यूपी में ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर हाईकोर्ट सख्त, DM से मांगा जवाब
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना से जुड़े जमीन विवाद पर हाईकोर्ट की सख्ती
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जमीन की पैमाइश और चिन्हीकरण को लेकर नाराजगी जताई. अदालत ने कहा कि जब तक जमीन का सही तरीके से चिन्हीकरण नहीं हो जाता, तब तक इस पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई उचित नहीं होगी.
सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी लखनऊ को भी अदालत में पेश होकर इस मामले में जवाब देना पड़ा. कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि जमीन का स्पष्ट सीमांकन किए बिना किस आधार पर कार्रवाई की जा रही है. अदालत ने इस पर असंतोष जताते हुए प्रशासन को निर्देश दिया कि तीन दिनों के भीतर जमीन का सही चिन्हीकरण कर इसकी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए.
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के तहत शहर में सड़क और फ्लाईओवर बनाने की योजना है. इसी परियोजना के लिए संबंधित जमीन को चिन्हित किया गया था. हालांकि कॉलेज प्रशासन की ओर से आरोप लगाया गया है कि बिना तय प्रक्रिया का पालन किए उनकी जमीन लेने की कोशिश की जा रही है.
कॉलेज की ओर से अदालत में दायर याचिका में कहा गया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और न ही उचित तरीके से जमीन की पैमाइश की गई.
यह भी पढ़ें: केंद्र सरकार ने TRP की बंद, अब अखिलेश यादव ने कसा तंज, कहा- पहले दाना बंद किया, अब खाना…फिलहाल अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए 13 मार्च तक जमीन पर किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगा दी है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी, जिसमें प्रशासन द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पर आगे निर्णय लिया जाएगा.
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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है