यूपी में आखिर क्यों भड़के 1076 हेल्पलाइन कर्मचारी? सड़क पर उतरने की पूरी वजह जानिए
Uttar Pradesh News
लखनऊ में गुरुवार 2 अप्रैल को 1076 सीएम हेल्पलाइन में काम करने वाले कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. ये कर्मचारी मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचकर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया. शुरुआती रोक-टोक के बावजूद कर्मचारी आगे बढ़ते रहे, जिसके बाद आगे बेरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया गया.
मौके पर उत्तर प्रदेश परिवहन की बसें भी मंगाई गईं, जिनमें कर्मचारियों को जबरन बैठाए जाने का आरोप है. इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
कम सैलरी बना विरोध का कारण
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें तय मानदेय के अनुसार वेतन नहीं मिल रहा है. एक महिला कर्मचारी ने बताया कि उनसे लंबे समय तक काम कराया जाता है और शुरुआत में 15 हजार रुपये महीने देने का वादा किया गया था, लेकिन खाते में केवल 7 हजार रुपये ही आए. उन्होंने कहा, 7 हजार रुपये में घर और बच्चों का खर्च चलाना मुश्किल है, इसलिए हमें सड़क पर उतरना पड़ा है.
यह भी पढ़ें: यूपी के इन जिलों में देर रात हुई बारिश, जानें अब किन जिलों के लिए मौसम विभाग ने जारी किया अलर्टकर्मचारियों की मुख्य मांगें
कर्मचारियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें-
- वेतन बढ़ाकर कम से कम 15 हजार रुपये किया जाए
- काम के दौरान 50 मिनट का ब्रेक दिया जाए
- वरिष्ठ अधिकारियों के दुर्व्यवहार पर कार्रवाई की जाए
प्रदर्शन के चलते लखनऊ की सड़कों पर जाम की स्थिति भी देखने को मिली. कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा.
यूपी में आखिर क्यों भड़के 1076 हेल्पलाइन कर्मचारी? सड़क पर उतरने की पूरी वजह जानिए
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लखनऊ में गुरुवार 2 अप्रैल को 1076 सीएम हेल्पलाइन में काम करने वाले कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. ये कर्मचारी मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचकर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया. शुरुआती रोक-टोक के बावजूद कर्मचारी आगे बढ़ते रहे, जिसके बाद आगे बेरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया गया.
मौके पर उत्तर प्रदेश परिवहन की बसें भी मंगाई गईं, जिनमें कर्मचारियों को जबरन बैठाए जाने का आरोप है. इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
कम सैलरी बना विरोध का कारण
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें तय मानदेय के अनुसार वेतन नहीं मिल रहा है. एक महिला कर्मचारी ने बताया कि उनसे लंबे समय तक काम कराया जाता है और शुरुआत में 15 हजार रुपये महीने देने का वादा किया गया था, लेकिन खाते में केवल 7 हजार रुपये ही आए. उन्होंने कहा, 7 हजार रुपये में घर और बच्चों का खर्च चलाना मुश्किल है, इसलिए हमें सड़क पर उतरना पड़ा है.
कर्मचारियों की मुख्य मांगें
कर्मचारियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें-
- वेतन बढ़ाकर कम से कम 15 हजार रुपये किया जाए
- काम के दौरान 50 मिनट का ब्रेक दिया जाए
- वरिष्ठ अधिकारियों के दुर्व्यवहार पर कार्रवाई की जाए
प्रदर्शन के चलते लखनऊ की सड़कों पर जाम की स्थिति भी देखने को मिली. कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा.
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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है