यूपी में 128 ट्रैनों में हुआ यह बड़ा बदलाव, ट्रेनों में बढ़ी सीट
डिजिटल तकनीक के माध्यम से बड़ी बचत
प्रदेश के गोरखपुर जिले में हेड आन जेनरेशन डिजिटल तकनीक से एक तरफ जहां साल में 2.81 करोड रुपए की लागत से बिजली बचाई जा रही है वहीं अब 128 ट्रेन में 3968 सीटों में बड़ा इजाफा किया गया है. अब इस दौरान डीजल खपत कम हुआ और दूसरी तरफ कार्बन उत्सर्जन में भी व्यापक कमी आ चुकी है. भारतीय रेलवे ने अब हर ट्रेनों में एलएचबी कोच लगवाने का दिशा निर्देश दे दिया है अब 128 ट्रेनों में एलएचबी कोच लगाया जा चुका है. इतना ही नहीं इसमें इंजन में हो एचओजी डिजिटल तकनीक स्थापित की गई है.
मिली जानकारी के अनुसार बताया गया है कि इसके अंतर्गत ब्रेक लगने पर पहिए में घर्षण से बिजली उत्पन्न हो रहा है रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम यह तब काम करता है. जब ट्रेन के इंजन में ब्रेक का लगाया जाता है. इंजन में लगा हुआ मोटर जनरेटर के जैसा कार्य करने लगता है अब इस नई तकनीक के नाते इस्तेमाल से पहले लगने वाले दो प्रकार के पावर कार में से एक पावर कार को हटवा दी गई है. अब इसको हटाने के बाद इस स्थान पर एलएसएलआरडी कोच स्थापित किया गया है अब जिसमें 31 यात्रियों के लिए बैठने की क्षमता उपलब्ध है अब इसके अतिरिक्त लगेज स्पेस भी बना हुआ है.
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अब प्रदेश के ट्रेन यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. एनईआर के सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया है कि ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल हेड आन जेनरेशन एचओजी का इस्तेमाल पूर्वोत्तर रेलवे के 128 ट्रेनों में अब करवाया जा रहा है अब इसके बाद वित्तीय वर्ष 2025 और 26 में मई 2025 तक 311 किलोमीटर डीजल की बचत का रिकॉर्ड बनाया गया है जिसमें रेल राजस्व के रूप में 2. 81 करोड रुपए की बचत का सूची तैयार किया गया है.
यह भी पढ़ें: केंद्र सरकार ने TRP की बंद, अब अखिलेश यादव ने कसा तंज, कहा- पहले दाना बंद किया, अब खाना…इस विभाग के एक अधिकारी ने रेलवे यात्रियों को बताया है कि एलएचबी का उपयोग इसलिए किया गया है कि इसमें एंटी टेलीस्कोपिक डिजाइन के साथ बनाया गया है जिसमें दुर्घटना के समय एक दूसरे के ऊपर यात्री नहीं चढ़ पाएंगे और यात्रा के दौरान सुरक्षा बढ़ जाएगी अब इन कोचो में बेहतर सस्पेंशन सिस्टम भी लैस करवाया गया है यात्रियों को झटका का अब काम एहसास हो पाएगा जिसमें यात्रा आरामदायक महसूस होगा. आगे उन्होंने कहा है कि एलएचबी कोच 160 किलोमीटर प्रति घंटा और उससे अधिक की गति से रफ्तार लेगा. जो अब आईसीएफ कोचो से भी अधिक है. इस कोच का निर्माण स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं जो मजबूत और जंगरोधी तरीके से निर्माण किया जाता है.
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शम्भूनाथ गुप्ता पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। 'मीडिया दस्तक' और 'बस्ती चेतना' जैसे प्लेटफॉर्म पर न्यूज़ और वीडियो एडिटिंग टीम में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। न्यूज़ प्रोडक्शन और डिजिटल कंटेंट निर्माण में गहरा अनुभव रखते हैं। वर्तमान में वे 'भारतीय बस्ती' की उत्तर प्रदेश टीम में कार्यरत हैं, जहां वे राज्य से जुड़ी खबरों की गंभीर और सटीक कवरेज में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।