UPPCL: यूपी के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, 4 महीने तक नहीं देना होगा पूरा बिल
आयोग के आदेश के मुताबिक लगभग 3.53 लाख उपभोक्ताओं से स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर जो अतिरिक्त धनराशि ली गई थी, उसे अब बिजली बिल में समायोजित किया जाएगा. यह समायोजन 1 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच जारी होने वाले बिजली बिलों में किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिल सके.
बिना अनुमति तय कर दी गई मीटर की कीमत
मामले की शुरुआत तब हुई जब बिजली निगम प्रबंधन ने आयोग की अनुमति के बिना ही स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत तय कर दी. बीते साल सितंबर में निगम ने आदेश जारी कर सिंगल फेज कनेक्शन के लिए 6016 रुपये और थ्री फेज कनेक्शन के लिए 11,341 रुपये वसूलने का निर्देश दे दिया था.
यह भी पढ़ें: LPG Crisis: अब यूपी में संकट! कई जिलों में एलपीजी की कमी का दावा, अखिलेश बोले- यही हाल रहा तो...इस फैसले का उपभोक्ता संगठनों ने विरोध किया. उनका कहना था कि बिजली उपकरणों की कीमतें तय करने का अधिकार नियामक आयोग के पास होता है, लेकिन निगम ने अपने स्तर पर दरें तय कर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया.
यह भी पढ़ें: केंद्र सरकार ने TRP की बंद, अब अखिलेश यादव ने कसा तंज, कहा- पहले दाना बंद किया, अब खाना…उपभोक्ता परिषद ने दायर की याचिका
इस मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग में अवमानना याचिका दाखिल की. परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने आरोप लगाया कि निगम ने नियमों की अनदेखी करते हुए उपभोक्ताओं से अधिक रकम वसूल ली. परिषद ने आयोग से इस आदेश पर रोक लगाने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की.
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बाद में 31 दिसंबर से लागू नई कास्ट डाटा बुक में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत काफी कम तय की गई. इसके अनुसार सिंगल फेज मीटर की कीमत 2800 रुपये और थ्री फेज मीटर की कीमत 4100 रुपये निर्धारित की गई.
इस नई दर से तुलना करने पर पता चला कि 31 दिसंबर से पहले जिन उपभोक्ताओं को नए कनेक्शन दिए गए, उनसे काफी अधिक रकम वसूल ली गई थी. सिंगल फेज मीटर पर लगभग 3216 रुपये और थ्री फेज मीटर पर करीब 7241 रुपये ज्यादा लिए गए.
आयोग ने दिया समायोजन का आदेश
उपभोक्ता परिषद की याचिका पर सुनवाई के बाद आयोग ने बिजली कंपनियों को निर्देश दिया कि तय दर से ज्यादा वसूली गई पूरी राशि उपभोक्ताओं को लौटाई जाए. आयोग ने कहा कि यह रकम 1 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच आने वाले बिजली बिलों में समायोजित की जाए, जिससे उपभोक्ताओं को सीधे राहत मिल सके.
करीब 127.85 करोड़ रुपये लौटाने होंगे
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक कुल नए कनेक्शनों में करीब 10% थ्री फेज कनेक्शन हैं. इस आधार पर अनुमान लगाया गया है कि बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं को लगभग 127.85 करोड़ रुपये वापस करने होंगे.
उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा बनाए गए नियम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए हैं. ऐसे में भविष्य में बिजली कंपनियां या अधिकारी इन नियमों का उल्लंघन न करें, इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी जरूरी है.
रिपोर्ट भी मांगी, अधिकारी को दिया सम्मन
आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बिजली निगम से समायोजन की पूरी रिपोर्ट भी मांगी है. साथ ही 11 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में निगम के निदेशक (वाणिज्य) को व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।