यूजीसी के नए कानून के विरोध में मेधा पार्टी का धरना 32वें दिन भी जारी
मेधा पार्टी द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, यूजीसी के नये कानून की वापसी सहित 7 सूत्रीय मांगों को लेकर गांधीकला भवन परिसर में बापू प्रतिमा के निकट चल रहा धरना गुरूवार को 32 वें दिन भी जारी रहा. सबेरे से जारी बरसात के बावजूद लोग धरना स्थल पर जुटे और केन्द्र सरकार से मांग किया कि यूजीसी का काला कानून सरकार वापस ले वरना आगामी चुनावों में युवा, छात्र भाजपा को आईना दिखाने का काम करेंगे. मेधा पार्टी के केन्द्रीय प्रवक्ता दीन दयाल त्रिपाठी ने कहा कि जब तक मांगे पूरी नहीं हो जाती मेधा का धरना अनवरत जारी रहेगा. कहा कि इस मसले पर केन्द्र सरकार की चुप्पी छात्र विरोधी मानसिकता को उजागर कर रहा है. भाजपा अंग्रेजों की तरह समाज में फूट डालो राज करो की नीति पर चल रही है, देश का छात्र अब इसे समझ चुका है. भाजपा सरकार पर यूजीसी को लेकर चुप्पी आने वाले चुनावों में भारी पड़ेगी.
मेधा पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीनदयाल तिवारी ने कहा कि शिक्षा में समानता और सामाजिक न्याय के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पार्टी लगातार संघर्ष करती रहेगी. गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा और उनके अधिकार दिलाने के लिये संघर्ष जारी रहेगा. मेधा नेता पं. सुनील भट्ट कहा कि यूजीसी में नया कानून लाकर केन्द्र सरकार छात्रों को जाति धर्म में विभाजित करने का षड़यंत्र कर रही है. यह कानून वापस न हुआ तो देश को गंभीर परिणाम भोगने होंगे.
धरने के 32 वंे दिन मुख्य रूप से बापू प्रतिमा के निकट धरना देने वालों में मुख्य रूप से प्रतीक मिश्र, सोनू चौधरी, सन्तोष शुक्ल, विशाल सिंह, दीपक शुक्ला, , वृजेश द्विवेदी, अजय कुमार चौधरी, राहुल त्रिपाठी, दीपक शुक्ल, रामरीका पाण्डेय, अंशू चौरसिया, विपुल सिंह के साथ ही मेधा के अनेक पदाधिकारी, सदस्य और विभिन्न संगठनों के लोग शामिल रहे.
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