एक जीत का टशन, चार देशों में जश्न

अरुण नैथानी

एक जीत का टशन, चार देशों में जश्न
Opinion Bhartiya Basti 2

 

एमा राडुकानू की मोहक-हृदयस्पर्शी मुस्कान देखकर तो आप नहीं कह सकते कि यह ब्रिटिश नागरिक है, जिसने बाली उम्र में यूएस ओपन का खिताब हासिल करके अपना पहला ग्रैंड स्लैम पाया है। टेनिस की इस नई मल्लिका ने कई नये कीर्तिमान अपने नाम किये हैं। यह खिताब ब्रिटेन में चवालीस साल बाद आया है तभी ब्रिटेन की महारानी ने इस युवती को हार्दिक बधाई दी। बहरहाल, चेहरे-मोहरे से एशियायी मूल की लगने वाली एमा की कामयाबी का सबसे रोचक पहलू यह है कि उसकी जीत पर चार देशों में खेल प्रेमियों ने जश्न मनाया। सिर्फ 18 साल की एमा ने युवाओं के सपनों की उड़ान को पंख दिये हैं। बताया कि कड़े अनुशासन व मेहनत से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। कुछ लोग इसे टेनिस में नये सितारे का उदय बता रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि उसे सीधे यूएस ओपन में जगह नहीं मिली, उसकी रैंकिंग दुनिया में 150 नंबर की थी। रोचक बात यह भी है कि वह चलीफाइंग मैच खेलकर टूर्नामेंट में शामिल हुई। यह अपने आप में अद्भुत था कि कोई खिलाड़ी चलीफाइंग मैच खेलकर फिर खिताब ले जाये। वह भी बिना कोई मैच हारे।

चौंकाने वाली बात यह भी है कि एक खिलाड़ी की जीत पर चार देशों के लोग जश्न मनाएं। उसे कई भाषाओं में बधाई मिले। दरअसल, वर्तमान में एमा ब्रिटेन की नागरिक है लेकिन उनकी मां चीनी है और पिता रुमानियाई। जब उसका जन्म हुआ तो माता-पिता कनाडा में थे। कहा गया कि विजेता खिलाड़ी टोरॉन्टो, कनाडा की जन्मी है। एमा की मां चीन के शेनयांग प्रांत की हैं। पिता इयान रोमान बुखारेस्ट के हैं। एमा के जन्म के दो साल बाद ही बेटी के अच्छे भविष्य के लिये माता-पिता ब्रिटेन आ गये थे। इसके बावजूद एमा का चीन से लगाव रहा और छुट्टी नाना के घर बिताना पसंद करती है। वह चीनी भाषा बोल भी लेती है। सही मायनों में एमा विविधता से भरे ब्रिटिश समाज का प्रतिनिधि चेहरा बन गई है। यही वजह है ब्रिटेन में आप्रवासियों को खदेडऩे की वकालत करने वाले लोग भी उसे बधाई देते नजर आए हैं। महारानी से लेकर प्रधानमंत्री तक उसे उसकी अनूठी उपलब्धि पर बधाई दे रहे हैं।

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वहीं दूसरी ओर यूएस ओपन में एमा की जीत पर चीन में भी जमकर जश्न मनाया गया। जैसे ही इस 18 साल की टेनिस स्टार की खिताब जीतने की खबर आई, वह चीनी सोशल मीडिया पर छा गई। लोग उसे 'डोंगबे गर्लÓ के नाम से पुकार रहे हैं। दरअसल, उसकी मां का पैतृक निवास उत्तर-पूर्वी चीन के डोंगबे इलाके में है। चीन में उसके वे वीडियो बड़े चाव से देखे जा रहे हैं, जिसमें वह चीन की भाषा मेंडरिन में साक्षात्कार देती नजर आ रही है। चीनी उसकी भाषा व चीनी संस्कारों के प्रति सम्मान को लेकर मोहित हैं। कुछ चीनी नायकों को वह अपना आदर्श बताती है। वहीं कुछ लोग याद दिला रहे हैं कि खुश क्यों हो रहे हो, वह ब्रिटिश नागरिक है। वहीं कुछ नागरिक उसके मोहक चेहरे की तुलना एक ताइवानी पॉप स्टार से कर रहे हैं। दरअसल, एमा राडुकानू अपनी मिश्रित सांस्कृतिक विरासत के बारे में स्पष्ट राय रखती है।

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वहीं एमा यह बताना भी नहीं भूलती कि उसकी सफलता में उसके परिवार का विशिष्ट योगदान रहा है। जैसे आमतौर पर चीनी अभिभावक अपने बच्चों के खेलों में स्वर्णिम भविष्य के लिये सख्त व अनुशासित व्यवहार करते हैं, वैसा ही एमा की मां ने भी किया। एमा कहती भी है कि उनकी मां मानसिक रूप से बहुत सशक्त हैं। उनके व्यक्तित्व से मुझे प्रेरणा मिली है। उनके कठोर परिश्रम ने मुझे सीख दी। वह बताती है कि दूसरे लोगों के प्रति सम्मान व जीवन में अनुशासन मां से सीखा है। वह स्वीकारती है कि उसका बचपन कठोर अनुशासन में बीता है। यही वजह है कि यूएस ओपन के फाइनल में उन्नीस वर्षीय कनाडा की लैला फर्नाडिस को हराकर वह इतिहास रचने में कामयाब रही। वह बीते 44 सालों में कोई ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली ब्रिटिश महिला बनी है। इससे पहले रूस की मारिया शारापोवा ने 17 साल की उम्र में वर्ष 2004 में विंबलडन जीता था, उसके बाद राडुकानू ने सबसे कम उम्र में गैंड स्लैम पर अधिकार किया है।

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ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ ने राडुकानू के यूएस ओपन जीतने पर कहा कि इतनी कम उम्र में यह कामयाबी निश्चय ही कड़ी मेहनत व समर्पण का प्रतिफल है। एमा कहती भी रही है कि मेरे माता-पिता सबसे बड़े आलोचक रहे हैं। उसके पालन-पोषण में बड़ी भूमिका निभाते हुए उसके माता-पिता ने उसे बेहद अनुशासित जीवन जीने को प्रेरित किया। वह मानती है कि उनका व्यवहार बचपन में बेहद सख्त था, जिसने मुझे मानसिक रूप से मजबूती दी। जीत के बाद उनकी खुशी देखकर अच्छा लगा। मेरी जीत पर वे गर्वित थे। सख्त अनुशासित जीवन का ही परिणाम है कि दुनिया में 150वीं रैंक रखने वाली एमा ने यह कामयाबी सबसे कम रैंकिंग वाली खिलाड़ी के रूप में हासिल की। उन्होंने क्वालीफायर राउंड में तीन व फिर मुख्य ड्रा में सात मैच जीते। वह अपने खेल में ताकत व सटीकता से सेट-दर-सेट जीतती ही चली गई। वह स्वीकारती है कि मौजूदा चुनौतियों व लंबी रेस के लिये उसे शारीरिक शक्ति बढ़ाने पर खास ध्यान देना होगा।

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