्गी 100 रुपया का आर्थिक सहयोग किया जाए.

उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश का काँच उद्योग, पीतल उद्योग, फ़र्नीचर उद्योग, चमड़े का उद्योग, होजरी उद्योग, डेयरी, मिट्टी बर्तन उद्योग, फिशरी, अन्य घरेलू और लघु उद्योग सभी को तेज झटका लगा है. इनकी समीक्षा होनी चाहिए ताकि इन्हें फिर से शुरू करने में आर्थिक मदद की जा सके. उन्होंने सुझाव दिया है कि इनके बैंक कर्ज माफ किया जाए.

पत्र के अंत में महासचिव प्रियंका गांधी ने लिखा है कि लघु और कुटीर उद्योगों के लिए बुनियादी और जरूरी कदम उठाएँ. लॉकडाउन की मार झेल रहे इन उद्योगों के पास अब इतनी आर्थिक क्षमता नहीं है कि वो लम्बे समय तक खड़े रह पाएँ. छोटे व्यापारियों की मदद करना हर नज़रिए से बहुत आवश्यक हो गया है.

उन्होंने पत्र में कहा है कि यह सिर्फ उनके व्यापार व परिवार की भलाई की बात नहीं नहीं है बल्कि उप्र की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये प्रदेश के आर्थिक जीवन के मज़बूत स्तंभ हैं. ये कमज़ोर हुए, ये गिरे तो नुक़सान प्रदेश का होगा. इन्हें सम्भालने के लिए हमें और आपको आगे आना ही होगा.

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