यूपी के इस जिले में विकास की नई रफ्तार, गंगा एक्सप्रेसवे के पास बनेगा इंडस्ट्रियल ग्रीन कॉरिडोर
औद्योगिक क्षेत्र का दायरा होगा और बड़ा
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पहले से तय किए गए औद्योगिक ग्रीन गलियारे का क्षेत्रफल अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ाया जाएगा. इस विस्तार के अंतर्गत आसपास के कई गांवों की जमीन को चिन्हित किया जा रहा है. माना जा रहा है कि यह दायरा दोगुने से भी अधिक हो सकता है, जिससे बड़े स्तर पर उद्योगों की स्थापना का रास्ता खुलेगा.
खादर क्षेत्र को सेक्टरों में बांटने की तैयारी
मां गंगा के खादर क्षेत्र को नोएडा की तर्ज पर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है. पूरे इलाके को अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा. इससे योजनाबद्ध विकास तो होगा ही, साथ ही आधारभूत सुविधाओं का विस्तार भी तेजी से किया जा सकेगा.
एक्सप्रेसवे से बढ़ी इलाके की अहमियत
हसनपुर तहसील क्षेत्र में 23.60 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे पहले ही बनकर तैयार हो चुका है. एक्सप्रेसवे के चालू होने से यह इलाका निवेशकों की नजर में आ गया है. विशेष रूप से मंगरौला के पास बने टी-प्वाइंट को औद्योगिक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
3 साल पहले शुरू हुई थी जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया
करीब 3 साल पहले यूपीडा के अधिकारियों ने मंगरौला, रूस्तमपुर खादर और दौलतपुर कला गांवों में लगभग 135 हेक्टेयर भूमि को औद्योगिक ग्रीन शहर के लिए चिन्हित किया था. इनमें से लगभग 60% से अधिक जमीन तहसील प्रशासन किसानों से बैनामा कराकर पहले ही खरीद चुका है.
अब और गांव भी आ सकते हैं दायरे में
इसके अतिरिक्त करीब 100 बीघा ग्राम समाज की भूमि भी अधिग्रहित की जा चुकी है. अब जब परियोजना का विस्तार करने का फैसला लिया गया है, तो गांगटकोला, हाकमपुर, ढकिया खादर, गंगवार, बुरावली और शकरगढ़ी जैसे गांवों के किसानों की जमीन भी इस ग्रीन कॉरिडोर के दायरे में आ सकती है. सूत्रों की मानें तो कुल मिलाकर 200 से 300 हेक्टेयर भूमि खरीदने की तैयारी है.
स्थानीय विकास को मिलेगी नई दिशा
गंगा एक्सप्रेसवे और औद्योगिक ग्रीन कॉरिडोर के एक साथ विकसित होने से पूरा इलाका आर्थिक रूप से मजबूत होगा. किसानों, व्यापारियों और आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा.
प्रशासन की अपील
हसनपुर के एसडीएम हिमांशु उपाध्याय ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि औद्योगिक ग्रीन गलियारा स्थापित होने से क्षेत्र में खुशहाली आएगी. विकास को नई रफ्तार मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. किसानों को इस योजना में सहयोग करना चाहिए जिससे आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ मिल सके.
रोजगार और सुविधाओं
औद्योगिक ग्रीन गलियारा बनने के बाद क्षेत्र में बड़े-छोटे उद्योग स्थापित होंगे. इससे स्थानीय मजदूरों को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा. युवाओं को अपने ही क्षेत्र में नौकरी मिलने की उम्मीद है. साथ ही कृषि उपकरण, मशीनरी और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।