यूपी के शिक्षकों के लिए अच्छी खबर, अब नहीं होगी यह दिक़्क़त

यूपी के शिक्षकों के लिए अच्छी खबर, अब नहीं होगी यह दिक़्क़त
यूपी के शिक्षकों के लिए अच्छी खबर, अब नहीं होगी यह दिक़्क़त

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के एडेड विद्यालयों में अब शिक्षकों को हटाना या उनके खिलाफ कार्रवाई करना प्रबंधन के लिए आसान नहीं होगा. राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सेवा सुरक्षा के मामले में इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम की उपधारा ही अंतिम और प्रभावी व्यवस्था है. इसके बाद शिक्षकों की नौकरी पर मनमानी रोक लगाने की कोशिशों पर लगाम लगने की उम्मीद है.

सरकार ने यह साफ कहा है कि अलग से सेवा सुरक्षा का प्रावधान जोड़ने की मांग उचित नहीं है, क्योंकि कानून में पहले से ही पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है. इसी संबंध में सोमवार को सरकार की ओर से सभी जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं.

कौन सी धारा देगी सुरक्षा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 की धारा 16 (छ) की उपधारा 3 (क) ही शिक्षकों का सेवा सुरक्षा कवच है. इस प्रावधान के अंतर्गत कोई भी प्रबंधन बिना जिला विद्यालय निरीक्षक की पूर्व अनुमति के किसी शिक्षक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकता.

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यानी अब न किसी शिक्षक को निलंबित किया जा सकता है, न सेवा समाप्त की जा सकती है, न पद से हटाया जा सकता है और न ही वेतन या अन्य परिलब्धियों में कटौती की जा सकती है. यहां तक कि बिना अनुमति नोटिस देना भी विधि विरुद्ध माना जाएगा.

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धारा 21 समाप्त होने के बाद बढ़े विवाद

पहले सेवा सुरक्षा के लिए धारा 21 लागू थी, लेकिन उसके समाप्त होने के बाद कई जिलों से शिकायतें आने लगीं कि प्रबंधन मनमाने ढंग से शिक्षकों को निलंबित या बर्खास्त कर रहे हैं. बीते समय में 300 से अधिक शिक्षकों को अलग-अलग कारण बताकर सेवा से हटाए जाने के मामले सामने आए.

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यह मुद्दा विधानमंडल के दोनों सदनों में भी उठा, जहां कई सदस्यों ने शिक्षकों के साथ हो रहे व्यवहार पर सवाल खड़े किए. लगातार बढ़ते विवादों के बाद सरकार ने अब स्पष्ट निर्देश जारी कर स्थिति साफ कर दी है.

डीआईओएस की भूमिका भी तय

सरकार ने यह भी कहा है कि जिला विद्यालय निरीक्षक किसी भी प्रबंधन की ओर से भेजी गई कार्रवाई को महीनों तक लंबित न रखें. यदि कोई प्रस्ताव नियमों के खिलाफ है तो उसे तुरंत लौटा दिया जाए. सुनवाई के नाम पर फाइलों को रोके रखना भी उत्पीड़न की श्रेणी में माना जाएगा.

क्या बदलेगा अब हालात

सरकार के इस आदेश से साफ संकेत है कि अब एडेड विद्यालयों में शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर कोई भ्रम नहीं रहेगा. बिना अनुमति की गई कार्रवाई निरस्त मानी जाएगी.

यह ध्यान देने योग्य है कि अब प्रबंधन को किसी भी कदम से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा. ऐसे में शिक्षकों को मनमानी कार्रवाई से राहत मिलने की उम्मीद है और सेवा से जुड़ी अस्थिरता पर रोक लग सकती है.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।