उत्तर प्रदेश में मौसम का उतार-चढ़ाव जारी, कई जिलों में गिरे ओले, तापमान में गिरावट
उत्तर प्रदेश में मौसम के बदलावों का सिलसिला लगातार जारी है। सोमवार 17 मार्च को सुबह 5:00 से 7:00 बजे के बीच अयोध्या, गोरखपुर, सुल्तानपुर, कुशीनगर, बस्ती और संत कबीरनगर जैसे क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई है। कुशीनगर में स्थिति यह है कि सड़कें पूरी तरह से सफेद चादर से ढक गईं हैं। वहीं, संत कबीरनगर में ओले मटर के दानों के आकार के हैं, जो देखने में काफी बड़े लग रहे हैं।
इसके अलावा, लखनऊ, बस्ती और गोंडा में भी सुबह के समय तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश और ओलावृष्टि हुई। यह मौसम की अनियमितताएँ किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं, क्योंकि इससे फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना बढ़ गई है। मौसम विभाग ने आगे भी इस तरह के मौसम की चेतावनी दी है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
बाराबंकी, बहराइच और आसपास के 10 शहरों में आज बादलों का घना आवरण छाया हुआ है। ठंडी हवाओं का चलना भी शुरू हो गया है, जिसके चलते तापमान में 2 से 3 डिग्री की कमी देखने को मिली है। मौसम विभाग ने इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के 10 शहरों में बारिश की चेतावनी जारी की है।
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बीएचयू के मौसम विशेषज्ञ मनोज श्रीवास्तव ने जानकारी दी है कि पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी के चलते मौसम में स्पष्ट परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले 3 दिनों तक इस प्रकार के मौसम की स्थिति बनी रहने की संभावना है।
रविवार के दिन वाराणसी ने सबसे गर्म शहर का खिताब अपने नाम किया, जहां अधिकतम तापमान 39.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं, दूसरी ओर अयोध्या ने सबसे ठंडे शहर का दर्जा प्राप्त किया, जहां न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया है।
मौसम के विशेषज्ञ मनोज श्रीवास्तव ने जानकारी दी है कि रविवार शाम को पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव समाप्त हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, आज से तेज पछुआ हवाओं का प्रवाह शुरू होगा, जिससे शाम के समय तापमान में थोड़ी कमी देखने को मिलेगी। हालांकि, बुधवार से तापमान में तेजी से वृद्धि होने की संभावना है।
मार्च के दूसरे हफ्ते में ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है, जो गर्मी की शुरुआत का संकेत है। मौसम विभाग के अनुसार, इस महीने के अंत तक तापमान 42 डिग्री तक पहुंच सकता है, जो लोगों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। मौसम के इस बदलाव के कारण स्वास्थ्य में उतार चढाव हो सकता है।
किसानों के लिए चिंता की बात
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, नवंबर से मार्च-अप्रैल के बीच होने वाली गेहूं की फसल के लिए असमय बारिश अत्यंत हानिकारक साबित हो सकती है। इस अवधि में गेहूं की बाली में दाना पड़ चुका होता है और पकने की प्रक्रिया चल रही होती है। अचानक होने वाली बारिश, ओले और तेज आंधी से गेहूं की फसल गिरने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे दाने की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की मौसमी चुनौतियों के कारण दाना मजबूत नहीं बन पाता, जिससे अंततः गेहूं की पैदावार में कमी आ सकती है। इसके अलावा, दाने का रंग काला और उसका वजन हल्का हो सकता है, जो किसानों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। इस स्थिति में किसानों को सतर्क रहने और उचित उपाय करने की आवश्यकता है ताकि फसल को बचाया जा सके और उत्पादन में सुधार किया जा सके।
उत्तर प्रदेश में मौसम का उतार-चढ़ाव जारी, कई जिलों में गिरे ओले, तापमान में गिरावट
उत्तर प्रदेश में मौसम के बदलावों का सिलसिला लगातार जारी है। सोमवार 17 मार्च को सुबह 5:00 से 7:00 बजे के बीच अयोध्या, गोरखपुर, सुल्तानपुर, कुशीनगर, बस्ती और संत कबीरनगर जैसे क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई है। कुशीनगर में स्थिति यह है कि सड़कें पूरी तरह से सफेद चादर से ढक गईं हैं। वहीं, संत कबीरनगर में ओले मटर के दानों के आकार के हैं, जो देखने में काफी बड़े लग रहे हैं।
इसके अलावा, लखनऊ, बस्ती और गोंडा में भी सुबह के समय तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश और ओलावृष्टि हुई। यह मौसम की अनियमितताएँ किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं, क्योंकि इससे फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना बढ़ गई है। मौसम विभाग ने आगे भी इस तरह के मौसम की चेतावनी दी है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
बाराबंकी, बहराइच और आसपास के 10 शहरों में आज बादलों का घना आवरण छाया हुआ है। ठंडी हवाओं का चलना भी शुरू हो गया है, जिसके चलते तापमान में 2 से 3 डिग्री की कमी देखने को मिली है। मौसम विभाग ने इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के 10 शहरों में बारिश की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों की राय
बीएचयू के मौसम विशेषज्ञ मनोज श्रीवास्तव ने जानकारी दी है कि पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी के चलते मौसम में स्पष्ट परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले 3 दिनों तक इस प्रकार के मौसम की स्थिति बनी रहने की संभावना है।
रविवार के दिन वाराणसी ने सबसे गर्म शहर का खिताब अपने नाम किया, जहां अधिकतम तापमान 39.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं, दूसरी ओर अयोध्या ने सबसे ठंडे शहर का दर्जा प्राप्त किया, जहां न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया है।
मौसम के विशेषज्ञ मनोज श्रीवास्तव ने जानकारी दी है कि रविवार शाम को पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव समाप्त हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, आज से तेज पछुआ हवाओं का प्रवाह शुरू होगा, जिससे शाम के समय तापमान में थोड़ी कमी देखने को मिलेगी। हालांकि, बुधवार से तापमान में तेजी से वृद्धि होने की संभावना है।
मार्च के दूसरे हफ्ते में ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है, जो गर्मी की शुरुआत का संकेत है। मौसम विभाग के अनुसार, इस महीने के अंत तक तापमान 42 डिग्री तक पहुंच सकता है, जो लोगों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। मौसम के इस बदलाव के कारण स्वास्थ्य में उतार चढाव हो सकता है।
किसानों के लिए चिंता की बात
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, नवंबर से मार्च-अप्रैल के बीच होने वाली गेहूं की फसल के लिए असमय बारिश अत्यंत हानिकारक साबित हो सकती है। इस अवधि में गेहूं की बाली में दाना पड़ चुका होता है और पकने की प्रक्रिया चल रही होती है। अचानक होने वाली बारिश, ओले और तेज आंधी से गेहूं की फसल गिरने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे दाने की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की मौसमी चुनौतियों के कारण दाना मजबूत नहीं बन पाता, जिससे अंततः गेहूं की पैदावार में कमी आ सकती है। इसके अलावा, दाने का रंग काला और उसका वजन हल्का हो सकता है, जो किसानों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। इस स्थिति में किसानों को सतर्क रहने और उचित उपाय करने की आवश्यकता है ताकि फसल को बचाया जा सके और उत्पादन में सुधार किया जा सके।
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।