UP में संपत्तियों की बड़े स्तर पर जांच, रजिस्ट्री, स्टांप शुल्क और खरीदारों का पूरा रिकॉर्ड जाएगा खंगाला

UP में संपत्तियों की बड़े स्तर पर जांच, रजिस्ट्री, स्टांप शुल्क और खरीदारों का पूरा रिकॉर्ड जाएगा खंगाला
Uttar Pradesh News

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में स्थित धार्मिक नगरीयों की चमक बढ़ी है, भीड़ बढ़ी है, कारोबार फैला है और अब सरकार ने तय किया है कि इस तेज़ी के बीच कहीं राजस्व का ‘खेेल’ तो नहीं चल रहा. अयोध्या, वाराणसी, मथुरा-वृंदावन और चित्रकूट जैसे शहरों में हाल के वर्षों में जितनी तेज़ी से संपत्तियाँ खरीदी-बेची गईं, उतना ही सख़्त निरीक्षण अब शुरू होने जा रहा है.

अब जांच की शुरुआत 

उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था सुदृढ़ होने के पश्चात धार्मिक व पर्यटन शहरों में देश-विदेश से आने वालों की संख्या अचानक बढ़ गई. होटल, होम-स्टे और अन्य व्यवसायों ने ज़ोर पकड़ा. इसके साथ ही दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग भू-निवेश के लिए इन शहरों का रुख करने लगे.

सरकार को शक है कि इतनी तेज़ खरीद-फरोख्त के बीच कहीं संपत्तियों की रजिस्ट्री में कम मूल्य दिखा कर स्टांप शुल्क की चोरी तो नहीं की गई. इसी वजह से अब पुराने ढर्रे को बदल दिया गया है, पहले साल में 2 बार जांच होती थी, अब हर 3 महीने में एक बार स्क्रूटनी होगी.

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जिले-दर-जिले निरीक्षण 

सभी जिलों को आदेश भेजे गए हैं कि वे पिछले कुछ सालों की रजिस्ट्री का पूरा डेटा भेजें:-

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  • कितनी संपत्तियाँ खरीदी गईं?
  • कितना स्टांप शुल्क जमा हुआ?
  • रजिस्ट्री का मूल्य डीएम सर्किल रेट के हिसाब से था या कम?

जरूरत पड़ने पर बड़ी संपत्तियों की साइट विज़िट भी कराई जाएगी. जहां स्टांप शुल्क कम पाया गया, वहाँ तुरंत नोटिस भेजने की तैयारी है.

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AI भी लगाएगा नज़र

विभागीय सूत्र बताते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में तकनीक को भी शामिल किया गया है. कई जगहों पर मामलों को एआई टूल्स के जरिए क्रॉस-चेक किया जाएगा जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पहचानने में समय न लगे.

किसकी मिलीभगत? खरीदार या अफसर

जांच में अगर यह साबित हुआ कि स्टांप शुल्क कम जमा किया गया या सर्किल रेट से कम मूल्य दिखाया गया, तो खरीदार से बाकी राशि की वसूली होगी और अगर अफसर की मिलीभगत मिली तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई तय की जाएगी. सरकार द्वारा स्पष्ट कहा जा रहा है कि यह अभियान किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधारने के लिए है.

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि यह जांच पूरे प्रदेश में की जा रही है ताकि देखा जा सके कि रजिस्ट्री निर्धारित सर्किल रेट पर हुई या नहीं. उनके मुताबिक, “मकसद परेशान करना नहीं, गड़बड़ी रोकना है. फिर चाहे वह किसी अधिकारी की हो या किसी आम खरीदार की.”

तीन साल का रिकॉर्ड: धार्मिक शहरों में रजिस्ट्री की रफ्तार

  • 2025

अयोध्या – 37,323

वाराणसी – 67,097

मथुरा – 1,28,469

चित्रकूट – 15,221

  • 2024

अयोध्या – 46,266

वाराणसी – 78,078

मथुरा – 1,45,708

चित्रकूट – 19,894

  • 2023

अयोध्या – 44,155

वाराणसी – 69,178

मथुरा – 1,21,772

चित्रकूट – 18,547

इन आंकड़ों से साफ है कि इन शहरों में रजिस्ट्री की रफ्तार लगातार बढ़ती जा रही है और यही सरकार के सतर्क होने की सबसे बड़ी वजह भी है.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।