UP में इन 16 चीनी मिलों पर 671 करोड़ बकाया, त्योहार से पहले किसानों की बढ़ी टेंशन

UP में इन 16 चीनी मिलों पर 671 करोड़ बकाया, त्योहार से पहले किसानों की बढ़ी टेंशन
UP में इन 16 चीनी मिलों पर 671 करोड़ बकाया, त्योहार से पहले किसानों की बढ़ी टेंशन

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में स्थित बरेली मंडल के खेतों में दिन-रात मेहनत करने वाले गन्ना किसानों के लिए इस बार होली की खुशियां अधूरी रहने की आशंका है. त्योहार नजदीक है, लेकिन किसानों की जेब अभी तक खाली है. वजह यह है कि मंडल की कई चीनी मिलों पर भारी भुगतान अटका हुआ है, जिससे ग्रामीण इलाकों में चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ रही हैं.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गन्ना भुगतान की अहम भूमिका होती है. जब समय पर पैसा मिलता है तो बाजार में रौनक रहती है, लेकिन भुगतान अटकने से किसान ही नहीं, स्थानीय व्यापार भी प्रभावित होता है. इस बार भी कुछ ऐसा ही माहौल बनता दिखाई दे रहा है.

मिलों पर भारी रकम बकाया

मौजूदा पेराई सत्र में मंडल की 16 चीनी मिलों पर कुल 671.16 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया बताया जा रहा है. सबसे ज्यादा बकाया बरखेड़ा की बजाज शुगर मिल पर है, जिस पर किसानों का 154.24 करोड़ रुपये फंसा हुआ है. इसके बाद मकसूदापुर की बजाज शुगर मिल है, जहां करीब 115 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है.

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किसानों का कहना है कि 14 दिन में भुगतान के दावे हर साल किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है. भुगतान में देरी से किसानों की आर्थिक योजना पूरी तरह बिगड़ रही है.

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लाखों किसानों पर असर

गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार मंडल में 5 लाख से अधिक किसान 16 चीनी मिलों को करीब 13 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति करते हैं. इतनी बड़ी संख्या में किसान इस भुगतान पर निर्भर हैं.

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होली नजदीक होने से किसानों की उम्मीदें और बढ़ गई थीं कि इस बार बकाया समय पर मिल जाएगा. मगर अभी तक स्थिति में खास सुधार नहीं दिख रहा है. अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ तो त्योहार पर ग्रामीण इलाकों में खर्च और खरीदारी पर असर पड़ना तय माना जा रहा है.

जिलेवार बकाया ने बढ़ाई चिंता

आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा बकाया पीलीभीत जिले के किसानों का है, जहां 285.60 करोड़ रुपये अटके हुए हैं. इसके बाद शाहजहांपुर के किसानों के 216.85 करोड़ रुपये लंबित हैं.

बरेली जिले के किसानों का 120.55 करोड़ और बदायूं के किसानों का 48.16 करोड़ रुपये अभी तक नहीं मिला है. इन आंकड़ों ने किसानों की बेचैनी और बढ़ा दी है, क्योंकि त्योहार से पहले पैसे की जरूरत सबसे ज्यादा होती है.

ब्याज को लेकर भी किसानों में नाराजगी

सूत्रों के मुताबिक जब किसान गन्ने की बुवाई करते हैं, तब सहकारी समितियों के जरिए उन्हें खाद और बीज उपलब्ध कराया जाता है. इसकी रकम गन्ना बेचते समय ब्याज सहित काट ली जाती है.

लेकिन जब मिलें भुगतान रोकती हैं तो किसानों को बकाया रकम पर ब्याज नहीं दिया जाता. अक्सर चीनी के दाम कम होने का हवाला देकर देरी को सही ठहराया जाता है. किसानों का आरोप है कि कुछ मिलें वर्षों से यही तरीका अपनाती रही हैं.

अधिकारियों की चेतावनी

उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र के मुताबिक "हाल ही में बकाया रखने वाली मिलों के अधिकारियों को बुलाकर बैठक की गई है. उनसे भुगतान का स्पष्ट कार्यक्रम मांगा गया है. यह ध्यान देने योग्य है कि अगर तय समय में भुगतान नहीं किया गया तो शासन के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी." वर्तमान में किसानों की नजर इसी पर टिकी है कि होली से पहले उनकी मेहनत की कमाई खाते में पहुंचती है या नहीं.

इन मिलों पर करोड़ों रुपये का बकाया

  • द्वारिकेश शुगर मिल, फरीदपुर - 27.96 करोड़ रुपये
  • केसर शुगर मिल, बहेड़ी - 31.68 करोड़ रुपये
  • धामपुर शुगर मिल, गीरगंज - 24.95 करोड़ रुपये
  • त्रिवटीनाथ मिल, बहादुरगंज - 1.39 करोड़ रुपये
  • सहकारी चीनी मिल, सेमीखंडा - 34.57 करोड़ रुपये
  • एलएच शुगर मिल, पीलीभीत - 55.24 करोड़ रुपये
  • बजाज शुगर मिल, बरखेड़ा - 154.24 करोड़ रुपये
  • सहकारी चीनी मिल, बीसलपुर - 23.92 करोड़ रुपये
  • सहकारी चीनी मिल, पूरनपुर - 52.20 करोड़ रुपये
  • डालमिया शुगर मिल, निगोही (शाहजहांपुर) - 23.70 करोड़ रुपये
  • बजाज शुगर मिल, मकसूदापुर (शाहजहांपुर) - 115.40 करोड़ रुपये
  • बिरला-अवध शुगर मिल, रोजा (शाहजहांपुर) - 16.76 करोड़ रुपये
  • सहकारी चीनी मिल, तिलहर (शाहजहांपुर) - 35.41 करोड़ रुपये
  • सहकारी चीनी मिल, पुवांया (शाहजहांपुर) - 25.58 करोड़ रुपये
  • यदु शुगर मिल, बिसौली (बदायूं) - 27.02 करोड़ रुपये
  • सहकारी चीनी मिल, बदायूं - 21.24 करोड़ रुपये
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।