UP में बदलेगा यह रेलवे स्टेशन का नाम, अब होगा डॉ. राममनोहर लोहिया के नाम पर
शासन स्तर पर शुरू हुई प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार के अनु सचिव अभय प्रताप श्रीवास्तव ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ल को पत्र भेजकर पूरे मामले पर विस्तृत आख्या मांगी है. यह प्रस्ताव नया नहीं है, बल्कि वर्ष 2023 में विधान परिषद सदस्य डॉ. हरिओम पांडेय द्वारा स्टेशन का नाम बदलने का सुझाव दिया गया था. अब इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है.
जन्मभूमि से जुड़ा है लोहिया का नाम
डॉ. राममनोहर लोहिया का जन्म अंबेडकरनगर जिले के शहजादपुर क्षेत्र में हुआ था. इसके बावजूद जिले में उनके नाम से गिनी-चुनी ही पहचानें मौजूद हैं. शहजादपुर में उनकी एकमात्र प्रतिमा और एक लोहिया भवन ही उनके नाम की याद दिलाते हैं. ऐसे में रेलवे स्टेशन का नाम उनके नाम पर होने से न सिर्फ उनकी स्मृति को सम्मान मिलेगा, बल्कि जिले की ऐतिहासिक पहचान भी मजबूत होगी.
विचार, संघर्ष और समाजवाद का चेहरा
डॉ. राममनोहर लोहिया केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि समाजवादी विचारधारा के प्रखर प्रवक्ता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे. उन्होंने हमेशा समाज के कमजोर और पिछड़े वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही. उनके विचार सामाजिक समानता, न्याय और स्वतंत्र सोच पर आधारित थे. अपने जीवन में उन्होंने सत्ता से ज्यादा सिद्धांतों को महत्व दिया, यही वजह है कि आज भी उनके विचार महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं.
डॉ. लोहिया ने समाज को बदलने के लिए 7 क्रांतियों का सिद्धांत दिया था, जो आज भी बेहद महत्त्वपूर्ण है:-
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- जाति आधारित भेदभाव का अंत
- रंग और नस्ल के आधार पर भेद खत्म करना
- गरीब और अमीर के बीच की खाई कम करना
- विदेशी प्रभुत्व का विरोध
- निजी जीवन में नैतिकता
- लोकतंत्र को मजबूत बनाना
शिक्षा से विचार तक का सफर
डॉ. लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को तत्कालीन फैजाबाद जनपद के अकबरपुर तहसील अंतर्गत शहजादपुर में हुआ था. उनके पिता का नाम हीरालाल और माता का नाम चंदा देवी था. बहुत कम उम्र में उन्होंने मां को खो दिया था. प्रारंभिक शिक्षा अकबरपुर में हुई, इसके बाद उन्होंने वाराणसी, कोलकाता और मुंबई में अध्ययन किया. उच्च शिक्षा के लिए वे जर्मनी गए, जहां उन्होंने हम्बोल्ट विश्वविद्यालय, बर्लिन से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की.
विचार आज भी उतने ही जरूरी
डॉ. राममनोहर लोहिया का निधन 12 अक्टूबर 1967 को नई दिल्ली में हुआ था. उनके निधन को भले ही दशकों बीत चुके हों, लेकिन देश की बदलती राजनीति और सामाजिक परिस्थितियों में आज भी उनके विचारों की जरूरत महसूस की जाती है. समानता, भ्रष्टाचार विरोध और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं.
नामकरण से जुड़े भाव और उम्मीदें
अकबरपुर रेलवे स्टेशन का नाम डॉ. राममनोहर लोहिया के नाम पर होने से न सिर्फ उनके विचारों को सम्मान मिलेगा, बल्कि उनकी जन्मभूमि को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी. यह फैसला आने वाली पीढ़ियों को उनके जीवन और संघर्ष से जोड़ने का माध्यम बन सकता है.
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