यूपी में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बदली व्यवस्था, अब इस तरह से होगी हाजिरी
कुलपति के निर्देश पर जारी हुआ आदेश
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी के निर्देश के बाद कुलसचिव भावना मिश्रा ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है. आदेश के अनुसार सभी विभागाध्यक्षों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारियों की उपस्थिति समय पर दर्ज हो और उसका विवरण हर महीने की दो तारीख तक प्रशासन को भेजा जाए. तय समय पर उपस्थिति विवरण न मिलने की स्थिति में वेतन भुगतान में अड़चन आ सकती है.
ऑफलाइन हाजिरी से बढ़ी थीं शिकायतें
विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अब तक कई आउटसोर्सिंग कर्मचारी सिर्फ रजिस्टर में ऑफलाइन हाजिरी लगाकर विभागों के बजाय अधिकारियों या विभागाध्यक्षों के निजी कार्यों में लगाए जा रहे थे. इसी वजह से यह व्यवस्था सवालों के घेरे में थी. कर्मचारियों की मौजूदगी विभाग में दर्ज होती थी, लेकिन उनसे निजी काम कराए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं.
हादसे के बाद बढ़ी सख्ती
पिछले साल एक गंभीर मामला भी सामने आया था, जब एक कर्मचारी किसी शिक्षक के घर पर काम करते हुए घायल हो गया था. इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठे थे. अब नए नियम लागू होने के बाद कर्मचारियों को अपने तय कार्यस्थल पर ही मौजूद रहना होगा और उनसे निजी काम लेना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा.
विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारी तय
नए आदेश के तहत विभागाध्यक्षों की भूमिका भी अहम कर दी गई है. उन्हें यह देखना होगा कि सभी कर्मचारी बॉयोमीट्रिक मशीन के जरिए नियमित हाजिरी दर्ज करें. साथ ही हर महीने उपस्थिति का पूरा ब्योरा समय से प्रशासन को भेजना उनकी जिम्मेदारी होगी. इससे कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय हो सकेगी.
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एक फरवरी से अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बॉयोमीट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होगी. हालांकि शिक्षकों की उपस्थिति पहले से ही विभागों में दर्ज की जा रही है, इसलिए उनके लिए इस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
पारदर्शिता और अनुशासन की ओर कदम
विश्वविद्यालय प्रबंधन का मानना है कि इस फैसले से न सिर्फ कर्मचारियों की कार्यसंस्कृति में सुधार होगा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था भी अधिक पारदर्शी बनेगी. साथ ही विश्वविद्यालय में संसाधनों के दुरुपयोग पर भी रोक लगेगी.
नियमों से सुधरेगा कार्य
बॉयोमीट्रिक सिस्टम लागू होने के बाद कर्मचारियों को स्पष्ट कार्यस्थल मिलेगा और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी. प्रशासन को उम्मीद है कि इस फैसले से विश्वविद्यालय का कार्य वातावरण बेहतर होगा और भविष्य में ऐसी शिकायतों की गुंजाइश कम रह जाएगी.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।