इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, शादीशुदा पुरुष के साथ लिव-इन अपराध नहीं, पुलिस को सुरक्षा देने का आदेश

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इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, शादीशुदा पुरुष के साथ लिव-इन अपराध नहीं, पुलिस को सुरक्षा देने का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, शादीशुदा पुरुष के साथ लिव-इन अपराध नहीं, पुलिस को सुरक्षा देने का आदेश

प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसले में साफ कहा है कि अगर कोई शादीशुदा आदमी अपनी मर्जी से किसी महिला के साथ लिव-इन में रहता है, तो इसे अपराध नहीं माना जाएगा. कोर्ट ने कहा कि समाज क्या सोचता है, यह कानून से ऊपर नहीं हो सकता. सबसे जरूरी बात यह है कि दोनों बालिग हों और अपनी इच्छा से साथ रह रहे हों, तो ऐसे रिश्ते को गलत नहीं कहा जा सकता.

यह मामला एक ऐसे जोड़े से जुड़ा है, जिसने अपनी जान को खतरा बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. महिला का कहना था कि उसके घर वाले इस रिश्ते से खुश नहीं हैं और उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा है. इसी वजह से दोनों ने कोर्ट से सुरक्षा की मांग की थी.

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात को ध्यान देते हुए  कहा कि हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है. अगर कोई बालिग है, तो उसे यह तय करने की पूरी आजादी है कि वह किसके साथ रहना चाहता है. कोर्ट ने पुलिस को साफ निर्देश दिए कि दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो. इसके लिए शाहजहांपुर के एसएसपी को जिम्मेदारी दी गई है. साथ ही राज्य सरकार को भी नोटिस भेजकर 8 अप्रैल तक जवाब मांगा गया है.

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bhartiyabasti.com
27 Mar 2026 By Vikas kumar

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, शादीशुदा पुरुष के साथ लिव-इन अपराध नहीं, पुलिस को सुरक्षा देने का आदेश

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प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसले में साफ कहा है कि अगर कोई शादीशुदा आदमी अपनी मर्जी से किसी महिला के साथ लिव-इन में रहता है, तो इसे अपराध नहीं माना जाएगा. कोर्ट ने कहा कि समाज क्या सोचता है, यह कानून से ऊपर नहीं हो सकता. सबसे जरूरी बात यह है कि दोनों बालिग हों और अपनी इच्छा से साथ रह रहे हों, तो ऐसे रिश्ते को गलत नहीं कहा जा सकता.

यह मामला एक ऐसे जोड़े से जुड़ा है, जिसने अपनी जान को खतरा बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. महिला का कहना था कि उसके घर वाले इस रिश्ते से खुश नहीं हैं और उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा है. इसी वजह से दोनों ने कोर्ट से सुरक्षा की मांग की थी.

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात को ध्यान देते हुए  कहा कि हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है. अगर कोई बालिग है, तो उसे यह तय करने की पूरी आजादी है कि वह किसके साथ रहना चाहता है. कोर्ट ने पुलिस को साफ निर्देश दिए कि दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो. इसके लिए शाहजहांपुर के एसएसपी को जिम्मेदारी दी गई है. साथ ही राज्य सरकार को भी नोटिस भेजकर 8 अप्रैल तक जवाब मांगा गया है.

 

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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है