बस्ती में IGRS खेल? पहले जमीन को बताया सही, फिर खुद ही रिपोर्ट से पलटे अफसर!

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बस्ती में IGRS खेल? पहले जमीन को बताया सही, फिर खुद ही रिपोर्ट से पलटे अफसर!
बस्ती में IGRS खेल? पहले जमीन को बताया सही, फिर खुद ही रिपोर्ट से पलटे अफसर!

आयुष विभाग का विवाद अब सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली पर  सीधा सवाल खड़ा कर रहा है. मानपुर बाबू निवासी मनोज सिंह ने आरोप लगाया है कि क्षेत्रीय आयुष अधिकारी डॉ. जगदीश यादव और आईजीआरएस पटल पर तैनात कर्मचारी विकास सिंह ने पैसे लेकर न केवल भ्रामक रिपोर्ट तैयार की, बल्कि पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बना दिया.

अपनी ही रिपोर्ट से पलटे अफसर, सवालों के घेरे में पूरी प्रक्रिया

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन अधिकारियों ने खुद मौके का सर्वे कर प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन को उपयुक्त बताते हुए संस्तुति दी थी, वही अब अपनी ही रिपोर्ट से पलट गए. आखिर ऐसा क्या हुआ कि “सब कुछ ठीक” अचानक “सब कुछ गलत” हो गया? यह यू-टर्न महज लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित खेल की ओर इशारा करता है.

कागजों में निपटाई गई फाइल, जमीनी हकीकत पर उठे गंभीर सवाल

आरोप है कि भानपुर तहसील के ग्रामसभा लोढ़वा, नथवापुर में भूमि आवंटन और विभागीय मंजूरी के बावजूद, आईजीआरएस पर शिकायत आते ही बिना स्थलीय निरीक्षण की फाइल निपटा दी गई. इससे साफ संकेत मिलता है कि कागजों में ही पूरा खेल कर दिया गया और जमीनी सच्चाई को दरकिनार कर दिया गया. मामले ने तूल पकड़ लिया है.

बस्ती में बिना नोटिस चला बुलडोजर! जिलाधिकारी से शिकायत करेगा पीड़ित, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी यह भी पढ़ें: बस्ती में बिना नोटिस चला बुलडोजर! जिलाधिकारी से शिकायत करेगा पीड़ित, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

जांच की मांग तेज, कार्रवाई होगी या दब जाएगा मामला?

इस सम्बन्ध में रुधौली के पूर्व विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. मनोज सिंह ने दो टूक कहा है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी अपनी जिम्मेदारी भूलकर योजनाओं को “कमाई का जरिया” बना रहे हैं, जिससे सरकार की मंशा और जनता दोनों के साथ खिलवाड़ हो रहा है. अब यह मामला प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा बन चुका है, क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर फाइलों के नीचे दबाकर मामला ठंडा कर दिया जाएगा, यही सबसे बड़ा सवाल है.

बस्ती में “समझौता हुआ, पैसे लिए…” विकलांग मामले पर कोतवाल का बड़ा दावा यह भी पढ़ें: बस्ती में “समझौता हुआ, पैसे लिए…” विकलांग मामले पर कोतवाल का बड़ा दावा

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bhartiyabasti.com
27 Apr 2026 By Shobhit Pandey

बस्ती में IGRS खेल? पहले जमीन को बताया सही, फिर खुद ही रिपोर्ट से पलटे अफसर!

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आयुष विभाग का विवाद अब सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली पर  सीधा सवाल खड़ा कर रहा है. मानपुर बाबू निवासी मनोज सिंह ने आरोप लगाया है कि क्षेत्रीय आयुष अधिकारी डॉ. जगदीश यादव और आईजीआरएस पटल पर तैनात कर्मचारी विकास सिंह ने पैसे लेकर न केवल भ्रामक रिपोर्ट तैयार की, बल्कि पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बना दिया.

अपनी ही रिपोर्ट से पलटे अफसर, सवालों के घेरे में पूरी प्रक्रिया

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन अधिकारियों ने खुद मौके का सर्वे कर प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन को उपयुक्त बताते हुए संस्तुति दी थी, वही अब अपनी ही रिपोर्ट से पलट गए. आखिर ऐसा क्या हुआ कि “सब कुछ ठीक” अचानक “सब कुछ गलत” हो गया? यह यू-टर्न महज लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित खेल की ओर इशारा करता है.

कागजों में निपटाई गई फाइल, जमीनी हकीकत पर उठे गंभीर सवाल

आरोप है कि भानपुर तहसील के ग्रामसभा लोढ़वा, नथवापुर में भूमि आवंटन और विभागीय मंजूरी के बावजूद, आईजीआरएस पर शिकायत आते ही बिना स्थलीय निरीक्षण की फाइल निपटा दी गई. इससे साफ संकेत मिलता है कि कागजों में ही पूरा खेल कर दिया गया और जमीनी सच्चाई को दरकिनार कर दिया गया. मामले ने तूल पकड़ लिया है.

जांच की मांग तेज, कार्रवाई होगी या दब जाएगा मामला?

इस सम्बन्ध में रुधौली के पूर्व विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. मनोज सिंह ने दो टूक कहा है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी अपनी जिम्मेदारी भूलकर योजनाओं को “कमाई का जरिया” बना रहे हैं, जिससे सरकार की मंशा और जनता दोनों के साथ खिलवाड़ हो रहा है. अब यह मामला प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा बन चुका है, क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर फाइलों के नीचे दबाकर मामला ठंडा कर दिया जाएगा, यही सबसे बड़ा सवाल है.

https://bhartiyabasti.com/basti-news-live-in-hindi/igrs-game-in-basti-first-told-the-land-was-right/article-25577
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।