यूपी बजट 2026-27: चुनाव से पहले 9.12 लाख करोड़ का मास्टरस्ट्रोक, विकास और रोजगार पर बड़ा फोकस
सरकार का कहना है कि यह बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि “आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” की दिशा में ठोस कदम है. दावा किया गया कि इससे राज्य के हर क्षेत्र में विकास को और गति मिलेगी और आम लोगों की उम्मीदों को मजबूती मिलेगी.
बजट का आकार और बढ़ोतरी
वित्त मंत्री ने कुल 9 लाख 12 हजार 696 करोड़ 35 लाख रुपये का बजट पेश किया. यह बीते साल के मुकाबले करीब 12.9% अधिक है. पिछले वित्त वर्ष 2025-26 का मूल बजट 8.08 लाख करोड़ रुपये था, यानी इस बार बजट में एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई है.
यह भी पढ़ें: यूपी बजट 2026-27: 9.12 लाख करोड़ का रिकॉर्ड बजट, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आईटी पर बड़ा फोकसपूंजीगत व्यय के लिए लगभग 2.50 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो कुल बजट का करीब 19.5% है. सरकार का कहना है कि यह राशि सड़कों, पुलों, अस्पतालों, स्कूलों और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में खर्च की जाएगी.
पंचायत और ग्रामीण विकास पर जोर
पंचायती राज योजनाओं के लिए करीब 32 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 67% ज्यादा है. इस साल पंचायत चुनाव भी संभावित हैं, ऐसे में गांवों के विकास को प्राथमिकता देना सरकार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
सरकार का दावा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पानी, स्वच्छता और डिजिटल सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जाएंगी.
युवाओं और महिलाओं के लिए घोषणाएं
बजट भाषण में 10 लाख युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही लड़कियों की शादी के लिए दी जाने वाली सहायता राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये करने की घोषणा की गई है. छात्राओं को स्कूटी देने के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. वित्त मंत्री ने अपने भाषण के दौरान एक पंक्ति पढ़ी:-
“दीया जलाकर रोशनी कर दूं, जहां अंधेरा है.”
उन्होंने कहा कि यह बजट युवाओं और महिलाओं के सपनों को नई दिशा देगा.
विकास और सुशासन का दावा
वित्त मंत्री ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि यह बजट जनता की अपेक्षाओं और सुशासन की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. सरकार का मानना है कि कानून-व्यवस्था में सुधार, निवेश में वृद्धि और बुनियादी ढांचे के विस्तार से प्रदेश ने देश में नई पहचान बनाई है. उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग प्रदेश के विकास पर सवाल उठाते हैं, उन्हें यह बजट ठोस जवाब देगा.
संतुलित क्षेत्रीय विकास की बात
बजट में पूर्वांचल, बुंदेलखंड और अन्य पिछड़े इलाकों के विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है. सरकार का कहना है कि विकास सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर जिले और हर गांव तक पहुंचेगा.
कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार को प्राथमिकता देते हुए राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने की बात दोहराई गई.
- कुल बजट 9.12 लाख करोड़ रुपये, जो अब तक का सबसे बड़ा बजट है.
- पूंजीगत खर्च में बड़ी बढ़ोतरी, जिससे विकास परियोजनाओं को तेज किया जाएगा.
- पंचायत योजनाओं में 67% की वृद्धि.
- 10 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य.
- बेटियों की शादी के लिए सहायता राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये.
- छात्राओं के लिए 400 करोड़ रुपये से स्कूटी योजना.
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि वर्ष 2017 में योगी सरकार का पहला बजट 3.85 लाख करोड़ रुपये का था. अब यह बढ़कर 9.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यानी 9 साल में बजट का आकार दोगुने से भी ज्यादा हो गया है.
चुनाव से पहले पेश किए गए इस बड़े बजट को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. माना जा रहा है कि यह बजट सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि चुनाव से पहले सरकार की प्राथमिकताओं और सोच का साफ संदेश भी है.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।