बस्ती में सेवानिवृत्त कर्मचारियों का विरोध, बोले- नया पेंशन कानून नहीं चलेगा
Basti News
बुधवार को संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति के मण्डल संयोजक आर.के. पाण्डेय के नेतृत्व में 16 संगठनों के पदाधिकारियों, सेवा कर्मचारियों ने काला फीता बांधकर विरोध दिवस मनाते हुये जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा. मांग किया कि पेंशनर्स के वर्गीकरण का नया कानून सरकार वापस ले. इस कानून से सेवा निवृत्त कर्मचारियों के हित प्रभावित होंगे.
संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति के सह संयोजक राम बहोर मिश्र ने कहा कि केन्द्र सरकार ने नया कानून लाकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों का वर्गीकरण कर दिया है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होने कहा कि सेवानिवृत्त शिक्षकों को कैशलेश चिकित्सा सुविधा से उत्तर प्रदेश की सरकार ने वंचित कर दिया है जबकि वृद्धावस्था मंें उन्हें इसकी सर्वाधिक आवश्यकता पड़ती है. उन्होने मांग किया कि सेवानिवृत्त शिक्षकों के हित में कैशलेश चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाय.
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष उदयशंकर शुक्ल ने कहा कि शिक्षक सेवा निवृत्त शिक्षकों के साथ है और उनकी न्यायोचित मांगों को लेकर हर स्तर पर संघर्ष किया जायेगा. धरने को आर.के. पाण्डेय, संयुक्त कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष मस्तराम वर्मा, जलालुद्दीन कुरेशी, शिवकुमार तिवारी, राम मिलन वर्मा, रक्षाराम वर्मा, रामफेर यादव, दान बहादुर दूबे, लक्ष्मी गुप्ता, हरिशर्मा द्विवेदी आदि ने सम्बोधित किया. कहा कि पेंशनर्स के वर्गीकरण का नया कानून सरकार वापस ले.
यह भी पढ़ें: नवरात्रि का बड़ा तोहफा! बस्ती के महादेव मंदिर पर खर्च होंगे 1.39 करोड़, बदलेगा पूरा परिसरधरने में मुख्य रूप से ए.एन. सिंह, डी.एन. दूबे, राम नरायन उपाध्याय, बद्री प्रसाद चौधरी, मदन मोहन चौधरी, जयऩ्त्रीधर दूबे, राम सागर चौधरी, रामपलट, राम सहाय, ब्रम्हदत्त पाण्डेय, निर्मल प्रसाद, कृपाशंकर चौधरी, देवी प्रसाद शुक्ल, परमात्मा प्रसाद ओझा, अद्या प्रसाद, ब्रम्हदत्त पाण्डेय, ओंकार सिंह, रमाकान्त पाण्डेय, धु्रवचन्द्र वर्मा, देवी प्रसाद, वी.पी. सिंह, उदयभान दूबे, राधेश्याम, दयाराम पाण्डेय, रामपलट के साथ ही बड़ी संख्या में विभिन्न संगठनों के सेवा निवृत्त कर्मचारी, पदाधिकारी शामिल रहे.
बस्ती में सेवानिवृत्त कर्मचारियों का विरोध, बोले- नया पेंशन कानून नहीं चलेगा
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बुधवार को संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति के मण्डल संयोजक आर.के. पाण्डेय के नेतृत्व में 16 संगठनों के पदाधिकारियों, सेवा कर्मचारियों ने काला फीता बांधकर विरोध दिवस मनाते हुये जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा. मांग किया कि पेंशनर्स के वर्गीकरण का नया कानून सरकार वापस ले. इस कानून से सेवा निवृत्त कर्मचारियों के हित प्रभावित होंगे.
संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति के सह संयोजक राम बहोर मिश्र ने कहा कि केन्द्र सरकार ने नया कानून लाकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों का वर्गीकरण कर दिया है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होने कहा कि सेवानिवृत्त शिक्षकों को कैशलेश चिकित्सा सुविधा से उत्तर प्रदेश की सरकार ने वंचित कर दिया है जबकि वृद्धावस्था मंें उन्हें इसकी सर्वाधिक आवश्यकता पड़ती है. उन्होने मांग किया कि सेवानिवृत्त शिक्षकों के हित में कैशलेश चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाय.
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष उदयशंकर शुक्ल ने कहा कि शिक्षक सेवा निवृत्त शिक्षकों के साथ है और उनकी न्यायोचित मांगों को लेकर हर स्तर पर संघर्ष किया जायेगा. धरने को आर.के. पाण्डेय, संयुक्त कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष मस्तराम वर्मा, जलालुद्दीन कुरेशी, शिवकुमार तिवारी, राम मिलन वर्मा, रक्षाराम वर्मा, रामफेर यादव, दान बहादुर दूबे, लक्ष्मी गुप्ता, हरिशर्मा द्विवेदी आदि ने सम्बोधित किया. कहा कि पेंशनर्स के वर्गीकरण का नया कानून सरकार वापस ले.
धरने में मुख्य रूप से ए.एन. सिंह, डी.एन. दूबे, राम नरायन उपाध्याय, बद्री प्रसाद चौधरी, मदन मोहन चौधरी, जयऩ्त्रीधर दूबे, राम सागर चौधरी, रामपलट, राम सहाय, ब्रम्हदत्त पाण्डेय, निर्मल प्रसाद, कृपाशंकर चौधरी, देवी प्रसाद शुक्ल, परमात्मा प्रसाद ओझा, अद्या प्रसाद, ब्रम्हदत्त पाण्डेय, ओंकार सिंह, रमाकान्त पाण्डेय, धु्रवचन्द्र वर्मा, देवी प्रसाद, वी.पी. सिंह, उदयभान दूबे, राधेश्याम, दयाराम पाण्डेय, रामपलट के साथ ही बड़ी संख्या में विभिन्न संगठनों के सेवा निवृत्त कर्मचारी, पदाधिकारी शामिल रहे.
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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है