यूपी में इन पेड़ को काटा तो होगी कार्रवाई, सरकार ने बदले नियम

यूपी में इन पेड़ को काटा तो होगी कार्रवाई, सरकार ने बदले नियम
यूपी में इन पेड़ को काटा तो होगी कार्रवाई, सरकार ने बदले नियम

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई महत्वपूर्ण पेड़ों को काटने पर लगे प्रतिबंध को आगे बढ़ाने का फैसला किया है. इसके अंतर्गत आम, नीम, शीशम, सागौन, पीपल, बरगद और महुआ जैसी प्रमुख प्रजातियों के पेड़ों की कटाई पर रोक को 2 साल के लिए और बढ़ा दिया गया है.

दो साल और बढ़ाया गया प्रतिबंध

सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार इन पेड़ों की कटाई पर लगाया गया प्रतिबंध अब 31 दिसंबर 2027 तक लागू रहेगा। इससे पहले यह रोक 31 दिसंबर को समाप्त हो गई थी, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र को बढ़ाने के उद्देश्य से इसे फिर से लागू कर दिया गया है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि बिना वन विभाग की अनुमति के इन पेड़ों को काटना गैरकानूनी माना जाएगा।

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इन पेड़ों को काटने से पहले लेनी होगी अनुमति

सरकार द्वारा जिन पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें आम (कलमी और तुकमी), नीम, साल, महुआ, पीपल, बरगद, गूलर, पाकड़, अर्जुन, पलाश, बेल, चिरौंजी, खिरनी, कैथा, इमली, जामुन, असना, कुसुम, रीठा, भिलावा, तून, सलई, हल्दू, बाकली/करधई, धौ, खैर, शीशम और सागौन समेत कुल 29 प्रजातियां शामिल हैं।

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नियमों के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति को निजी या सरकारी जमीन से इन पेड़ों को हटाना है तो इसके लिए पहले वन विभाग से ऑनलाइन अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

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एक पेड़ काटने पर लगाने होंगे 10 पौधे

वन विभाग के नियमों के अनुसार यदि किसी कारण से पेड़ काटने की अनुमति मिलती है तो उसके बदले एक पेड़ के स्थान पर 10 नए पौधे लगाना आवश्यक होगा। इसके लिए आवेदन के साथ एक शपथपत्र देना होगा कि लगाए गए पौधों की देखभाल भी की जाएगी।

यदि कोई व्यक्ति पौधे लगाने में असमर्थ है तो उसे वन विभाग में प्रतिपूर्ति राशि जमा करनी होगी। विभाग एक पौधे के लिए लगभग 100 रुपये जमा कराता है। यानी 10 पौधों के लिए करीब एक हजार रुपये जमा करने होते हैं। इसके अलावा पौधारोपण का खर्च भी अलग से लिया जाता है, जो अलग-अलग प्रभागों में भिन्न हो सकता है।

नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई

सरकार ने साफ किया है कि बिना अनुमति पेड़ काटने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा और गंभीर मामलों में 6 महीने तक की जेल की सजा भी हो सकती है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन नियमों से प्रदेश में हरित क्षेत्र को बढ़ोतरी और पर्यावरण संतुलन बना रहेगा.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।