यूपी के इन 145 गाँव में जमीन बिक्री पर रोक, जल्द शुरू होगा भूमि अधिग्रहण

यूपी के इन 145 गाँव में जमीन बिक्री पर रोक, जल्द शुरू होगा भूमि अधिग्रहण
यूपी के इन 145 गाँव में जमीन बिक्री पर रोक, जल्द शुरू होगा भूमि अधिग्रहण

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में स्थित सिद्धार्थनगर जिले में प्रस्तावित गोरखपुर-शामली हाईस्पीड एक्सप्रेसवे परियोजना ने ग्रामीण इलाकों में हलचल तेज कर दी है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की अधिसूचना जारी होते ही प्रशासन सक्रिय हो गया है और अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है. परियोजना को क्षेत्र के विकास की दृष्टि से बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन प्रभावित किसानों के मन में कई सवाल भी उठने लगे हैं.

इस एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 750 किलोमीटर बताई जा रही है. सिद्धार्थनगर जिले की 3 तहसीलों के 145 गांव इस परियोजना की जद में आए हैं. इनमें डुमरियागंज तहसील के 56, बांसी के 51 और इटवा के 38 गांव शामिल हैं. डुमरियागंज क्षेत्र में स्थित बेतनार मुस्तहकम, बेतनार एहतमाली, रमवापुर जगतराम, जहदा, डोमसरा, कटरिया पांडेय, पलेसर, भीटानानकार, खम्हरिया, जीवाराई, पेड़ा, सरोथर कठौतिया, महतिनिया खुर्द, बुजुर्ग, बेनीनगर, डेंगहा जोत कस्तुरी और महनुआ समेत कई गांवों की जमीन अधिग्रहण में चिन्हित की गई है.

क्या कह रहा है प्रशासन

जिला प्रशासन ने साफ किया है कि अधिसूचना लागू होने के पश्चात चिन्हित गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर पूरी तरह रोक रहेगी. उपनिबंधक तंजीम खान के अनुसार यह कदम शासन के निर्देश पर उठाया गया है जिससे मुआवजा प्रक्रिया पारदर्शी रहे और आगे किसी तरह का विवाद न हो. अधिकारियों का कहना है कि सभी जरूरी औपचारिकताएं तय नियमों के तहत पूरी की जाएंगी.

किसानों की बढ़ी चिंता

भूमि पर रोक लगने से कई किसानों की योजनाएं वर्तमान में ठहर गई हैं. कुछ लोग अपनी जमीन बेचने की तैयारी में थे, जबकि कई किसान निवेश या पारिवारिक जरूरतों के लिए लेन-देन करना चाहते थे. अब उन्हें मुआवजा तय होने और मिलने तक इंतजार करना पड़ेगा. ग्रामीणों को उम्मीद है कि उन्हें उचित दर पर और समय से भुगतान मिलेगा, लेकिन अनिश्चितता ने चिंता भी बढ़ा दी है.

परियोजना से क्या होंगे फायदे

गोरखपुर-शामली हाईस्पीड एक्सप्रेसवे को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली अहम कड़ी माना जा रहा है. इसके बनने से यात्रा समय कम होने, व्यापार को गति मिलने और नए औद्योगिक अवसर पैदा होने की संभावना जताई जा रही है. साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद है.

वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिद्धार्थनगर के 145 चिन्हित गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर तत्काल प्रभाव से रोक लागू कर दी गई है. यह प्रतिबंध एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने तक जारी रहेगा. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह का जमीन सौदा करने से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर जांच लें, ताकि बाद में परेशानी न हो.

भारतीय बस्ती
bhartiyabasti.com
24 Feb 2026 By Shobhit Pandey

यूपी के इन 145 गाँव में जमीन बिक्री पर रोक, जल्द शुरू होगा भूमि अधिग्रहण

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में स्थित सिद्धार्थनगर जिले में प्रस्तावित गोरखपुर-शामली हाईस्पीड एक्सप्रेसवे परियोजना ने ग्रामीण इलाकों में हलचल तेज कर दी है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की अधिसूचना जारी होते ही प्रशासन सक्रिय हो गया है और अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है. परियोजना को क्षेत्र के विकास की दृष्टि से बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन प्रभावित किसानों के मन में कई सवाल भी उठने लगे हैं.

इस एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 750 किलोमीटर बताई जा रही है. सिद्धार्थनगर जिले की 3 तहसीलों के 145 गांव इस परियोजना की जद में आए हैं. इनमें डुमरियागंज तहसील के 56, बांसी के 51 और इटवा के 38 गांव शामिल हैं. डुमरियागंज क्षेत्र में स्थित बेतनार मुस्तहकम, बेतनार एहतमाली, रमवापुर जगतराम, जहदा, डोमसरा, कटरिया पांडेय, पलेसर, भीटानानकार, खम्हरिया, जीवाराई, पेड़ा, सरोथर कठौतिया, महतिनिया खुर्द, बुजुर्ग, बेनीनगर, डेंगहा जोत कस्तुरी और महनुआ समेत कई गांवों की जमीन अधिग्रहण में चिन्हित की गई है.

क्या कह रहा है प्रशासन

जिला प्रशासन ने साफ किया है कि अधिसूचना लागू होने के पश्चात चिन्हित गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर पूरी तरह रोक रहेगी. उपनिबंधक तंजीम खान के अनुसार यह कदम शासन के निर्देश पर उठाया गया है जिससे मुआवजा प्रक्रिया पारदर्शी रहे और आगे किसी तरह का विवाद न हो. अधिकारियों का कहना है कि सभी जरूरी औपचारिकताएं तय नियमों के तहत पूरी की जाएंगी.

किसानों की बढ़ी चिंता

भूमि पर रोक लगने से कई किसानों की योजनाएं वर्तमान में ठहर गई हैं. कुछ लोग अपनी जमीन बेचने की तैयारी में थे, जबकि कई किसान निवेश या पारिवारिक जरूरतों के लिए लेन-देन करना चाहते थे. अब उन्हें मुआवजा तय होने और मिलने तक इंतजार करना पड़ेगा. ग्रामीणों को उम्मीद है कि उन्हें उचित दर पर और समय से भुगतान मिलेगा, लेकिन अनिश्चितता ने चिंता भी बढ़ा दी है.

परियोजना से क्या होंगे फायदे

गोरखपुर-शामली हाईस्पीड एक्सप्रेसवे को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली अहम कड़ी माना जा रहा है. इसके बनने से यात्रा समय कम होने, व्यापार को गति मिलने और नए औद्योगिक अवसर पैदा होने की संभावना जताई जा रही है. साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद है.

वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिद्धार्थनगर के 145 चिन्हित गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर तत्काल प्रभाव से रोक लागू कर दी गई है. यह प्रतिबंध एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने तक जारी रहेगा. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह का जमीन सौदा करने से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर जांच लें, ताकि बाद में परेशानी न हो.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।