बस्ती में बड़ा बीमा घोटाला! जिंदा आदमी को दिखाया मृत, पत्नी के खाते में पहुंच गई लाखों की रकम
एजेंट और उपभोक्ता की मिलीभगत से हुआ फर्जी क्लेम, जांच में खुली पूरी कहानी
गांव के रहने वाले रामप्रीत ने अपनी पत्नी माया देवी के नाम पर बीमा की रकम हासिल करने के लिए खुद को मृत घोषित करवा दिया. बताया जा रहा है कि उसने अलग-अलग समय पर दो बीमा पॉलिसियों में अपनी मृत्यु दिखाकर क्लेम की प्रक्रिया पूरी कर ली. क्लेम की पूरी रकम उसकी पत्नी माया देवी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई.
इस पूरे मामले में बीमा एजेंट वेदप्रकाश की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है. जांच में सामने आया कि एजेंट और उपभोक्ता ने आपस में मिलकर योजना बनाई थी ताकि बीमा कंपनी से पैसा निकाला जा सके. दोनों ने मिलकर कागजी कार्रवाई पूरी करवाई और फर्जी तरीके से मृत्यु दिखाकर क्लेम पास करा लिया.
हालांकि तीसरी पॉलिसी के क्लेम के दौरान यह पूरा मामला उजागर हो गया. बताया जा रहा है कि जब तीसरी पॉलिसी का क्लेम करने की प्रक्रिया शुरू हुई तो बीमा कंपनी के सॉफ्टवेयर ने कई तरह की गड़बड़ियां पकड़ लीं. रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि जिस व्यक्ति को मृत दिखाया गया है, वह वास्तव में जीवित है. इसके बाद कंपनी ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी.
जांच में सामने आया कि पहले दो क्लेम फर्जी तरीके से पास करा लिए गए थे और उनकी रकम पत्नी के खाते में पहुंच चुकी थी. तीसरे क्लेम के दौरान तकनीकी जांच में पूरा खेल सामने आ गया. इसके बाद कंपनी के अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों और पॉलिसियों की जांच शुरू कर दी.
मामला सामने आने के बाद बीमा कंपनी ने इसे गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. इस मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है.
स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. लोगों का कहना है कि बीमा जैसी योजनाओं में इस तरह की धोखाधड़ी सामने आना बेहद गंभीर है. अब जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल थे और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी.
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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है