प्रवासियों से हाथ छुड़ा रहे लोगों को समझाने के लिए DM बस्ती ने इस वीडियो के जरिए की खास पहल
इसी से संबंधित एक वीडियो उत्तर प्रदेश स्थित बस्ती (Basti News) के जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन (Ashoutosh Niranjan) ने फेसबुक पेज पर शेयर किया है ताकि लोगों में ऐसा कोई भ्रम है तो वह दूर हो सके साथ ही संकट के इस समय में किसी भी गलतफहमी के चलते समाज में समरसता और अपनापन भी दूर ना हो. इस वीडियो के कैप्शन में डीएम बस्ती ने लिखा है कि ‘अपनों का रखेंगे ध्यान, कोरोना से रहेंगे सावधान. शहर से आने वाले हर व्यक्ति को कोरोना हो यह जरूरी नहीं. दूसरे राज्य से आने वाले हर व्यक्ति की जांच हो रही है और उन्हें सरकार की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन करने को कहा गया है. ऐसे में किसी भी व्यक्ति के बारे में अफवाह न फैलाएं.’
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कम से कम एक मिनट के वीडियो में इस बात का संदेश देने की कोशिश की गई है कि बाहर आने वाले अपने लोगों के साथ किसी भी किस्म का कोई गलत सुलूक ना हो. इस वीडियो में हरिया और गांव के प्रधान के बीच का संवाद दिखाया गया है. हरिया ने प्रधान को फोन कर के कहा कि ‘कल रात गांव में किशन और लखन गांव से आए हैं, देखिए कहीं कोरोना ना फैला दें.’ इस पर प्रधान ने हरिया को फटकार लगाते हुए कहा कि ‘बुद्धि भ्रष्ट हो गया है तुम्हारा, जो भी बाहर से आएगा वो कोरोना थोड़े ना फैलाएगा. वो लोग अपने परिवार और गांव की भलाई के लिए घर में ही 14 दिन के लिए क्वारंटीन हैं और सरकार की ओर से उनकी हर जांच की गई है.’
इस वीडियो को पोस्ट करने के मकसद पर डीएम बस्ती ने कहा कि ‘हाल ही में मुंबई, अहमदाबाद, दिल्ली आदि जैसे कोरोना रेड ज़ोन के इलाकों से होते हुए बस्ती में लौटे प्रवासी मजदूरों से असुरक्षा की भावना के चलते गाँवों के सामाजिक ताने-बाने को बिगड़ रहे हैं. हमें लगातार यह जानकारी मिल रही थी कि गांव वालों के बीच विश्वास की भावना कम हो रही है.’
जिलाधिकारी ने बताया क्या है वीडियो का उद्देश्य
डीएम ने कहा कि इस वीडियो का उद्देश्य यह बताना है कि एक कोरोना संदिग्ध व्यक्ति समाज के लिए खतरा नहीं है यदि वह सभी कोरोना प्रोटोकॉल और सावधानियों का पालन करता है. हमें कोरोना वायरस से लड़ना है न कि एक कोरोना संक्रमित या कोरोना संदिग्ध व्यक्ति के साथ.
जिलाधिकारी बस्ती ने भारतीय बस्ती को बताया कि ‘सोशल मीडिया और स्थानीय जिम्मेदार समूहों के माध्यम से इस तरह की जागरूकता के साथ बस्ती प्रशासन इस तरह की भ्रांतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सफल रही है.’
आखिर में पत्रकार कुलदीप मिश्र की कविता के जरिए अपील भारतीय बस्ती की टीम भी कर रही है कि- ‘किसी का हाथ छूना नहीं है, लेकिन किसी का साथ छोड़ना नहीं है.’
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