आजमगढ़: आसिफगंज में नल से आ रहा नाली का पानी, 7 हजार लोगों की सेहत पर खतरा
बार-बार बिगड़ रही जलापूर्ति व्यवस्था
स्थानीय लोगों के अनुसार आसिफगंज मोहल्ले में महीने में 3 से 4 बार नलों से गंदा पानी आने की स्थिति बन जाती है. यह समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है. बावजूद इसके अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है. हर बार अस्थायी मरम्मत कर मामले को टाल दिया जाता है, जिससे लोगों का भरोसा लगातार टूटता जा रहा है.
नलों से निकला नाली जैसा पानी
बीते सोमवार की रात करीब 8 बजे अचानक घरों में लगे नलों से बदबूदार और गंदा पानी आने लगा. पानी का रंग और दुर्गंध देखकर लोग घबरा गए. कई परिवारों ने तुरंत नलों का इस्तेमाल बंद कर दिया. लोगों का कहना है कि यह पानी नाली और सीवर के भीतर से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण सप्लाई में मिल रहा है.
सदावर्ती वार्ड में भी हालात चिंताजनक
सिर्फ आसिफगंज ही नहीं, बल्कि सदावर्ती वार्ड के निवासी भी इसी परेशानी से जूझ रहे हैं. यहां भी कई बार नलों से दूषित पानी आने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत करने पर कभी पाइप जोड़ दी जाती है, तो कभी अस्थायी मरम्मत कर दी जाती है, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है.
सेहत पर मंडरा रहा गंभीर खतरा
दूषित पानी के सेवन से संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे पानी से हैजा, टाइफाइड, पेचिश, उल्टी-दस्त और तेज बुखार जैसी बीमारियां फैल सकती हैं. इसके अतिरिक्त हेपेटाइटिस ए और ई का भी खतरा बना रहता है, जिससे लिवर पर गंभीर असर पड़ सकता है. बच्चों में कुपोषण और शारीरिक विकास रुकने की आशंका रहती है, वहीं गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक है.
आसिफगंज मोहल्ले में लगभग 5000 लोग निवास करते हैं, जबकि सदावर्ती वार्ड में रहने वाली आबादी करीब 2500 है. यानी कुल मिलाकर 7500 से अधिक लोग इस समय शुद्ध पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं. यदि समय रहते जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो यह समस्या किसी बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है.
स्थानीय निवासियों में चिंता का माहौल
स्थानीय निवासी राजीव कुमार का कहना है कि अचानक नल से नाली जैसा पानी आना बेहद डराने वाला है. बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को लेकर चिंता बनी रहती है. कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया.
वहीं नीरज बताते हैं कि इंदौर जैसी घटना के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं. गंदा पानी देखकर डर लगता है कि कहीं बच्चे बीमार न पड़ जाएं. मजबूरी में बोतलबंद पानी खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है.
स्थानीय नागरिक विनायक का कहना है कि सीवर लाइन के बीच से पेयजल पाइप डालना गंभीर लापरवाही है. यदि समय रहते पाइपलाइन नहीं बदली गई और नियमित जांच नहीं हुई, तो किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता.
नगरपालिका ने इस मामले में दी जानकारी
नगरपालिका की ओर से मनोज ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही संबंधित क्षेत्र में पाइपलाइन की जांच कराई जा रही है. जहां भी लीकेज पाई जाएगी, उसे तत्काल ठीक कराया जाएगा. साथ ही पानी की गुणवत्ता की भी जांच कराई जाएगी, जिससे लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।