CM Yogi ने 2.51 लाख किसानों को दी बड़ी राहत, किसानों के खाते में पहुंचे 460 करोड़ रुपए
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (खरीफ 2025) के तहत करीब 2.51 लाख किसानों को कुल 285 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई. इसके साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत लगभग 3500 प्रभावित परिवारों को 175 करोड़ रुपये की मदद उपलब्ध कराई गई. सरकार का कहना है कि यह भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो सके.
कृषि ढांचे को मजबूत करने की पहल
कार्यक्रम में कृषि अवसंरचना से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स की भी आधारशिला रखी गई. बागपत, शामली, कासगंज और भदोही में उप कृषि निदेशक कार्यालय तथा मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं के निर्माण को मंजूरी दी गई. झांसी के मऊरानीपुर स्थित राजकीय भूमि संरक्षण केंद्र में 50 बेड के छात्रावास भवन का शिलान्यास हुआ, जबकि लखनऊ में स्मार्ट कृषि ब्यूरो स्टूडियो इकाई शुरू करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई.
मुख्यमंत्री ने किसानों को होली की शुभकामनाएं देते हुए भरोसा दिलाया कि राज्य और केंद्र की संयुक्त व्यवस्था खेती-किसानी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि हाल ही में पारित 2026-27 के बजट में युवाओं, महिलाओं, किसानों और कमजोर वर्गों के लिए कई नई योजनाओं को शामिल किया गया है.
बीमा और दुर्घटना सहायता पर जोर
सरकार के अनुसार फसल बीमा योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समय पर राहत देना है. सूखा, अतिवृष्टि या अन्य कारणों से नुकसान होने पर बीमा भुगतान सुरक्षा कवच का काम करता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले दुर्घटना सहायता का दायरा सीमित था, लेकिन अब किसान के साथ उसके परिवार, बटाईदार और सहकर्मी किसानों को भी योजना में शामिल किया गया है.
यह भी पढ़ें: यूपी के इन जिलों में औद्योगिक विस्तार का बड़ा प्लान, 2500 हेक्टेयर जमीन चिन्हित करने का आदेशराज्य सरकार की मौजूदा व्यवस्था के तहत किसी किसान या उसके परिजन की दुर्घटना में मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि आज जिन 3500 पीड़ित परिवारों को लाभ मिला है, उनसे पहले 16 जून 2025 को 11,690 लाभार्थियों में 561.86 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं. जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्वीकृत धनराशि समय से खातों में पहुंचना सुनिश्चित करें.
आपदा मित्रों की भूमिका बढ़ाने पर जोर
आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए सरकार स्वयंसेवकों के नेटवर्क को भी विस्तार दे रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आपदा मित्र’ स्थानीय स्तर पर पहली प्रतिक्रिया देने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं. प्रधानमंत्री की पहल के अनुरूप प्रदेश में इस अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है.
अधिकारियों के मुताबिक 25 जिलों में एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र और भारत स्काउट एंड गाइड से जुड़े 29,772 युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ा गया है. इन स्वयंसेवकों को 7 दिवसीय प्रशिक्षण, पहचान पत्र और इमरजेंसी रिस्पॉन्डर किट दी जा रही है. किट में लाइफ जैकेट, सर्च टॉर्च, फर्स्ट-एड बॉक्स, हेलमेट और अन्य जरूरी उपकरण शामिल हैं.
राज्य सरकार ने प्रशिक्षित युवाओं के लिए तीन वर्ष का जीवन और चिकित्सा बीमा कवर भी स्वीकृत किया है. इसके लिए 10 फरवरी को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के बीच समझौता किया गया, जिसके तहत प्रत्येक आपदा मित्र को 5 लाख रुपये का बीमा संरक्षण मिलेगा. अभी तक 2959 स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है और शेष बैचों को चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जा रहा है.
आपदा राहत व्यवस्था को तेज करने की कोशिश
सरकार का दावा है कि अब लक्ष्य यह है कि बाढ़, बिजली गिरने या आग जैसी घटनाओं में पीड़ितों को 24 घंटे के भीतर आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाए. वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य आपदा मोचक निधि में 876 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
आधिकारिक जानकारी के अनुसार फसल नुकसान से प्रभावित 5,14,322 किसानों को 260 करोड़ रुपये कृषि निवेश अनुदान के रूप में दिए जा चुके हैं. जनहानि के 5398 मामलों में 216 करोड़ रुपये और मकान क्षति के 27,448 प्रभावित परिवारों को 24 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं.
प्राकृतिक आपदाओं की अग्रिम चेतावनी के लिए प्रदेश के 5 प्रमुख शहरों लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी और आजमगढ़ में डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किए जा रहे हैं. इसके अलावा 450 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और ब्लॉक स्तर पर लगभग 2000 ऑटोमेटिक रेन गेज लगाने का काम अंतिम चरण में बताया गया है.
रोजगार से भी जोड़े जाएंगे आपदा मित्र
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि भविष्य में होमगार्ड की प्रस्तावित 45 हजार भर्तियों में प्रशिक्षित आपदा मित्रों को प्राथमिकता मिल सकती है. वर्तमान में उनकी सेवाएं स्वैच्छिक हैं, लेकिन नियमित बल में शामिल होने पर उन्हें मानदेय भी मिलेगा.
कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे. सरकार का कहना है कि इन पहलों से किसानों को आर्थिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन तंत्र दोनों मोर्चों पर मजबूती मिलेगी.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।