यूपी में जमीन मकान खरीदने वाली की बढ़ेंगी मुश्किलें, महँगी हुई रजिस्ट्री

यूपी में जमीन मकान खरीदने वाली की बढ़ेंगी मुश्किलें, महँगी हुई रजिस्ट्री
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उत्तर प्रदेश में स्थित गोरखपुर में रजिस्ट्री विभाग ने एक नई प्रक्रिया की शुरुआत की है, जिसके तहत बिना सर्किल रेट में वृद्धि किए ही स्टॉम्प शुल्क में बढ़ोतरी की जा रही है। यह निर्णय उन सामान्य निर्देशों में बदलाव के तहत लिया गया है, जो सर्किल रेट के साथ लागू होते हैं। इस बदलाव के परिणामस्वरूप प्लॉट, फ्लैट और अन्य प्रकार की जमीनों की रजिस्ट्री की लागत में वृद्धि होने की संभावना है। 

विशेष रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में, अतिरिक्त शुल्क में 50 से 100% तक की वृद्धि की जा सकती है, जिससे आम जनता पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। यह कदम रजिस्ट्री प्रक्रिया को और महंगा बना देगा, जिससे खरीदारों और निवेशकों के लिए नई चुनौतियाँ उत्पन्न होंगी। इस स्थिति को देखते हुए, नागरिकों को अपनी संपत्ति के लेन-देन की योजना बनाते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

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अगस्त 2016 से लागू संपत्तियों के क्रय-विक्रय के सामान्य निर्देशों में बदलाव की योजना तैयार की गई है। इस प्रक्रिया में अधिकारी और कर्मचारी गहन विचार-विमर्श कर रहे हैं कि स्टॉम्प शुल्क में कितना इजाफा करना है। कुछ क्षेत्रों में जहां शुल्क पहले से ही अधिक है, वहां इसे कम करने का भी विचार किया जा रहा है। इस संदर्भ में प्रस्तावित दरें रजिस्ट्री विभाग द्वारा जिला प्रशासन को भेजी जा रही हैं। जैसे ही इन दरों पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी, तब से बढ़ी हुई दरें प्रभावी हो जाएंगी।

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नए सामान्य निर्देशों के अनुसार, फ्लैट और प्लॉट खरीदने वाले लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। प्रस्तावित दरों में बदलाव के तहत, यदि किसी संपत्ति की सीमाओं में एक से अधिक मार्ग हैं, तो उस भूमि के न्यूनतम मूल्य की गणना अधिकतम दर वाले मार्ग के लिए निश्चित दर में 20% की वृद्धि के साथ की जाएगी। वर्तमान में यह वृद्धि दर केवल 10% है। इस बदलाव का सीधा असर उन खरीदारों पर पड़ेगा जो संपत्तियों में निवेश करने की योजना बना रहे हैं। 

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12 मीटर से ज्यादा चौड़े मार्ग के किनारे स्थित भूमि पर शुल्क की दरों में बदलाव किया गया है। अब, निश्चित दर से 30% ज़्यादा शुल्क जमा करना होगा, जबकि पहले यह दर 20% थी। इसके अतिरिक्त, नगरीय, अर्द्धनगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि के अंतरण के मामले में, यदि 50 मीटर की त्रिज्या में प्लाटिंग या कॉलोनाइजर्स का कार्य किया जाता है, तो कृषि भूमि की दर में 60% की वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। वर्तमान में यह वृद्धि 50% है। इससे भूमि की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है, जो कि विकास के लिए आवश्यक है।

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गोरखपुर में सदर तहसील क्षेत्र समेत कई अन्य तहसीलों में 2016 के पश्चात से सर्किल रेट में कोई हिंदी नहीं देखी गई है। परंतु, 2016 से पहले 2014 और 2015 में सर्किल रेट में लगातार बदलाव किए गए थे। इस स्थिरता के बीच, विकास कार्यों के लिए जिन क्षेत्रों में जमीनों का क्रय या अधिग्रहण किया जा रहा है, वहां के किसान अब सर्किल रेट में वृद्धि की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और विकास की जरूरतों को देखते हुए सर्किल रेट को समय-समय पर अपडेट किया जाना चाहिए। 

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इस मुद्दे में प्रभावित किसानों ने आर्बिट्रेशन के माध्यम से सर्किल रेट में वृद्धि का अनुरोध किया है। भटहट क्षेत्र के रिंग रोड से प्रभावित किसानों ने हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और सर्किल रेट बढ़ाने की मांग की। विनीत कुमार सिंह (एडीएम, वित्त और राजस्व) ने जानकारी दी कि "संपत्तियों के क्रय-विक्रय में सामान्य निर्देशों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आवश्यक संशोधनों के लिए गणना कार्य भी किया जा रहा है। परंतु फिलहाल अंतिम निर्णय तय नहीं किया गया है।"

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हाल ही में, आवासीय अपार्टमेंट्स में सुविधाओं के लिए शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। यदि किसी अपार्टमेंट में स्वीमिंग पूल, जिम, फिटनेस सेंटर, क्लब हाउस, खेल क्षेत्र या पार्क जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, तो इसके लिए 5 से 15% अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। यह कदम उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो इन सुविधाओं का लाभ उठाना चाहते हैं और उनके लिए यह एक अतिरिक्त खर्च हो सकता है।

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इसके अलावा, कृषि भूमि के मूल्यांकन में भी बदलाव किया गया है। यदि किसी कृषि भूमि की सीमाओं से 100 मीटर से ज्यादा परंतु 200 मीटर तक की दूरी पर जनसंख्या या आवासीय गतिविधियां हो रही हैं, तो उस अकृषक भूमि का मूल्यांकन निश्चित कृषि दर से 40% ज्यादा किया जाएगा। इस समय, यह दर 30% है। 

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अकृषक संपत्ति के 50 मीटर के दायरे में एप्रोच रोड के समानांतर व्यावसायिक गतिविधियों की वजह से मूल्यांकन दर में बढ़ोतरी की योजना बनाई जा रही है। इस बढ़ोतरी को 20% से बढ़ाकर 50% करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, फ्लैट के सुपर एरिया सहित अन्य संबंधित बिंदुओं पर सामान्य निर्देशों में भी बदलाव की बात की जा रही है। लेकिन, अधिकारियों द्वारा इस प्रस्तावित दर की समीक्षा की जाएगी, और इसमें कुछ संशोधन किए जा सकते हैं। यह कदम संपत्ति के मूल्यांकन को अधिक सटीक बनाने और व्यावसायिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

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