हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हटा तालाब से कब्जा, बस्ती में ग्रामीणों ने DM से लगाई गुहार
कुदरहा विकास खण्ड के ग्राम बैड़ारी मुस्तहकम में आदेश के बावजूद गाटा संख्या 494/0.298 हेक्टेयर तालाब की भूमि से अवैध कब्जा न हटाये जाने से नाराज ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को पत्र देकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि हल्का प्रभारी कानूनगो और लेखपाल लगातार कब्जा हटवाने में आना कानी करने के साथ ही कब्जा करने वालों को ही संरक्षण दे रहे हैं.
बैड़ारी मुस्तहकम निवासी दिनेश कुमार ने उच्चाधिकारियों को दिये पत्र में कहा है कि गांव के ही रामचन्द्र पुत्र रामभूरत आदि ने तालाब भूमि के एक हिस्से पर सहन एवं सहन-दरवाजे के रूप में नल लगाकर तथा अन्य संसाधनों का उपयोग कर अनधिकृत कब्जा कर लिया है. मामला पहले उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में विचाराधीन रहा, जहां से 8 मई 2024 को पारित आदेश द्वारा पूर्व के आदेश 1 अप्रैल 2021 को निरस्त कर मामले के पुनर्निस्तारण का निर्देश दिया गया था.
उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में राजस्व टीम गठित कर मौके की जांच कराई गई, जिसमें स्थलीय निरीक्षण व नक्शे से स्पष्ट हुआ कि उक्त भूमि तालाब की भूमि है तथा इस पर अनाधिकृत कब्जा किया गया है. इसके बाद तहसीलदार न्यायालय ने 28 फरवरी 2026 को आदेश पारित कर उक्त भूमि से अतिक्रमण हटाने, क्षतिपूर्ति के रूप में रामचन्दर पर 16,500 रुपये और रामलौट और छोटेलाल पर 42900, राजाराम पर 62600 रूपये की वसूली तथा वाद बेदखली की कार्यवाही पूर्ण करने का निर्देश दिया था.
यह भी पढ़ें: SP से मिला प्रतिनिधिमंडल, मंदिर परिसर विवाद और फर्जी मुकदमे के आरोप पर निष्पक्ष जांच की मांग ग्रामीणों का आरोप है कि आदेश पारित होने के बावजूद अब तक भूमि को खाली नहीं कराया जा सका है और जिम्मेदार कानूनगो व लेखपाल स्तर पर आदेश का अनुपालन नहीं हो पा रहा है. प्रार्थना पत्र में दिनेश यादव व अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से अपील की है कि 28 फरवरी 2026 के आदेश का तत्काल अनुपालन कराते हुए कब्जा खाली कराया जाए.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हटा तालाब से कब्जा, बस्ती में ग्रामीणों ने DM से लगाई गुहार
कुदरहा विकास खण्ड के ग्राम बैड़ारी मुस्तहकम में आदेश के बावजूद गाटा संख्या 494/0.298 हेक्टेयर तालाब की भूमि से अवैध कब्जा न हटाये जाने से नाराज ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को पत्र देकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि हल्का प्रभारी कानूनगो और लेखपाल लगातार कब्जा हटवाने में आना कानी करने के साथ ही कब्जा करने वालों को ही संरक्षण दे रहे हैं.
बैड़ारी मुस्तहकम निवासी दिनेश कुमार ने उच्चाधिकारियों को दिये पत्र में कहा है कि गांव के ही रामचन्द्र पुत्र रामभूरत आदि ने तालाब भूमि के एक हिस्से पर सहन एवं सहन-दरवाजे के रूप में नल लगाकर तथा अन्य संसाधनों का उपयोग कर अनधिकृत कब्जा कर लिया है. मामला पहले उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में विचाराधीन रहा, जहां से 8 मई 2024 को पारित आदेश द्वारा पूर्व के आदेश 1 अप्रैल 2021 को निरस्त कर मामले के पुनर्निस्तारण का निर्देश दिया गया था.
उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में राजस्व टीम गठित कर मौके की जांच कराई गई, जिसमें स्थलीय निरीक्षण व नक्शे से स्पष्ट हुआ कि उक्त भूमि तालाब की भूमि है तथा इस पर अनाधिकृत कब्जा किया गया है. इसके बाद तहसीलदार न्यायालय ने 28 फरवरी 2026 को आदेश पारित कर उक्त भूमि से अतिक्रमण हटाने, क्षतिपूर्ति के रूप में रामचन्दर पर 16,500 रुपये और रामलौट और छोटेलाल पर 42900, राजाराम पर 62600 रूपये की वसूली तथा वाद बेदखली की कार्यवाही पूर्ण करने का निर्देश दिया था.
ग्रामीणों का आरोप है कि आदेश पारित होने के बावजूद अब तक भूमि को खाली नहीं कराया जा सका है और जिम्मेदार कानूनगो व लेखपाल स्तर पर आदेश का अनुपालन नहीं हो पा रहा है. प्रार्थना पत्र में दिनेश यादव व अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से अपील की है कि 28 फरवरी 2026 के आदेश का तत्काल अनुपालन कराते हुए कब्जा खाली कराया जाए.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।