चीन पर नकेल
दरअसल, अमेरिका इस बात को महसूस करता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र विश्व का महत्वपूर्ण व्यापारिक व सामरिक मार्ग है, जिस पर चीन का वर्चस्व कायम होना उसके लिये बड़ी मुश्किल पैदा कर सकता है। वैश्विक जगत में उभरते नए समीकरणों के मुकाबले के लिये अमेरिका अपनी सुविधा के अनुसार कूटनीतिक कदम उठा रहा है। जहां एक ओर चीन ऐतिहासिक सुरक्षा समझौते ऑक्स को गैर जिम्मेदाराना और शीत युद्ध की मानसिकता दर्शाने वाला बता रहा है, वहीं अमेरिका, ब्रिटेन व आस्ट्रेलिया इस आरोप को सिरे से खारिज कर रहे हैं। जानकार बता रहे हैं कि आस्ट्रेलिया को न्यूक्लियर पनडुब्बी की तकनीक मुहैया कराना चीन के प्रभाव कम करने का ही प्रयास है। दरअसल, इस क्षेत्र में विवाद के चलते ही पिछले पचास सालों में अमेरिका ने पहली बार किसी देश से पनडुब्बी तकनीक साझा की है। इससे पहले सिर्फ ब्रिटेन के साथ यह तकनीक साझा की गई थी। अब आस्ट्रेलिया परमाणु संचालित पनडुब्बियों का निर्माण करने में सक्षम हो पायेगा, जो परंपरागत पनडुब्बियों से ज्यादा तेज व मिसाइलों से अधिक दूरी तक मारक होंगी। साथ ही समझौते के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक तथा साइबर साझेदारी भी आस्ट्रेलिया के साथ होगी। वहीं दूसरे विश्वयुद्ध के बाद तीन देशों के बीच हुए अब तक के सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा समझौते को लेकर फ्रांस व यूरोपीय देश नाराज हैं कि समझौते से पहले उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया। दरअसल, इससे पहले फ्रांस ने आस्ट्रेलिया के साथ बारह पनडुब्बियों के लिये अपने देश का सबसे बड़े 50 बिलियन आस्ट्रेलियायी डॉलर का रक्षा सौदा किया था, जिसके रद्द होने से फ्रांस तिलमिलाया हुआ है। वह समझौते को फ्रांस की पीठ पर छुरा घोंपना बता रहा है।
ताजा खबरें
About The Author
भारतीय बस्ती, बस्ती और अयोध्या से प्रकाशित होने वाला प्रमुख समाचार पत्र है. इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग भारतीय बस्ती के संवाददाताओं द्वारा ज़मीनी स्तर पर की गई है