सीतापुर के इस गांव में पक्के पुल की तैयारी तेज, हजारों ग्रामीणों को मिलेगी राहत

सीतापुर के इस गांव में पक्के पुल की तैयारी तेज, हजारों ग्रामीणों को मिलेगी राहत
सीतापुर के इस गांव में पक्के पुल की तैयारी तेज, हजारों ग्रामीणों को मिलेगी राहत

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में स्थित सीतापुर जिले के दुल्लापुर गांव के पास सरायन नदी पर बने जर्जर लकड़ी के पुल को हटाने की प्रक्रिया तेज हो गई है. वर्षों से इस अस्थायी पुल के सहारे रह रहे ग्रामीणों को अब पक्के पुल की उम्मीद जगी है. लोक निर्माण विभाग ने करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल के निर्माण का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है. योजना मंजूर होने पर यहां 40 मीटर लंबा मजबूत पुल बनाया जाएगा, जिससे आसपास की बड़ी आबादी को सुरक्षित और आसान आवागमन की सुविधा मिल सकेगी.

ग्रामीणों के मुताबिक, यह लकड़ी का पुल दशकों से उनकी मजबूरी बना हुआ है. रोजमर्रा के काम, खेती-बाड़ी और बाजार जाने के लिए लोग इसी जोखिम भरे रास्ते का इस्तेमाल करते हैं. विभाग की पहल से लोगों में उम्मीद बढ़ी है कि अब जल्द ही इस समस्या से स्थायी छुटकारा मिलेगा.

हादसे के बाद तेज हुई कार्रवाई

दरअसल, मिश्रिख क्षेत्र के हरैया धाम के पास 15 जनवरी को लकड़ी का एक पुल अचानक टूट गया था, जिसमें लगभग 50 ग्रामीण बाल-बाल सुरक्षित बच गए थे. इस घटना के बाद प्रशासन और लोक निर्माण विभाग सतर्क हो गया. जिले भर में पुराने लकड़ी के पुलों की समीक्षा शुरू की गई और जहां जरूरत है वहां पक्के पुल बनाने की योजना पर काम तेज किया गया.

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इसी अभियान के अंतर्गत दुल्लापुर गांव में गोन नदी पर नए पुल का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है. अधिकारियों का कहना है कि स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा.

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14 गांवों के लोगों को मिलेगा सीधा फायदा

डढवैया, निजामाबाद, बन्नी पुरवा, खेरवा, नाराखेरा, महेशपुर, बभनिया, शाहपुर, बेहड़ा और गड़रियनपुरवा समेत करीब 14 गांवों के लोग इस लकड़ी के पुल पर निर्भर हैं. वर्तमान में ग्रामीण इस रास्ते से होकर केवल बाइक से ही गुजर पाते हैं. बड़े वाहनों को भिठौली मार्ग से होकर कमलापुर जाना पड़ता है, जिससे करीब 18 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है.

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यदि नया पुल बन जाता है तो यह दूरी घटकर लगभग तीन किलोमीटर रह जाएगी. इससे किसानों, व्यापारियों और आम यात्रियों का समय और खर्च दोनों बचेगा.

बारिश में बढ़ जाती है परेशानी

बरसात का मौसम आते ही लकड़ी का यह पुल सबसे बड़ी मुसीबत बन जाता है. तेज बारिश में पुल बह जाने या बंद हो जाने से बाइक और साइकिल सवारों को भी लंबा चक्कर लगाना पड़ता है. इससे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी देरी होती है.

बभनिया गांव की श्यामा देवी बताती हैं कि आपात स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब किसी की तबीयत अचानक खराब हो जाए. एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में काफी देर लग जाती है. वहीं बेहड़ा गांव के लवकुश का कहना है कि पक्का पुल बन जाने से खेती और मंडी तक अनाज पहुंचाना बहुत आसान हो जाएगा.

ग्रामीण हर साल खुद बनाते हैं पुल

दुल्लापुर में यह लकड़ी का पुल कोई नया नहीं है. करीब एक सदी से ग्रामीण ही आपस में लकड़ी जुटाकर हर साल अस्थायी पुल तैयार करते हैं. बारिश खत्म होने के बाद पुल बनाया जाता है, लेकिन बरसात में अक्सर यह बह जाता है. इसके बावजूद मजबूरी में लोग इसी पर आवागमन करते रहे हैं.

  • दुल्लापुर में गोन नदी पर लगभग 40 मीटर लंबा पक्का पुल प्रस्तावित है.
  • निर्माण के लिए करीब 7 करोड़ रुपये की लागत का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है.
  • पुल बनने से लगभग 25 हजार की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा.
  • स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराने की तैयारी है.

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बुद्धि सागर सिंह ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है और धनराशि मिलते ही पुल निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा. ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार उनकी वर्षों पुरानी मांग जरूर पूरी होगी.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।