प्रदेश में गेहूं की फसल के उत्पादन और उत्पादकता की स्थिति की समीक्षा करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक अहम कदम उठाया गया है, बस्ती जिलाधिकारी ने गेहूं की फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता का निरीक्षण किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसानों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े और उत्पादन में किसी भी तरह की कमी न हो.
गेहूं की उत्पादकता और उत्पादन की जांच
प्रदेश जो गेहूं का प्रमुख उत्पादक राज्य है. में इस फसल का कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है. राज्य के किसान हर साल गेहूं की बड़ी मात्रा में खेती करते हैं. जो न केवल घरेलू आवश्यकता को पूरा करता है. बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी भेजा जाता है. इस साल गेहूं की फसल की अच्छी पैदावार की उम्मीद है. लेकिन विभिन्न कारणों जैसे मौसम. कीट.पतंगों और सिंचाई की समस्याओं के कारण उत्पादन में उतार.चढ़ाव हो सकते हैं. अमूमन सभी जानते हैं कि डीएम विभिन्न विभागों के कार्यों की निगरानी करते हैं। डीएम जिला में सिर्फ इतना ही नहीं करते हैं, बल्कि उन्हें अन्य कार्य भी करने होते हैं। राज्य सरकार की ओर से डीएम को कई तरह के कार्यों की जिम्मेवारी सौंपी जाती है। बहुत ऐसे भी कार्य होते हैं, जिसे निर्धारित तिथि को पूरा करना होता है। कुछ इसी तरह के मिले दायित्व को पूरा करने के लिए बस्ती के रवीश गुप्ता गुरुवार को गेहूं के खेत में पहुंचे थे।
डीएम द्वारा निरीक्षण, गेहूं की फसल का महत्व
जिलाधिकारी ने खेतों में जाकर किसानों से सीधा संवाद किया और गेहूं की फसल की स्थिति का मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने फसलों की गुणवत्ता, उर्वरक उपयोग, सिंचाई की स्थिति, और कीटनाशक के प्रयोग की जानकारी ली. डीएम ने विशेष रूप से किसानों को यह समझाने की कोशिश की कि किस प्रकार से वे अपने खेतों में पानी की उचित प्रबंधन मिट्टी की उर्वरता और फसल सुरक्षा उपायों का पालन करें. ताकि गेहूं की उत्पादकता बढ़ सके. बस्ती में जिलाधिकारी रवीश गुप्ता ने तहसील सदर बस्ती के ग्राम पंचायत सिकरा हकीग के ग्राम करनपुर में रवी फसल गेहूं की कटाई प्रयोग का निरीक्षण किया. यह निरीक्षण गेहूं की उत्पादकता और उत्पादन की जांच करने के लिए किया गया था. जिलाधिकारी रवीश गुप्ता ने गाटा संख्या 86 श्रीमती कमलावती पत्नी सीताराम एवं गाटा संख्या 36 अब्दुल हई पुत्र वकील अहमद के खेत में 43.30 वर्ग मीटर कटाई करा कर गेहूं की उत्पादकता एवं उत्पादन की जांच की। उन्होंने पाया कि जिसमें क्रमशः 18.590 कि0ग्रा0 एवं 19.280 कि०ग्रा० वजन निकला, जिसके अनुसार प्रति हेक्टेयर उत्पादन 37.73 कु0/हे० एवं 39.13 कु0/हे० अनुमानित किया गया.