कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती में प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण, वैज्ञानिकों ने बताए देसी उपाय
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एस. के. तोमर ने कहा कि प्राकृतिक खेती में जैविक उपायों, देशी संसाधनों और समन्वित तकनीकों के माध्यम से फसलों को सुरक्षित रखा जा सकता है. उन्होंने रासायनिक कीटनाशकों के सीमित और विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया तथा आच्छादन एवं जैविक खरपतवारनाशी के प्रकारों और उनके लाभों की जानकारी दी.
प्रशिक्षण के कोर्स कोऑर्डिनेटर एवं फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. प्रेम शंकर ने प्राकृतिक खेती में कीट-रोगों की पहचान, उनकी निगरानी और जैविक नियंत्रण विधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला. वहीं कृषि वानिकी वैज्ञानिक डॉ. पी. के. मिश्रा ने कृषि वानिकी आधारित प्रणालियों में फसल सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया.
इस दौरान डॉ. वी. बी. सिंह ने रोग-प्रतिरोधी किस्मों की भूमिका पर, श्री आर. वी. सिंह (कृषि विस्तार) ने तकनीक प्रसार और किसानों तक जानकारी पहुँचाने की रणनीतियों पर तथा डॉ. अंजलि वर्मा (गृह विज्ञान) ने प्राकृतिक खेती से सुरक्षित भोजन, पोषण और पारिवारिक स्वास्थ्य पर अपने विचार साझा किए.
हरिओम मिश्रा ने प्राकृतिक खेती में समन्वित फसल प्रबंधन से जुड़ी उपयोगी जानकारियाँ दीं.
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विभाग के भूमि संरक्षण से अवर अभियंता अनिल कुमार पटेल, तकनीकी सहायक, बीटीएम व एटीएम, इंडो-इजरायल प्रभारी विवेक वर्मा, पादप रोग विशेषज्ञ शोभित कुमार दीक्षित, कट विशेषज्ञ रजनीश सिंह, उद्यान विशेषज्ञ धीरेंद्र प्रताप सिंह सहित कई अधिकारियों व कर्मचारियों ने सहभागिता की.
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और प्राप्त ज्ञान को क्षेत्र में लागू करने की प्रतिबद्धता जताई. कार्यक्रम का समापन संवाद एवं अनुभव साझा सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान किया गया.
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