सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा: तक्षक जगत से पृथक नही - राघवाचार्य
महात्मा जी ने सुदामा चरित्र, उद्धव जी का भगवान की चरण पादुका लेकर बदरिकाश्रम जाने, यदुकुल संहार और भगवान के स्वधाम गमन, और कलयुग के धर्मो के वर्णन सहित अनेक प्रसंगो का वर्णन विस्तार से किया. कहा कि पति यदि धन, सम्पत्ति, सुख सुविधा दे और पत्नी ऐसे पति की सेवा करे तो इसके आश्चर्य क्या है, धन्य हैं सुदामा की पत्नी सुशीला जिन्होने भूखे रहकर भी दरिद्र पति को भी परमेश्वर मानकर सेवा करती रही. भगवान कृष्ण ने जो सम्पत्ति कुबेर के पास भी नही है उसे सुदामा को दिया. सारा विश्व श्रीकृष्ण का वंदन करता है और वे एक दरिद्र ब्राम्हण और उनकी पत्नी सुदामा का वंदन करते हैं.
सुदामा चरित्र का भावुक वर्णन करते हुये महात्मा जी ने कहा कि शारीरिक मिलन तुच्छ है और मन का मिलन दिव्य. यदि धनी व्यक्ति दरिद्रों को हृदय से सम्मान दें तो आज भी सभी नगर द्वारिका की तरह समृद्ध हो सकते हैं.
श्रीकृष्ण द्वारा उद्धव को उपदेश देने के प्रसंग का वर्णन करते हुये महात्मा जी ने कहा कि ज्ञानयोग, निष्काम कर्मयोग, भक्तियोग का ज्ञान देते हुये भगवान कृष्ण ने कहा कि उद्धव इस अखिल विश्व में मैं ही व्याप्त हूं, ऐसी भावना करना. सुख दुख तो मन की कल्पना है. जो सदगुणो से सम्पन्न है वह ईश्वर है और असंतुष्ट व्यक्ति दरिद्र.
भाजपा जिलाध्यक्ष महेश शुक्ल , माता श्यामा देवी ने विधि विधान से परिजनों, श्रद्धालुओं के साथ व्यास पीठ का वंदन किया. गुरूवार को भण्डारे का आयोजन किया गया है. मुख्य रूप से विधायक सीए चन्द्र प्रकाश शुक्ल, पूर्व जिलाध्यक्ष दयाशंकर मिश्र, वैभव पाण्डेय, अनूप खरे, विमल पाण्डेय, विश्वनाथ गिरी, गिरीश पाण्डेय, आशीष कुमार श्रीवास्तव, विजय तिवारी, रामउग्रह जायसवाल, रामचरन चौधरी, सुधाकर पाण्डेय, ब्रम्हानंद शुक्ला, सुरेन्द्र कुमार त्रिपाठी, विनय उपाध्याय, योगेश शुक्ला, गिरीश पाण्डेय, अनूप खरे, अखिलेश शुक्ला के साथ श्रद्धालु श्रोता उपस्थित रहे.
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