यूपी में मार्च महीने से शुरू होगा इस बस अड्डे का निर्माण, हजारों यात्रियों को होगी परेशानी

बसों के संचालन के लिए जमीन की तलाश की जा रही है

यूपी में मार्च महीने से शुरू होगा इस बस अड्डे का निर्माण, हजारों यात्रियों को होगी परेशानी
यूपी में मार्च महीने से शुरू होगा इस बस अड्डे का निर्माण, हजारों यात्रियों को होगी परेशानी

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में स्थित गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित कौशांबी बस अड्डे का निर्माण अगले महीने से पीपीपी मोड में शुरू होने जा रहा है. लेकिन निर्माण से पहले ही गाजियाबाद रीजन में बसों के संचालन को लेकर चिंता गहराने लगी है. अस्थायी व्यवस्था के अभाव में हजारों यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है.

सबसे ज्यादा दबाव कौशांबी और साहिबाबाद पर

गाजियाबाद रीजन में कुल 1082 बसें संचालित होती हैं. इनमें सबसे अधिक 282 बसें कौशांबी डिपो से चलती हैं. साहिबाबाद डिपो में 159 बसें हैं, जबकि लोनी में 134 और हापुड़ में 139 बसें संचालित होती हैं.
गाजियाबाद डिपो में केवल 52 बसें हैं, लेकिन यहां से भी कई रूट प्रभावित होने की आशंका है. सिकंदराबाद में 85, बुलंदशहर में 122 और खुर्जा में 111 बसें दर्ज हैं. निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इन सभी डिपो की बसों के संचालन पर असर पड़ सकता है.


गाजियाबाद रीजन में डिपो के अनुसार बसों की संख्या

कौशांबी :- 282 बसें
गाजियाबाद :- 52 बसें
साहिबाबाद :- 159 बसें
लोनी :- 134 बसें
हापुड़ :- 139 बसें
सिकंदराबाद :- 85 बसें
बुलंदशहर :- 122 बसें
खुर्जा :- 111 बसें
कुल बसें :- 1082

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20-25 हजार यात्री प्रभावित

अधिकारियों के अनुसार, यदि वैकल्पिक व्यवस्था समय रहते नहीं हुई तो प्रति दिन 20 से 25 हजार यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है. परिवहन निगम को भी राजस्व में भारी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है. कौशांबी डिपो की बसों को एआरएम कार्यालय परिसर में बनाए जा रहे अस्थायी अड्डे से चलाने की योजना है. लेकिन बाकी करीब 500 से ज्यादा बसों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है.

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आनंद विहार पर बढ़ेगा बोझ

योजना है कि अन्य डिपो की बसों को दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे से संचालित किया जाए. लेकिन वहां पहले से ही 200 से अधिक यूपी रोडवेज बसें चल रही हैं. साथ ही दिल्ली परिवहन की बसें भी वहीं से संचालित होती हैं.
ऐसी स्थिति में बसों की पार्किंग और संचालन दोनों ही चुनौती बन सकते हैं. यदि कुछ बसें आनंद विहार से चलाई भी जाती हैं तो किराया 12 से 15 रुपये तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.

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पहले से ही आधा रह गया है राजस्व

गाजियाबाद बस अड्डे का निर्माण भी पीपीपी मॉडल पर जारी है. इस कारण बसों का संचालन साहिबाबाद और मोहननगर से किया जा रहा है. नतीजतन यात्रियों की संख्या और आय, दोनों में गिरावट आई है. वर्तमान में बड़ी संख्या में बसें सौर ऊर्जा मार्ग पर खड़ी की जाती हैं, यही कारण है कि हमेशा जाम की समस्या बनी रहती है.

यूपीएसआरटीसी के सेवा प्रबंधक बिजय चौधरी ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा है कि "बसों के संचालन के लिए जमीन की तलाश की जा रही है. मुख्यालय को जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा. वहां से जो भी निर्णय होगा, उसी आधार पर आगे की व्यवस्था तय की जाएगी, जिससे यात्रियों को कम से कम दिक्कत हो.

वर्तमान में कौशांबी बस अड्डे का निर्माण विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन निर्माण अवधि के दौरान व्यवस्था संभालना परिवहन विभाग के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है.


जमीन की तलाश अब भी जारी

परिवहन निगम अब तक स्थायी वैकल्पिक जमीन तलाश नहीं कर पाया है. करीब 2 वर्ष पहले यूपीसीडा से भी कौशांबी बस अड्डे के पास जमीन मांगी गई थी, लेकिन मामला अदालत में लंबित होने के कारण भूमि आवंटन नहीं हो सका.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।