LPG Crisis: अब यूपी में संकट! कई जिलों में एलपीजी की कमी का दावा, अखिलेश बोले- यही हाल रहा तो...
एक सप्ताह से बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रही डिलीवरी, कालाबाजारी के आरोप
लखनऊ में कई गैस एजेंसियों पर सुबह से ही भारी भीड़ देखने को मिल रही है. उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसियों में भारत गैस और इंडियन गैस के सर्वर भी बार-बार ठप हो रहे हैं, जिसकी वजह से बुकिंग और डिलीवरी की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. रोजाना एजेंसियों पर 500 से ज्यादा बुकिंग आ रही हैं, लेकिन सप्लाई उतनी नहीं मिल पा रही है.
कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि सिलेंडर की कालाबाजारी हो रही है. उनका कहना है कि जहां सामान्य कीमत पर सिलेंडर नहीं मिल रहा, वहीं कुछ लोग 1500 से 2000 रुपये तक में सिलेंडर बेचने की बात कर रहे हैं. इससे आम उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई है.
कानपुर देहात के सिकंदरपुर क्षेत्र में भी गैस सिलेंडर को लेकर हाहाकार जैसी स्थिति देखने को मिल रही है. एजेंसियों पर लोगों की लंबी लाइनें लगी हैं और कई लोग घंटों इंतजार करने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हो रहे हैं. वहीं कुछ उपभोक्ताओं को मोबाइल पर ओटीपी नहीं आने की समस्या भी झेलनी पड़ रही है, जिससे सिलेंडर लेना और मुश्किल हो गया है.
इसी मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार खुद दावा करती रही है कि उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा गैस कनेक्शन दिए गए हैं, लेकिन अब सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि लोगों तक समय पर गैस सिलेंडर कैसे पहुंचे.
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर इसी तरह गैस की कमी बनी रही तो आने वाले समय में आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अगर दो हफ्ते तक यही हाल रहा तो लोगों को फिर से पुराने तरीके से खाना बनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जैसे लकड़ी या कंडे का इस्तेमाल.
फिलहाल गैस सिलेंडर की कमी से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और उपभोक्ता जल्द से जल्द आपूर्ति व्यवस्था ठीक करने की मांग कर रहे हैं.
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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है