बस्ती में किसान से 42 लाख की ठगी? 3 साल बाद भी नहीं बना पॉलीहाउस

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बस्ती में किसान से 42 लाख की ठगी? 3 साल बाद भी नहीं बना पॉलीहाउस
बस्ती में किसान से 42 लाख की ठगी? 3 साल बाद भी नहीं बना पॉलीहाउस

देशभर में किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से चलाई जा रही एकीकृत बागवानी विकास मिशन पर उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद से गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. यहां एक किसान ने आरोप लगाया है कि पॉलीहाउस स्थापना में अनुदान का झांसा देकर उससे लाखों रुपये वसूले गए, लेकिन तीन साल बाद भी परियोजना अधूरी है और जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

कप्तानगंज विकास खंड के बढ़नी गांव निवासी किसान आलोक रंजन वर्मा का कहना है कि एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत वर्ष 2023 में उन्हें 4000 वर्ग मीटर क्षेत्र में हाईटेक पॉलीहाउस स्थापित करने के लिए योजना के तहत चुना गया. परियोजना की कुल लागत लगभग 58 लाख रुपये आंकी की गई, जिसमें 50 प्रतिशत अनुदान का आश्वासन दिया गया था.

किसान के अनुसार, उद्यान विभाग की ओर से नैतिक एग्री नामक फर्म को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया. आरोप है कि फर्म ने बैंक के माध्यम से अलग-अलग किस्तों में करीब 42 लाख रुपये वसूल लिए, लेकिन आज तक पॉलीहाउस का निर्माण पूरा नहीं किया गया. अब फर्म के प्रतिनिधि संपर्क में भी नहीं हैं.

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मामले में सबसे बड़ा सवाल विभागीय जवाबदेही को लेकर उठ रहा है. किसान का आरोप है कि उसने कई बार जिला उद्यान अधिकारी और मंडलीय स्तर के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन तीन साल में भी न तो जांच पूरी हुई और न ही फर्म के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हुई. इससे विभाग और फर्म के बीच संभावित मिली भगत की आशंका जताई जा रही है.

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पॉलीहाउस में जरबेरा जैसी व्यावसायिक फसल उगाने की तैयारी में किसान पहले ही भारी निवेश कर चुका है. खेत में गोबर की खाद, लगभग 50 क्विंटल नीम खली और अन्य पोषक तत्व डाले जा चुके हैं. अब निर्माण अधूरा होने के कारण खेती शुरू नहीं हो पा रही है, जबकि खेत में अत्यधिक खरपतवार उग आने से अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है. किसान का कहना है कि जब तक फर्म द्वारा कार्य पूर्ण कर आधिकारिक रसीद नहीं दी जाती, तब तक अनुदान की राशि जारी नहीं होगी. ऐसे में उसकी पूरी पूंजी फंसी हुई है और आजीविका पर संकट गहरा गया है.

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भारतीय बस्ती
bhartiyabasti.com
27 Mar 2026 By Vikas kumar

बस्ती में किसान से 42 लाख की ठगी? 3 साल बाद भी नहीं बना पॉलीहाउस

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देशभर में किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से चलाई जा रही एकीकृत बागवानी विकास मिशन पर उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद से गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. यहां एक किसान ने आरोप लगाया है कि पॉलीहाउस स्थापना में अनुदान का झांसा देकर उससे लाखों रुपये वसूले गए, लेकिन तीन साल बाद भी परियोजना अधूरी है और जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

कप्तानगंज विकास खंड के बढ़नी गांव निवासी किसान आलोक रंजन वर्मा का कहना है कि एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत वर्ष 2023 में उन्हें 4000 वर्ग मीटर क्षेत्र में हाईटेक पॉलीहाउस स्थापित करने के लिए योजना के तहत चुना गया. परियोजना की कुल लागत लगभग 58 लाख रुपये आंकी की गई, जिसमें 50 प्रतिशत अनुदान का आश्वासन दिया गया था.

किसान के अनुसार, उद्यान विभाग की ओर से नैतिक एग्री नामक फर्म को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया. आरोप है कि फर्म ने बैंक के माध्यम से अलग-अलग किस्तों में करीब 42 लाख रुपये वसूल लिए, लेकिन आज तक पॉलीहाउस का निर्माण पूरा नहीं किया गया. अब फर्म के प्रतिनिधि संपर्क में भी नहीं हैं.

मामले में सबसे बड़ा सवाल विभागीय जवाबदेही को लेकर उठ रहा है. किसान का आरोप है कि उसने कई बार जिला उद्यान अधिकारी और मंडलीय स्तर के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन तीन साल में भी न तो जांच पूरी हुई और न ही फर्म के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हुई. इससे विभाग और फर्म के बीच संभावित मिली भगत की आशंका जताई जा रही है.

पॉलीहाउस में जरबेरा जैसी व्यावसायिक फसल उगाने की तैयारी में किसान पहले ही भारी निवेश कर चुका है. खेत में गोबर की खाद, लगभग 50 क्विंटल नीम खली और अन्य पोषक तत्व डाले जा चुके हैं. अब निर्माण अधूरा होने के कारण खेती शुरू नहीं हो पा रही है, जबकि खेत में अत्यधिक खरपतवार उग आने से अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है. किसान का कहना है कि जब तक फर्म द्वारा कार्य पूर्ण कर आधिकारिक रसीद नहीं दी जाती, तब तक अनुदान की राशि जारी नहीं होगी. ऐसे में उसकी पूरी पूंजी फंसी हुई है और आजीविका पर संकट गहरा गया है.

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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है