कोरोना काल में निजी विद्यालय संकट में, प्रबंधक, अभिभावक और छात्र पशोपेश में

कोरोना काल में निजी विद्यालय संकट में, प्रबंधक, अभिभावक और छात्र पशोपेश में
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-जितेंद्र कौशल सिंह- बस्ती (भाब). ऑनलाइन पढ़ाई के बाद अधिकांश शिक्षण संस्थानो ने बच्चों की फीस, प्रवेश शुल्क की मांग शुरू कर दी तो अभिभावकों के समक्ष संकट खड़ा हो गया. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वैश्विक महामारी कोरोना के बीच हुए लॉक डाउन में वे बच्चों की फीस, स्टेशनरी, ड्रेस की डिमांड को कैसे पूरा करें. कारण है कि लॉक डाउन में अधिकांश अभिभावकों के व्यवसाय ठप पड़े हैं और उनकी आय का कोई रास्ता हाल फिलहाल नहीं है. ऐसे में कुछ विद्यालयों के प्रबन्धतंत्र संकट के समय अभिभावको के लिए राहत लेकर आए है और संकट काल में फीस माफी की घोषणा के साथ ही विद्यालय में ही किताब बैंक तैयार कर परिजनों को राहत पहुचाने में लगे हैं.

बहादुरपुर ब्लाक के रोझिया गांव के महर्षि विवेकानन्द माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक अमितेष प्रताप सिंह ने बताया कि विद्यालय के खुलने के लिए सरकार के आदेश का इंतजार है विद्यालय की प्रबंधक ज्ञानमती सिंह के आदेश पर विद्यालय में बच्चों की फीस तब से ही ली जायेगी जब वह विद्यालय आना प्रारम्भ करेगें. विद्यालय प्रबंधन ने इस फीस माफी के साथ ही नये पुराने सभी बच्चों से एडमीशन फीस न लेने एवं उनके पाठय सामग्री का प्रबंध करने के लिए पुराने विद्यार्थियो की किताबों को उनसे लेकर नये विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है. जिससे अभिभावकों पर पड़ने वाले खर्च का दबाव कम हो सके. कहा कि हमारा मकसद है कि इस महामारी मे किसी भी अभिभावक को आर्थिक तंगी के कारण बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए परेशान न होना पड़े.

लॉक डाउन हुआ तो शिक्षण संस्थान भी बन्द हुए

श्रीमती शिमला देवी परमात्मा प्रसाद इंटर मीडियट कालेज शिवनगर गणेशपुर के अमित श्रीवास्तव ने भी तीन माह की फीस माफ करने के साथ ही बच्चों को अन्य सहूलियत मुहैया कराने की बात कही है. लॉक डाउन हुआ तो शिक्षण संस्थान भी बन्द हो गए. विद्यालयों में चल रही बच्चों की परीक्षाएं अधूरी रह गई. शासन के आदेश पर कक्षा आठ तक के बच्चों को पास कर उन्हे अगली कक्षाओं में प्रवेश दे दिया गया. लांकडाउन के बीच स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई भी शुरू हो गई.

ज्यादातर शहरी क्षेत्र के विद्यालयों ने व्हाट्सऐप पर बच्चों को पढ़ाने का स्कूलों में सिलसिला शुरू हुआ. यह कहा जाने लगा कि इस संकट के समय में शिक्षण संस्थान प्रवेश से लेकर बच्चों की फीस नहीं लेंगे. इससे अभिभावक राहत महसूस कर रहे थे, लेकिन उनकी यह खुशी उस समय काफूर हो गई जब अधिकांश शिक्षण संस्थानो ने ऑनलाइन पढ़ाई की औपचारिकता के बाद उन्हे मैसेज कर फीस जमा करने की मांग शुरू कर दी. लॉक डाउन के चलते एक तो अधिकांश अभिभावको की आय ठप पड़ गई है.

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पिछले तीन महीने से उनकी आय ठप पड़ी हुई है ऊपर से कापी, किताब, ड्रेस, फीस के नाम पर विद्यालयों ने अभिभावको के मोबाइल पर फोन कर उन्हे फीस जमाकर एडमिशन कराने लिए कहा जा रहा है. कुछ एक विद्यालयो ने तो किताबो के परिवर्तन कर नई किताबो को खरीदने के लिए किताबों की फोटो तक व्हाट्सऐप पर भेजना शुरू कर दिया है. इसे लेकर अधिकांश अभिभावक परेशान है वही जिन विद्यालयों ने फीस माफी और पुरानी किताबो से ही शिक्षण कार्य शुरू करने की घोषणा की है उसकी सराहना की जा रही है.अधिकांश अभिभावकों का कहना है कि इन विद्यालयों से अन्य शिक्षण संस्थानों को भी सीख लेनी चाहिए.

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