लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे तैयार, जल्द ही 30 मिनट में पूरा होगा सफर
तैयारी अंतिम दौर में, अब इंतजार खत्म
शुरुआत में इस एक्सप्रेस वे को पिछले साल के अंत तक खोलने की योजना थी, लेकिन कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य अधूरा रहने के कारण इसे टालना पड़ा. अब फरवरी तक लगभग सारा काम पूरा कर लिया गया है. प्रशासन के मुताबिक मार्च महीने से इस मार्ग पर वाहनों का संचालन शुरू करने की तैयारी चल रही है.
मौजूदा रास्तों की परेशानी से सभी हैं परेशान
वर्तमान में कानपुर से लखनऊ जाने के लिए अधिकतर लोग जाजमऊ गंगा पुल का ही इस्तेमाल करते हैं. इस रास्ते पर हर समय ट्रैफिक का दबाव रहता है. सुबह और शाम के वक्त जाम आम बात हो गई है. कई बार यात्रियों को घंटों फंसे रहना पड़ता है, जिससे समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी होती है.
ओवरब्रिज का काम भी बना हुआ है सिरदर्द
गंगा बैराज की ओर जाने वाले सरैया क्रॉसिंग पर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण अभी जारी है. इसके पूरा होने में समय लग सकता है. ऐसे में नया एक्सप्रेस वे शुरू होना नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों, छात्रों और एंबुलेंस जैसी आपात सेवाओं के लिए बड़ी राहत साबित होगा.
एलिवेटेड और ग्रीनफील्ड रूट का मिला फायदा
इस एक्सप्रेस वे को आधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है. लगभग 18 किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड है, जबकि करीब 45 किलोमीटर का रूट ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की तरह बनाया गया है. इसका मतलब यह है कि यात्रियों को बिना किसी सिग्नल और रुकावट के तेज और आरामदायक सफर मिलेगा.
कई इलाकों को जोड़ेगा नया मार्ग
कानपुर की ओर जाजमऊ गंगा पुल से करीब 2 किलोमीटर आगे एक्सप्रेस वे की एंट्री दी गई है. वहीं लखनऊ की तरफ यह मार्ग पिपरसंड इलाके में निकलता है. इसके बाद नवाबगंज, बंथरा, बनी, दतौली कांठा, तौरा, नीरना, अमरसस और रावल होते हुए उन्नाव के आजाद चौक तक पहुंचा जा सकेगा.
इस एक्सप्रेस वे के चालू होते ही लखनऊ से कानपुर का सफर पूरी तरह बदल जाएगा. जो दूरी अभी 2 से 3 घंटे में तय होती है, वह केवल 30 से 40 मिनट में पूरी हो सकेगी. यही वजह है कि इसे क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है.
वर्ष 2023 में शुरू हुई यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है. मार्च से संचालन शुरू होते ही न सिर्फ सफर का समय घटेगा, बल्कि पूरे इलाके में आवागमन, व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी भी आसान हो जाएगी. लोगों को उम्मीद है कि अब जाम और देरी की समस्या इतिहास बन जाएगी.
4700 करोड़ की परियोजना, सुरक्षा पर खास जोर
करीब 4700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेस वे पर सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है. पूरे मार्ग पर तीन बड़े पुल, 28 छोटे पुल और 38 अंडरपास बनाए गए हैं. इसके अलावा छह फ्लाईओवर और चार इंटरचेंज भी तैयार किए गए हैं, जिससे ट्रैफिक बिना किसी रुकावट के चलता रहे.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।